August 27, 2026

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उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद यानी उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस की अगुवाई वाले इस गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गी सुदर्शन रेड्डी को अपना साझा उम्मीदवार चुना है। इस फैसले के पीछे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

एनडीए की ओर से तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन के नाम की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की ओर से तमिल बनाम तमिल मुकाबले से बचने के लिए रणनीतिक फैसला लिया गया है।

गैर-राजनीतिक चेहरे पर सहमति

सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की बैठकों में कई नामों पर चर्चा हुई थी।

  • एनसीपी ने महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी का नाम प्रस्तावित किया था।
  • डीएमके ने अपने वरिष्ठ नेता तिरुचि शिवा को मैदान में उतारने की कोशिश की।
  • वहीं एक नाम पूर्व इसरो वैज्ञानिक एम. अन्नादुरई का भी चर्चा में रहा।

लेकिन आखिरकार ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने जोर दिया कि विपक्ष को एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष छवि वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए। उनका यह भी तर्क था कि यदि विपक्ष तमिलनाडु से ही किसी नेता को मैदान में उतारता है, तो मुकाबला तमिल बनाम तमिल बन जाएगा, जिससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

ममता बनर्जी की निर्णायक भूमिका

TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने गठबंधन की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए राजनीति से दूर व्यक्ति को ही चुना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को NDA के जाल में नहीं फंसना चाहिए, जिसमें वे क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर सियासी लाभ उठाना चाहते हैं।

TMC की इस दलील को कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों ने भी अंततः स्वीकार कर लिया और गी सुदर्शन रेड्डी के नाम पर सर्वसम्मति बन गई।

गी सुदर्शन रेड्डी कौन हैं?

गी सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और वे न्यायपालिका में अपनी निष्पक्षता, निष्कलंक छवि और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। वे राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिष्ठा बहुत मजबूत रही है। विपक्ष को उम्मीद है कि एक साफ-सुथरी छवि वाला उम्मीदवार NDA के खिलाफ एक मजबूत नैतिक चुनौती पेश करेगा।

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टीएमसी की बदली भूमिका

2022 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में TMC ने वोटिंग से दूरी बनाई थी और उस वक्त कांग्रेस उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को बड़ा झटका लगा था। TMC ने तब आरोप लगाया था कि उम्मीदवार तय करते समय उनसे सलाह नहीं ली गई थी।

लेकिन इस बार TMC पूर्ण सक्रियता के साथ गठबंधन की बैठकों में शामिल रही और न केवल उम्मीदवार के चयन में बल्कि चुनावी रणनीति तय करने में भी मुख्य भूमिका निभाई।

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