August 27, 2026

Abstar News

Latest News, Breaking News & Updates

यूपी की सियासत में टाइमिंग और पूजा पाल का निष्कासन: क्या बदलेगा समीकरण?

टाइमिंग का खेल और समाजवादी पार्टी का फैसला

राजनीति में टाइमिंग का महत्व सर्वोपरि है। सही समय पर लिया गया निर्णय किसी को शिखर पर पहुंचा सकता है, तो गलत समय पर लिया गया फैसला पूरी कहानी बदल सकता है। हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक फैसले ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी। यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान विधायक पूजा पाल द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था की तारीफ करने पर सपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया। इस फैसले ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मानो संजीवनी बूटी दे दी, जिससे सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।

पूजा पाल का निष्कासन: क्रॉस वोटिंग या प्रशंसा का नतीजा?

सपा कार्यकर्ता और नेता सोशल मीडिया पर यह दावा कर रहे हैं कि पूजा पाल के खिलाफ कार्रवाई राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण लंबित थी। हालांकि, निष्कासन की टाइमिंग ऐसी रही कि यह संदेश गया कि माफिया अतीक अहमद के खिलाफ कार्रवाई पर योगी की तारीफ करने के कारण उन्हें पार्टी से निकाला गया। यह टाइमिंग सपा के लिए उल्टा पड़ गया, क्योंकि योगी सरकार पहले से ही माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है। पूजा पाल का मामला बीजेपी की इस रणनीति को और मजबूत करता है।

अतीक अहमद और उमेश पाल हत्याकांड का सियासी असर

फरवरी 2023 में प्रयागराज में राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला था। उस समय अखिलेश ने पूजा पाल के समर्थन में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। जवाब में योगी ने कहा था, “माफिया को मिट्टी में मिला देंगे।” इसके बाद अतीक अहमद के गैंग के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चला, जिसमें अतीक और उनके भाई अशरफ की कस्टडी में हत्या हो गई। इस घटना ने योगी सरकार की सख्ती को और उजागर किया।

ह भी पढ़ें : किश्तवाड़ में बादल फटा 51 श्रद्धालुओं की मौत, राहत कार्य जारी, पूरे देश में शोक की लहर

पूजा पाल का बीजेपी की ओर झुकाव

निष्कासन के बाद पूजा पाल का रुख बीजेपी की ओर बढ़ता दिख रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की और एक्स पर लिखा, “मैं आदरणीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करती हूं। उनके नेतृत्व में गुंडों और माफिया को उनके उचित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है।” पूजा पाल ने यह भी कहा कि वह गड़रिया समाज की बेटी हैं और सपा ने उनके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के दर्द को नहीं समझा।

बीजेपी की रणनीति: गैर-यादव ओबीसी और लोध वोटरों पर नजर

यूपी पंचायत चुनाव 2026 को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। बीजेपी गैर-यादव ओबीसी और लोध वोटरों को साधने में जुटी है। हाल ही में योगी ने रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण किया और बदायूं में उनके नाम पर पीएसी बटालियन स्थापित की। लोध समाज, जो यूपी में करीब 5% वोटरों का प्रतिनिधित्व करता है, बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है। पूजा पाल को पीडीए की काट के रूप में पेश करने की रणनीति पर भी विचार चल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.