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  • केरल बीजेपी उपाध्यक्ष पर यौन उत्पीड़न का आरोप, संपत्ति विवाद की बात

    केरल बीजेपी उपाध्यक्ष पर यौन उत्पीड़न का आरोप, संपत्ति विवाद की बात

    सी कृष्णकुमार पर गंभीर आरोप

    केरल से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) केरल के उपाध्यक्ष सी कृष्णकुमार पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा है। शिकायतकर्ता कोई और नहीं, बल्कि उनकी साली है, जिसने दावा किया है कि कुछ साल पहले कृष्णकुमार ने उसका यौन शोषण किया। इस मामले ने केरल की राजनीति में हलचल मचा दी है। महिला ने बीजेपी के राष्ट्रीय और स्थानीय नेताओं को अपनी शिकायत सौंपी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, कृष्णकुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संपत्ति विवाद का हिस्सा बताया है।

    महिला का दावा और शिकायत

    महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने यह मामला बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, आरएसएस दफ्तर में गोपालंकुट्टी मास्टर, और अन्य नेताओं जैसे वी. मुरलीधरन, एम.टी. रमेश और सुभाष के सामने उठाया था। उसका दावा है कि सभी ने उसे न्याय दिलाने का भरोसा दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला ने यह भी कहा कि वह इन घटनाओं से अपमानित महसूस कर रही है। उसने बीजेपी से कृष्णकुमार को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है। उसका कहना है कि जिन कृष्णकुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों पर प्रदर्शन किया था, उन्हें अब खुद इन आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

    कृष्णकुमार का जवाब: संपत्ति विवाद है असली मुद्दा

    सी कृष्णकुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा करार दिया है। उनका कहना है कि यह मामला संपत्ति के बंटवारे को लेकर है। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता उनकी साली है, जिसने 2010 में दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी की थी। इससे उसके ससुर नाराज हो गए थे। 2014 में, जब उनके ससुर कोयंबटूर के अस्पताल में भर्ती थे, तब शिकायतकर्ता ने प्रॉपर्टी के कागजात चेक किए और पाया कि सारी संपत्ति उनकी पत्नी के नाम है। इससे वह नाराज हो गई और विवाद शुरू हो गया। कृष्णकुमार ने दावा किया कि महिला ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठे आरोप लगाए, जिन्हें कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

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    संदीप वारियर का तंज

    इस बीच, पूर्व बीजेपी नेता और अब केपीसीसी प्रवक्ता संदीप जी वारियर ने बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी अपने कोर कमेटी के सदस्य पर वही कार्रवाई करेगी, जो वह कांग्रेस के खिलाफ मांग रही थी। संदीप और कृष्णकुमार के बीच पहले से तनातनी रही है। बीजेपी से निष्कासित होने के बाद संदीप ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। कृष्णकुमार ने संकेत दिया कि इन आरोपों के पीछे संदीप का हाथ हो सकता है।

    राजनीतिक हलचल और भविष्य

    यह मामला केरल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। बीजेपी के लिए पलक्कड़ में मजबूत चेहरा रहे कृष्णकुमार की छवि को इस विवाद से ठेस पहुंच सकती है। दूसरी ओर, महिला का दावा और पार्टी की चुप्पी बीजेपी की साख पर सवाल उठा रही है। इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखना बाकी है।

  • यूपी की सियासत में टाइमिंग और पूजा पाल का निष्कासन: क्या बदलेगा समीकरण?

    यूपी की सियासत में टाइमिंग और पूजा पाल का निष्कासन: क्या बदलेगा समीकरण?

    टाइमिंग का खेल और समाजवादी पार्टी का फैसला

    राजनीति में टाइमिंग का महत्व सर्वोपरि है। सही समय पर लिया गया निर्णय किसी को शिखर पर पहुंचा सकता है, तो गलत समय पर लिया गया फैसला पूरी कहानी बदल सकता है। हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक फैसले ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी। यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान विधायक पूजा पाल द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था की तारीफ करने पर सपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया। इस फैसले ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मानो संजीवनी बूटी दे दी, जिससे सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।

    पूजा पाल का निष्कासन: क्रॉस वोटिंग या प्रशंसा का नतीजा?

    सपा कार्यकर्ता और नेता सोशल मीडिया पर यह दावा कर रहे हैं कि पूजा पाल के खिलाफ कार्रवाई राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण लंबित थी। हालांकि, निष्कासन की टाइमिंग ऐसी रही कि यह संदेश गया कि माफिया अतीक अहमद के खिलाफ कार्रवाई पर योगी की तारीफ करने के कारण उन्हें पार्टी से निकाला गया। यह टाइमिंग सपा के लिए उल्टा पड़ गया, क्योंकि योगी सरकार पहले से ही माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है। पूजा पाल का मामला बीजेपी की इस रणनीति को और मजबूत करता है।

    अतीक अहमद और उमेश पाल हत्याकांड का सियासी असर

    फरवरी 2023 में प्रयागराज में राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला था। उस समय अखिलेश ने पूजा पाल के समर्थन में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। जवाब में योगी ने कहा था, “माफिया को मिट्टी में मिला देंगे।” इसके बाद अतीक अहमद के गैंग के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चला, जिसमें अतीक और उनके भाई अशरफ की कस्टडी में हत्या हो गई। इस घटना ने योगी सरकार की सख्ती को और उजागर किया।

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    पूजा पाल का बीजेपी की ओर झुकाव

    निष्कासन के बाद पूजा पाल का रुख बीजेपी की ओर बढ़ता दिख रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की और एक्स पर लिखा, “मैं आदरणीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करती हूं। उनके नेतृत्व में गुंडों और माफिया को उनके उचित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है।” पूजा पाल ने यह भी कहा कि वह गड़रिया समाज की बेटी हैं और सपा ने उनके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के दर्द को नहीं समझा।

    बीजेपी की रणनीति: गैर-यादव ओबीसी और लोध वोटरों पर नजर

    यूपी पंचायत चुनाव 2026 को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। बीजेपी गैर-यादव ओबीसी और लोध वोटरों को साधने में जुटी है। हाल ही में योगी ने रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण किया और बदायूं में उनके नाम पर पीएसी बटालियन स्थापित की। लोध समाज, जो यूपी में करीब 5% वोटरों का प्रतिनिधित्व करता है, बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है। पूजा पाल को पीडीए की काट के रूप में पेश करने की रणनीति पर भी विचार चल रहा है।