August 27, 2026

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सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाला हमला 71 वर्षीय वकील ने चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश

देश की सर्वोच्च अदालत में आज एक चौंकाने वाली घटना हुई। 71 साल के वकील राकेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि यह हमला असफल रहा और किसी को चोट नहीं लगी, लेकिन यह खबर तुरंत पूरे देश की सुर्खियों में आ गई। इस घटना ने न केवल न्यायपालिका बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी चिंता और हैरानी पैदा कर दी है।

आरोपी वकील की गिरफ्तारी और रिहाई

घटना के तुरंत बाद राकेश कुमार को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने उनका विवरण दर्ज किया और सुरक्षा जांच की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने किसी भी कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया और आरोपी को रिहा कर दिया। इस फैसले ने कई लोगों में सवाल खड़े कर दिए कि आखिर ऐसा क्यों किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सुप्रीम कोर्ट के अंदर नियम और प्रक्रियाएं कितनी संवेदनशील और जटिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया

इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीजेआई बी.आर. गवई से फोन पर बात की और उन्हें इस हमले के विषय में आश्वस्त किया। इसके अलावा, पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए हमले से हर भारतीय में गुस्सा है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है।” यह स्पष्ट संदेश है कि देश के शीर्ष नेतृत्व के लिए न्यायपालिका की सुरक्षा और सम्मान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

देशभर की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर हलचल

देशभर के लोग इस घटना पर गुस्सा जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर #SupremeCourtAttack तेजी से ट्रेंड कर रहा है। हर कोई चीफ जस्टिस की सुरक्षा और न्यायपालिका के सम्मान की बात कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि लोकतंत्र में कानून और सम्मान का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है। कई कानूनी विशेषज्ञ इस घटना की गंभीरता पर चर्चा कर रहे हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के उपायों पर सुझाव दे रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट और लोकतंत्र की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट हमारे लोकतंत्र की रीढ़ है। वहां पर हमले की कोई जगह नहीं है। यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि कानून और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना न केवल अधिकारियों का बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। न्यायपालिका की सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज में इसे सम्मान और जागरूकता के साथ देखा जाना चाहिए।

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