Tag: देशभक्ति

  • सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाला हमला 71 वर्षीय वकील ने चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश

    सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाला हमला 71 वर्षीय वकील ने चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश

    देश की सर्वोच्च अदालत में आज एक चौंकाने वाली घटना हुई। 71 साल के वकील राकेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि यह हमला असफल रहा और किसी को चोट नहीं लगी, लेकिन यह खबर तुरंत पूरे देश की सुर्खियों में आ गई। इस घटना ने न केवल न्यायपालिका बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी चिंता और हैरानी पैदा कर दी है।

    आरोपी वकील की गिरफ्तारी और रिहाई

    घटना के तुरंत बाद राकेश कुमार को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने उनका विवरण दर्ज किया और सुरक्षा जांच की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने किसी भी कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया और आरोपी को रिहा कर दिया। इस फैसले ने कई लोगों में सवाल खड़े कर दिए कि आखिर ऐसा क्यों किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सुप्रीम कोर्ट के अंदर नियम और प्रक्रियाएं कितनी संवेदनशील और जटिल हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया

    इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीजेआई बी.आर. गवई से फोन पर बात की और उन्हें इस हमले के विषय में आश्वस्त किया। इसके अलावा, पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए हमले से हर भारतीय में गुस्सा है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है।” यह स्पष्ट संदेश है कि देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए न्यायपालिका की सुरक्षा और सम्मान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    देशभर की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर हलचल

    देशभर के लोग इस घटना पर गुस्सा जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर #SupremeCourtAttack तेजी से ट्रेंड कर रहा है। हर कोई चीफ जस्टिस की सुरक्षा और न्यायपालिका के सम्मान की बात कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि लोकतंत्र में कानून और सम्मान का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है। कई कानूनी विशेषज्ञ इस घटना की गंभीरता पर चर्चा कर रहे हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के उपायों पर सुझाव दे रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट और लोकतंत्र की सुरक्षा

    सुप्रीम कोर्ट हमारे लोकतंत्र की रीढ़ है। वहां पर हमले की कोई जगह नहीं है। यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि कानून और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना न केवल अधिकारियों का बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। न्यायपालिका की सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज में इसे सम्मान और जागरूकता के साथ देखा जाना चाहिए।

  • राहुल गांधी के लोकतंत्र पर बयान देश की छवि सवालों के घेरे में या सच का सामना?

    राहुल गांधी के लोकतंत्र पर बयान देश की छवि सवालों के घेरे में या सच का सामना?

    भारत में लोकतंत्र पर सवाल उठाने वाले बयानों के कारण राहुल गांधी लगातार सुर्खियों में हैं।उनके इन बयानों ने सिर्फ भारतीय राजनीति में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है।कांग्रेस नेता दावा करते हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है।लेकिन सवाल उठता है – क्या यह वैश्विक आलोचना है, या अपने ही देश की छवि पर कुठाराघात?

    बहस का मंच आनंद रंगनाथन बनाम विवेक बंसल

    इस मुद्दे पर बड़ी बहस छिड़ चुकी है।पत्रकार शिव अरूर ने इस बहस के लिए मंच सजाया, जहाँ लेखक आनंद रंगनाथन और कांग्रेस नेता विवेक बंसल आमने-सामने आए।आनंद रंगनाथन का कहना है कि विदेश में जाकर अपने ही देश को बदनाम करना लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला है।उनका तर्क है कि देश की छवि और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।वहीं विवेक बंसल ने पलटवार करते हुए कहा कि सच को दबाना देशभक्ति नहीं है।उनके अनुसार यदि लोकतंत्र पर खतरा है तो उसे उजागर करना और सतर्कता फैलाना जरूरी है।

    लोकतंत्र की रक्षा या देश की छवि पर हमला?

    सवाल अब यही है क्या राहुल गांधी की बातें लोकतंत्र की रक्षा के लिए हैं, या यह भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश है?
    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसे बयान दो तरह से देखे जा सकते हैं –

    1. लोकतंत्र की आवाज़: जो लोग इसे लोकतंत्र की हिफाजत के लिए बोलने की हिम्मत मानते हैं।
    2. देश की बदनामी: जो लोग इसे भारत के सम्मान पर सीधा हमला बताते हैं।
    3. इस बहस ने देश को एक बार फिर दो हिस्सों में बाँट दिया है।

    जनता और राजनीति सोच का मंथन

    देश के नागरिक और राजनीतिक विश्लेषक इस बहस पर गहन विचार कर रहे हैं।यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि किसी नेता द्वारा उठाए गए मुद्दे राजनीतिक लाभ के लिए हैं या सच की आवाज़ हैं।लोकतंत्र के प्रति जागरूकता जरूरी है, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय सम्मान और अंतरराष्ट्रीय छवि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।राहुल गांधी के बयानों ने देश में बहस का नया मोड़ पैदा किया है।
    सवाल अभी भी वही है क्या ये बयान लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए हैं, या भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को कमजोर करने की कोशिश?
    देशवासियों को यह विचार करना होगा कि कहाँ सच और देशभक्ति का संतुलन बनाना है।तो आप क्या सोचते हैं – राहुल गांधी लोकतंत्र की आवाज़ उठा रहे हैं, या अपने ही देश की बदनामी कर रहे हैं?

  • देशभर में दशहरा पर रावण दहन 10 फुट ऊँचा ट्रंप पुतला जलाकर किया ‘कलियुग का रावण’ घोषित

    देशभर में दशहरा पर रावण दहन 10 फुट ऊँचा ट्रंप पुतला जलाकर किया ‘कलियुग का रावण’ घोषित

    दशहरे पर आमतौर पर रावण के पुतले जलते हैं, लेकिन इस बार फिरोज़पुर का नज़ारा कुछ अलग था।स्वदेशी जागरण मंच ने इस दशहरे पर 10 फुट ऊँचा खास पुतला तैयार किया, जो दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक डोनाल्ड ट्रंप का रूप ले चुका था। इस पुतले को तैयार करने में 15 दिन लगातार दिन-रात मेहनत की गई। जब यह पुतला खड़ा हुआ, तो हर किसी की नज़र ठहर गई।

    पुतले के दस सिर और ट्रंप की ‘कमज़ोरियाँ’

    इस पुतले के दस सिर पर ट्रंप की नीतियों और उनके व्यवहार के बारे में संदेश लिखे गए थे।

    • एक सिर पर लिखा था – मैं घमंडी हूँ
    • दूसरे पर – मैं टैरिफ युद्ध छेड़ता हूँ
    • कहीं लिखा – मैं नोबेल पुरस्कार का लालची हूँ
    • तो कहीं – मैं नकली शांतिदूत हूँ
    • कुछ सिरों पर लिखा था – मैं पाखंडी हूँ और मैं धोखेबाज़ हूँ
    • इन सभी संदेशों के जरिए यह स्पष्ट किया गया कि पुतले का हर सिर ट्रंप के रवैये और उनकी नीतियों का तंज कर रहा था।

    ‘कलियुग का रावण’ और भीड़ की प्रतिक्रिया

    लोगों ने इस पुतले को देखकर इसे ‘कलियुग का रावण’ कहा।दशहरे के इस मौके पर जब आग की लपटों में यह पुतला जला, तो मौजूद भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं।संदेश साफ था – चाहे अहंकार किसी का भी हो, अंत हमेशा रावण जैसा ही होता है।

    आधुनिक दुनिया में रावण का रूप

    फिरोज़पुर के इस अनोखे दशहरे ने यह दिखा दिया कि रावण सिर्फ पौराणिक कहानियों में ही नहीं, बल्कि आज की दुनिया में भी ज़िंदा है बस उसका रूप बदल चुका है।यह दृश्य केवल एक पुतले का जलना नहीं था, बल्कि अहंकार, सत्ता और नीतियों पर कटाक्ष का प्रतीक भी था।इस साल का दशहरा फिरोज़पुर में केवल उत्सव नहीं बल्कि एक संदेश भी लेकर आया – कि किसी भी नेता या व्यक्ति का अहंकार, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंततः रावण जैसी कहानी का हिस्सा बनता है।
    तो आपको कैसा लगा ‘कलियुग का ये नया रावण’? आप अपनी राय कमेंट में ज़रूर साझा करें।

  • सौरभ के चैलेंज को सूर्या कुमार यादव ने किया स्वीकार, मैच फीस की पूरी रकम दी सेना को

    सौरभ के चैलेंज को सूर्या कुमार यादव ने किया स्वीकार, मैच फीस की पूरी रकम दी सेना को

    जब आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सौरभ ने भारतीय क्रिकेटर सूर्या कुमार यादव को चैलेंज किया, तो कई लोगों की उत्सुकता बढ़ गई।चैलेंज को लेकर सवाल ये था क्या सूर्या सिर्फ मैदान में खेलेंगे, या देश के लिए भी कुछ अलग करेंगे?और जवाब आया सूर्या कुमार यादव के दिल से उन्होंने चैलेंज को बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार किया और मैदान में जोश के साथ अपनी प्रतिभा दिखाई।लेकिन असली जीत तो तब हुई, जब उन्होंने अपने सारे मैच फीस भारतीय सेना को समर्पित करने का ऐलान किया।

    मैच फीस का देशभक्ति में समर्पण असली खिलाड़ी की पहचान

    खेल सिर्फ खेल नहीं, भावना भी होती है।सूर्या कुमार यादव ने यह दिखा दिया कि असली खिलाड़ी वही होता है, जो सिर्फ रन या विकेट के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए भी खेलता है।उन्होंने कहा कि उनकी मैच फीस का पूरा पैसा देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाली भारतीय सेना को जाएगा।इस नेक फैसले ने न केवल सौरभ के चैलेंज को स्वीकार करने का प्रमाण दिया, बल्कि एक सच्चे देशभक्त की भी छवि पेश की।

    राजनीति और खेल का अनोखा संगम

    AAP MLA सौरभ ने जो चैलेंज दिया, उसने खेल के प्रति एक नई उम्मीद जगाई।राजनीति और खेल का ऐसा मिलन कम देखने को मिलता है, जहां दोनों मिलकर देशभक्ति का संदेश दें।यह घटना साबित करती है कि देशभक्ति किसी भी क्षेत्र में हो सकती है, और असली खिलाड़ी वो है जो अपने काम से भी अपनी सोच दिखाए।

    सूर्या कुमार यादव मैदान का फाइटर, देश का सपूत

    सूर्या कुमार यादव ने अपनी बल्लेबाजी से जहां विपक्षी टीमों के दांत खट्टे किए, वहीं उनकी यह पहल युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई।
    यह संदेश साफ है देश के लिए कुछ करना है, तो सिर्फ बातें नहीं, कर्म भी करना होगा।

  • नवरात्रि 2025: पीएम मोदी का ‘जीएसटी बचत उत्सव’ संदेश, स्वदेशी और आध्यात्मिक ऊर्जा का आह्वान!

    नवरात्रि 2025: पीएम मोदी का ‘जीएसटी बचत उत्सव’ संदेश, स्वदेशी और आध्यात्मिक ऊर्जा का आह्वान!

    नवरात्रि का शुभारंभ, आर्थिक राहत और भक्ति का संगम

    जय माता दी! 22 सितंबर 2025 को शारदीय नवरात्रि की धूमशाला देशभर में शुरू हो गई, और इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी दरों में हालिया कटौती को ‘जीएसटी बचत उत्सव’ का नाम दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर अपने संदेश में पीएम ने इसे नीतिगत बदलाव से कहीं अधिक बताया—यह त्योहार आर्थिक राहत, आध्यात्मिक नवीनीकरण और स्वदेशी वस्तुओं के लिए नई ऊर्जा का प्रतीक है। “इस बार नवरात्रि का यह शुभ अवसर बहुत विशेष है। जीएसटी बचत उत्सव के साथ-साथ स्वदेशी के मंत्र को इस दौरान एक नई ऊर्जा मिलने वाली है। आइए, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए सामूहिक प्रयासों में जुट जाएं,” पीएम ने लिखा। यह संदेश न केवल उपभोक्ताओं को त्योहारी खरीदारी में राहत देता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करता है। नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा के साथ शुरू हुआ यह पर्व साहस, संयम और संकल्प की प्रेरणा देता है।

    नवरात्रि में आर्थिक राहत: जीएसटी कटौती का जश्न, उपभोक्ताओं को लाभ

    प्रधानमंत्री ने नवरात्रि को आर्थिक उत्सव से जोड़ते हुए कहा कि हालिया जीएसटी संरचना में बदलाव से उच्च-खर्च वाले त्योहारी मौसम में आम नागरिकों को बड़ा लाभ मिलेगा। घरेलू आवश्यक वस्तुओं, परिधानों, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामानों पर दरें घटने से खरीदारी सस्ती हो गई है। “इस नवरात्रि पर सचेत खरीदारी करें और स्वदेशी उत्पादों का समर्थन करें। यह केवल आर्थिक कदम नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता आंदोलन के स्वदेशी आदर्शों की पुष्टि भी है,” पीएम ने अपील की। यह कदम मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा, स्थानीय व्यवसायों को मजबूत करेगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी कटौती से त्योहारी बाजार में 10-15% की बचत संभव है, जो अर्थव्यवस्था को गति देगी। पीएम का यह संदेश उपभोक्तावाद को सकारात्मक दिशा देता है—जहां खरीदारी केवल सुख नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम बने।

    यह भी पढ़ें : कानपुर मर्डर केस लिव-इन पार्टनर ने आकांक्षा की हत्या, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया

    आध्यात्मिक संदेश: माँ शैलपुत्री की पूजा से शक्ति और सौभाग्य

    आर्थिक बातों के साथ पीएम ने नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। “नवरात्रि में आज मां शैलपुत्री की विशेष पूजा-अर्चना का दिन है। मेरी कामना है कि माता के स्नेह और आशीर्वाद से हर किसी का जीवन सौभाग्य और आरोग्य से परिपूर्ण रहे,” उन्होंने कहा। माँ शैलपुत्री, देवी दुर्गा का प्रथम स्वरूप, हिमालय की पुत्री हैं—जो स्थिरता और आत्मबल की प्रतीक हैं। उनकी पूजा से स्वास्थ्य, शक्ति और खुशी में वृद्धि होती है। पीएम ने जोर दिया कि “साहस, संयम और संकल्प के भक्ति-भाव से भरा यह पावन पर्व हर किसी के जीवन में नई शक्ति और नया विश्वास लेकर आए। जय माता दी!” यह संदेश आधुनिक जीवन की भागदौड़ में आध्यात्मिक जुड़ाव की याद दिलाता है, जहां नवरात्रि केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन का माध्यम है। भक्तों को प्रेरित करते हुए पीएम ने परिवार के साथ पूजा करने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का आह्वान किया।

    सांस्कृतिक जागरूकता: पंडित जसराज भजन से भक्ति का संचार

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश को और भावपूर्ण बनाने के लिए पंडित जसराज का प्रसिद्ध भजन साझा किया, जो नवरात्रि की भक्ति को जीवंत करता है। उन्होंने नागरिकों को अपने पसंदीदा भजन पोस्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि सोशल मीडिया पर भक्ति की लहर फैले। यह कदम नवरात्रि को केवल आर्थिक या भौतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण बनाता है। पीएम के पुराने पोस्ट्स में भी चैत्र नवरात्रि पर लता मंगेशकर और पंडित जसराज के भजनों का जिक्र है, जो उनकी सांस्कृतिक संवेदनशीलता दर्शाते हैं। यह पहल युवाओं को पारंपरिक संगीत से जोड़ेगी और त्योहार को डिजिटल युग में प्रासंगिक बनाएगी।

    आत्मनिर्भर भारत का संकल्प, जय माता दी का उद्घोष

    पीएम मोदी का यह संदेश नवरात्रि को बहुआयामी उत्सव बनाता है—जहां जीएसटी बचत आर्थिक सशक्तिकरण लाती है, स्वदेशी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है, और माँ शैलपुत्री की पूजा आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। आइए, इस पावन पर्व पर सामूहिक प्रयास से विकसित भारत का सपना साकार करें। शुभ नवरात्रि! जय माता दी! परिवार के साथ पूजा करें, स्वदेशी खरीदें और भक्ति में डूबें—क्योंकि यह त्योहार नई शुरुआत का प्रतीक है।

  • ऑपरेशन सिंदूर भारतीय वायुसेना की ताक़त और तत्परता का अद्भुत प्रदर्शन

    ऑपरेशन सिंदूर भारतीय वायुसेना की ताक़त और तत्परता का अद्भुत प्रदर्शन

    ऑपरेशन सिंदूर और वायुसेना की तैयारी

    भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया को फिर से अपनी ताक़त और तत्परता का प्रदर्शन किया है। यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि एक संदेश था कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए हमेशा तैयार है। ऑपरेशन के दौरान वायुसेना ने अपने बेड़े, रणनीति और क्षमता का ऐसा प्रदर्शन किया कि सभी को स्पष्ट हो गया कि भारतीय एयरफोर्स त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है।

    भारत के लिए रणनीतिक महत्व

    यह पल भारत के लिए बेहद अहम है। ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी रणनीतिक ताक़त और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया। अब स्पष्ट हो गया है कि भारत केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करना भी जानता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय रक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

    किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा की गारंटी

    ऑपरेशन ने यह भी साबित कर दिया है कि भारतीय वायुसेना किसी भी परिस्थिति में देश की सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं करेगी। चाहे किसी भी समय कोई संकट आए, वायुसेना तत्पर है और इसके पास सभी जरूरी संसाधन और कौशल मौजूद हैं। यह हमारे देशवासियों को आत्मविश्वास देने वाला संदेश भी है कि भारतीय वायुसेना उनकी रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती है।

    वैश्विक मंच पर भारत की ताक़त

    भविष्य में भारत की यही रणनीतिक क्षमता देश को वैश्विक मंच पर और मज़बूत बनाएगी। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक सक्षम और रणनीतिक ताक़त के रूप में उभर रहा है। यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि देश की बढ़ती ताक़त, आत्मविश्वास और सुरक्षा क्षमताओं का प्रतीक है।

  • कश्मीर पर पीएम मोदी: 1947 में होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

    कश्मीर पर पीएम मोदी: 1947 में होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात की एक जनसभा में कश्मीर मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने 1947 के घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत के विभाजन के समय जो निर्णय लिए गए, वे आज भी देश को प्रभावित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उस समय आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती और देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की सलाह को माना गया होता, तो कश्मीर की स्थिति आज बिल्कुल अलग होती।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, उसी रात कश्मीर पर पहला आतंकवादी हमला हुआ। पाकिस्तान ने ‘मुजाहिद्दीन’ के नाम पर आतंकी भेजकर कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि वह हमला न केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष था, बल्कि भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला था। उस समय इन तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    सरदार पटेल की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया

    पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के दृष्टिकोण का ज़िक्र करते हुए कहा कि पटेल की स्पष्ट राय थी कि जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भारत में वापस नहीं लाया जाता, तब तक सेना को पीछे नहीं हटना चाहिए था। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनकी इस राय को दरकिनार कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि कश्मीर आज भी आतंकवाद और अलगाववाद से जूझ रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक भूल केवल राजनीतिक नहीं थी, बल्कि यह सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चूक थी, जिसने भारत को दशकों तक अस्थिरता के हवाले कर दिया। उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि कई सरकारें इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक फायदा उठाने में लगी रहीं और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई।

    अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक कदम

    पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए अनुच्छेद 370 हटाने को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370, वहां की अस्थिरता का एक बड़ा कारण था। इसे हटाकर केंद्र सरकार ने न केवल कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ा, बल्कि वहां विकास और निवेश के नए द्वार भी खोले।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज का भारत पहले जैसा कमजोर नहीं है। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। चाहे ऑपरेशन बालाकोट हो या हाल के सुरक्षा बलों के जवाबी हमले, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।

    युवाओं को दी प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने भाषण के अंत में युवाओं से सरदार पटेल जैसे महान नेताओं से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के कंधों पर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल राजनीति से नहीं, बल्कि देशभक्ति और दूरदर्शिता से ही हम एक सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।