दुनिया में विरोध प्रदर्शन: 3 हजार साल पुरानी मजदूर हड़ताल से आज के आंदोलनों तक, जानें कैसे बदला प्रदर्शन का तरीका
दुनिया में विरोध प्रदर्शन
दुनिया में विरोध प्रदर्शन आज सरकारों और व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाने का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। लोग अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं, मार्च निकालते हैं, धरना देते हैं या काम बंद करते हैं। हालांकि विरोध का यह तरीका नया नहीं है। इतिहास में दर्ज सबसे पुरानी मजदूर हड़ताल का उदाहरण करीब 3,000 साल पुराना माना जाता है। प्राचीन मिस्र के डीर अल-मदीना गांव में करीब 1157 ईसा पूर्व राजा रामेसेस तृतीय के शासनकाल में शाही कब्रों पर काम करने वाले मजदूरों ने राशन मिलने में देरी के बाद काम बंद कर दिया था।
दुनिया में विरोध प्रदर्शन की पहली दर्ज मजदूर हड़ताल
डीर अल-मदीना के मजदूर सामान्य श्रमिक नहीं थे, बल्कि मिस्र के शाही परिवार के लिए कब्रों का निर्माण और सजावट करने वाले कुशल कारीगर थे। जब उन्हें समय पर अनाज और जरूरी राशन नहीं मिला तो उन्होंने काम रोक दिया और अपनी शिकायत अधिकारियों तक पहुंचाई। इसके बाद मजदूरों ने सामूहिक रूप से विरोध किया। यही वजह है कि इस घटना को इतिहास की सबसे पुरानी दर्ज मजदूर हड़ताल माना जाता है। दुनिया में विरोध प्रदर्शन की परंपरा को समझने में यह घटना एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
भारत में SIR को लेकर दुनिया में विरोध प्रदर्शन की कड़ी
आज दुनिया में विरोध प्रदर्शन अलग-अलग मुद्दों को लेकर देखने को मिल रहे हैं। भारत में चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समूहों के प्रदर्शन जारी हैं। 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग की। ये मांगें राजनीतिक दलों के आरोपों पर आधारित हैं और चुनाव आयोग ने SIR को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। मुंबई में भी SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं।
फ्रांस और स्पेन में अलग-अलग मुद्दों पर सड़क पर लोग
दुनिया में विरोध प्रदर्शन का एक और उदाहरण फ्रांस और स्पेन में देखने को मिल रहा है। फ्रांस में हाई स्कूल के छात्र स्कूलों में कम निवेश, खराब इमारतों, ज्यादा भीड़ और शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सितंबर में शुरू हुआ यह आंदोलन कई शहरों तक फैलने की बात सामने आई है। वहीं स्पेन में महंगे घर और बढ़ते किराए के मुद्दे पर 3 अक्टूबर को करीब 50 शहरों में प्रदर्शन हुए। मैड्रिड में बड़ी संख्या में लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने की रिपोर्ट है और प्रदर्शनकारी आवास को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर लॉन्ग मार्च
पाकिस्तान में भी दुनिया में विरोध प्रदर्शन की मौजूदा तस्वीर का एक उदाहरण सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI के समर्थकों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च शुरू किया है। यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा से शुरू हुआ और सरकार तथा PTI के बीच बातचीत विफल होने के बाद आगे बढ़ा। पाकिस्तान सरकार ने राजधानी में सुरक्षा बढ़ाई है और प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश से रोकने की बात कही है। इन घटनाओं से साफ है कि हजारों साल पहले आर्थिक मांगों से शुरू हुई सामूहिक आवाज आज भी अलग-अलग देशों में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर सड़कों पर दिखाई दे रही है।
