Tag: congress

  • Congress खेमें में चल रही है बड़ी गड़बड़? Digvijay Singh के इस पोस्ट से मचा हड़कंप

    Congress खेमें में चल रही है बड़ी गड़बड़? Digvijay Singh के इस पोस्ट से मचा हड़कंप

    Congress: देश की सबसे पूरानी पार्टी के खेमें से एक ऐसी खबर सामने आई है। जिसने एक बार फिर भारत की राजनीति में हलचल तेज़ कर दी है। खबर है कि राहुल गाँधी की और कांग्रेस पार्टी के बीच सबकुछ ठीक नही चल रहा है। और इसका मुख्य कारण है राहुल गाँधी द्वारा पार्टी के लोगों द्वारा किए जा रहे शिकायतो को नज़रअंदाज करना। आपको बता दे कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Digvijay Singh ने अपने सशल मीडिया पर कुछ ऐसा पोस्ट किया, जिसके बाद राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। दरअसल दिग्विजय सिंह ने अपने पोस्ट में नरेंद्र मोदी और आरएसएस की तारीफ कर दी है। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। अधिक जानकारी के लिए खबर को अंत तक जरूर पढ़े।

    Congress: दिग्विजय सिंह के इस पोस्ट से मचा तहलका

    दरअसल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। एक हफ्ते पहले ही दिग्विजय सिंह ने पार्टी में सुधारों को लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा था। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर 1990 के दशक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा की है। जिसके बाद सोशल मीडिया समेत पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। और इतना ही नही लोग Digvijay Singh के इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे है।

    जाने क्यो बना पोस्ट चर्चा का विषय

    वहीं इस तस्वीर के साथ Congress नेता दिग्विजय सिंह ने बीजेपी और उसके वैचारिक संगठन RSS की जमकर तारीफ की। यही नहीं, उन्होंने संगठन की मजबूती और अनुशासन को भी सराहा। और अब दिग्विजय सिंह की ये पोस्ट एक नए राजनीतिक सवाल खड़े कर रही है। क्योकि RSS वही संगठन है, जो लंबे समय से कांग्रेस के निशाने पर रहा है। वहीं बात अगर Digvijay Singh के इस पोस्ट की करें तो ये पोस्ट ऐसे वक्त पर आया है, जब कांग्रेस नेतृत्व और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर लगातार सवाल उठ रहे हैं। और अब सवाल ये है कि क्या ये राहुल गांधी के नेतृत्व पर सीधा तंज है? हांलाकि अब तक इस पोस्ट पर राहुल गाँधी की कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई है मगर इस बात से इतना तो तय है कि कांग्रेस खेमें मे सबकुछ ठीक नही है।

  • असम विधानसभा ने बहुविवाह पर लगाई सख्ती: 10 साल जेल और जुर्माना, UCC की ओर पहला कदम

    असम विधानसभा ने बहुविवाह पर लगाई सख्ती: 10 साल जेल और जुर्माना, UCC की ओर पहला कदम

    असम विधानसभा ने 27 नवंबर 2025 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025’ को पारित कर दिया। यह विधेयक बहुविवाह को अपराध घोषित करता है, जिसमें दोषी को अधिकतम 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। अगर कोई अपनी पहली शादी छिपाकर दूसरी करता है, तो सजा 10 साल तक बढ़ सकती है। पीड़ित महिलाओं के लिए 1 लाख रुपये तक का मुआवजा और कानूनी संरक्षण का प्रावधान भी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में पहला कदम है। लेकिन क्या यह विधेयक वाकई सामाजिक न्याय लाएगा या सियासी रंग ले लेगा?

    विधेयक की मुख्य विशेषताएं: सख्त सजाएं और महिलाओं का संरक्षण

    असम बहुविवाह निषेध विधेयक बहुविवाह को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। इसके तहत पहली शादी के दौरान दूसरी शादी करने वाले को 7 साल की कैद और जुर्माना। अगर विवाह के समय मौजूदा शादी छिपाई जाती है, तो सजा 10 साल तक हो सकती है। दोबारा अपराध करने पर सजा दोगुनी। विधेयक में काजी, गांव के मुखिया या अभिभावक जो ऐसी शादी में सहयोग करते हैं, उन्हें 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माना। काजी को 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी। पीड़ित महिलाओं को मुआवजा और कानूनी सहायता मिलेगी। दोषी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य होंगे और स्थानीय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। विधेयक राज्य भर में लागू होगा, लेकिन अनुसूचित जनजाति (ST) सदस्यों और छठी अनुसूची क्षेत्रों को छूट दी गई है, जहां कुछ जनजातीय रीति-रिवाज बहुविवाह की अनुमति देते हैं।

    यह भी पढ़ें : मोगा मेयर बलजीत सिंह चाणी को AAP ने किया निष्कासित: नशा तस्करों से कथित संबंधों पर सख्त कार्रवाई

    विधानसभा में चर्चा: सरमा का दावा, ‘यह इस्लाम विरोधी नहीं’

    विधेयक पेश करने से पहले 25 नवंबर को चर्चा हुई। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “यह विधेयक इस्लाम के खिलाफ नहीं है। असली मुसलमान इसका स्वागत करेंगे। तुर्की, पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में भी बहुविवाह प्रतिबंधित है।” उन्होंने UCC का वादा दोहराया, “अगर 2026 चुनाव में दोबारा सत्ता आती है, तो पहले सत्र में UCC लाएंगे।” विपक्षी दलों – कांग्रेस, AIUDF, CPI(M) – ने वॉकआउट किया। AIUDF के अमिनुल इस्लाम ने कहा, “यह संविधान के कुछ अनुच्छेदों का उल्लंघन है।” सरमा ने स्पष्ट किया कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सभी पर लागू होगा। विधेयक पारित होने के बाद सरमा ने ट्वीट किया, “महिलाओं के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं। यह नारी शक्ति को मजबूत करेगा।”

    UCC की ओर कदम: सामाजिक सुधार या चुनावी रणनीति?

    यह विधेयक UCC लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। UCC में बाल विवाह रोक, बहुविवाह प्रतिबंध, उत्तराधिकार कानून और लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण शामिल हैं। असम के बाद उत्तराखंड UCC लागू हो चुका है। सरमा ने कहा, “बहुविवाह निषेध UCC का पहला चरण है।” लेकिन आलोचक इसे 2026 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में BJP की सियासी रणनीति का आरोप लग रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महिलाओं को सशक्त बनाएगा, लेकिन जनजातीय छूट से असमानता पैदा हो सकती है। असम में बहुविवाह दर पहले से कम है, लेकिन विधेयक से सामाजिक जागरूकता बढ़ेगी।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: स्वागत और विरोध की ध्रुवीकरण

    विधेयक के पारित होने पर BJP समर्थकों ने सराहना की। विपक्ष ने इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ बताया। AIUDF ने कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। लेकिन सरमा ने तर्क दिया कि असम के मुस्लिम समुदाय ने ही बहुविवाह का विरोध किया। राष्ट्रीय स्तर पर इसे UCC बहस को गति देने वाला माना जा रहा। महिलाओं के संगठनों ने स्वागत किया, कहा कि यह लिंग समानता सुनिश्चित करेगा। अब विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा। क्या यह असम में सामाजिक परिवर्तन लाएगा? जनता की नजरें सरकार पर टिकी हैं।

  • ED का रॉबर्ट वाड्रा पर दूसरा चार्जशीट: संजय भंडारी मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया मोड़

    ED का रॉबर्ट वाड्रा पर दूसरा चार्जशीट: संजय भंडारी मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया मोड़

    नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और प्रमुख कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एक और बड़ा एक्शन लिया है। एजेंसी ने ब्रिटेन स्थित हथियार सलाहकार संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वाड्रा को आरोपी बनाते हुए दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दिल्ली की विशेष PMLA अदालत में दाखिल कर दी। यह वाड्रा के खिलाफ ED की कुल तीसरी चार्जशीट है, जो राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा रही है। जुलाई 2025 में हरियाणा के शिकोहपुर भूमि सौदे में अनियमितताओं से जुड़े मामले में पहली चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी।

    मामले की शुरुआत: 2016 के आयकर छापों से

    यह केस 2016 में शुरू हुआ, जब आयकर विभाग ने दिल्ली में संजय भंडारी के परिसरों पर छापा मारा। छापों में ईमेल और दस्तावेज बरामद हुए, जो भंडारी के वाड्रा और उनके सहयोगियों से कथित संबंधों की ओर इशारा करते थे। भंडारी, एक प्रमुख हथियार डीलर, छापों के तुरंत बाद लंदन भाग गया। ED ने फरवरी 2017 में PMLA के तहत मामला दर्ज किया, जो आयकर विभाग की ब्लैक मनी एक्ट चार्जशीट पर आधारित था। एजेंसी ने पहले ही भंडारी मामले में दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है—2020 और 2023 में—लेकिन अब वाड्रा को सीधे आरोपी बनाया गया है।

    लंदन संपत्ति पर फोकस: वाड्रा की कथित भूमिका

    ED की जांच का केंद्र बिंदु लंदन के ब्रायनस्टन स्क्वायर पर एक लग्जरी संपत्ति है, जिसे भंडारी ने 2009 में खरीदा था। एजेंसी का दावा है कि वाड्रा ने इस संपत्ति के इंटीरियर को अपने निर्देशों के अनुसार नवीनीकृत करवाया, जिसमें उनके द्वारा प्रदान किए गए फंड्स का इस्तेमाल हुआ। जुलाई 2025 में वाड्रा का PMLA के तहत बयान दर्ज किया गया, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों से सामना कराया गया, लेकिन उनके जवाब असंतोषजनक पाए गए। ED ने कई भारतीय संपत्तियों को जब्त किया है, जो कथित रूप से वाड्रा या उनके जुड़े संस्थानों से लिंक हैं और अपराध की आय का प्रतिनिधित्व करती हैं। जांच में हरियाणा की भूमि लेन-देन भी शामिल हैं, जहां फंड्स को ऑफशोर इकाइयों के जरिए रूट करने का आरोप है।

    यह भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट में शरजील इमाम की बेल का विरोध, दिल्ली दंगों से जोड़ी भड़काऊ सोच

    भंडारी का प्रत्यर्पण असफल, भारत में भगोड़ा घोषित

    संजय भंडारी (63 वर्ष) का प्रत्यर्पण ब्रिटेन की अदालत ने खारिज कर दिया था। जुलाई 2025 में दिल्ली की अदालत ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी (FEO) घोषित किया। ED का कहना है कि भंडारी ने विदेशी संपत्तियों और अनुचित वित्तीय लेन-देन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की। वाड्रा से ED ने पहले कई बार पूछताछ की है, जिसमें 2019 में उन्हें अग्रिम जमानत भी मिली। वाड्रा ने सभी आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि लंदन में उनकी कोई संपत्ति नहीं है—न सीधे, न अप्रत्यक्ष रूप से। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कोर्ट की अगली सुनवाई

    कांग्रेस ने ED के कदम को ‘राजनीतिक साजिश’ बताया है, जबकि भाजपा ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा कहा। प्रियंका गांधी ने अभी तक सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन पार्टी नेता इसे विपक्ष को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं। विशेष अदालत में चार्जशीट 15 नवंबर 2025 को दाखिल हुई, और अगली सुनवाई 6 दिसंबर 2025 को निर्धारित है। ED की तीन अलग-अलग जांचों में वाड्रा फंसे हैं, जो हरियाणा भूमि डील से जुड़ी हैं। फिलहाल, जांच जारी है और कोर्ट की कार्यवाही पर सबकी नजर टिकी है। क्या यह मामला वाड्रा के कारोबारी साम्राज्य को झकझोर देगा? समय ही बताएगा।

  • कर्नाटक कैबिनेट रिफॉर्म: राहुल-सिद्धारमैया बैठक से सियासी हलचल!

    कर्नाटक कैबिनेट रिफॉर्म: राहुल-सिद्धारमैया बैठक से सियासी हलचल!

    दिल्ली में अचानक बैठक: क्या है छिपा राज?

    कांग्रेस की राजनीति में 15 नवंबर 2025 को एक बड़ा तूफान उठा, जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज सिद्धारमैया ने दिल्ली में लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। यह बैठक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के हार के बाद हुई, जहां कांग्रेस को महज 6 सीटें मिलीं। सिद्धारमैया ने मीडिया को बताया कि चर्चा केवल बिहार परिणाम पर हुई, और उन्होंने राहुल को हौसला दिया। लेकिन सूत्रों का दावा है कि कैबिनेट रिफॉर्म और आंतरिक कलह पर भी बात हुई। यह मुलाकात कर्नाटक की सत्ता संतुलन को लेकर अटकलों का केंद्र बनी हुई है।

    बिहार हार का असर: कर्नाटक पर छाया संकट

    बिहार में NDA की शानदार जीत (202 सीटें) ने कांग्रेस को झकझोर दिया। RJD 25 सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। राहुल गांधी ने इसे ‘अनुचित चुनाव’ बताया। इसी संदर्भ में सिद्धारमैया और तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने राहुल से मुलाकात की, जहां पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। कर्नाटक में यह हार नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को हवा दे रही है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंचे हैं, जो मध्यावधि में सीएम पद की दौड़ में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की हार ने कर्नाटक में स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    कैबिनेट रिफॉर्म की तैयारी: हरी झंडी का इशारा?

    कर्नाटक कैबिनेट में लंबे समय से 5-6 पद खाली पड़े हैं, जिससे कई वरिष्ठ नेताओं में असंतोष है। सिद्धारमैया ने राहुल से कथित तौर पर रिफॉर्म प्रस्ताव पर चर्चा की, जिसमें मंत्रालयों का पुनर्वितरण शामिल है। हालांकि, सीएम ने साफ किया कि ‘कैबिनेट रिफॉर्म पर कोई बात नहीं हुई’। फिर भी, इंडिया टुडे जैसे स्रोतों के अनुसार, यह बैठक लंबित विस्तार की दिशा में कदम है। मल्लिकार्जुन खड़गे का अंतिम फैसला बाकी है। यदि मंजूरी मिली, तो शिवकुमार समर्थकों को फायदा हो सकता है, जो सत्ता संतुलन बनाए रखेगा। यह कदम पार्टी एकता को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।

    यह भी पढ़ें : बिहार चुनाव 2025: RJD वोट शेयर में अव्वल, सीटों में पीछे!

    सिद्धारमैया vs शिवकुमार: सत्ता संघर्ष का अंत?

    कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच तनाव जगजाहिर है। शिवकुमार के समर्थक ‘नवंबर रेवोल्यूशन’ की बात कर रहे हैं, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन संभव। राहुल की यह पहल दोनों धड़ों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश लगती है। पूर्व मंत्री केएन राजन्ना ने इसे ‘बड़ा बदलाव’ बताया। लेकिन बिहार हार के बाद हाईकमान सतर्क है, जो किसी बड़े फेरबदल को टाल सकता है। सोशल मीडिया पर NDTV जैसे हैंडल्स ने इसे ‘बड़ा बज़’ करार दिया, जहां वीडियो में स्पेकुलेशन दिखाए गए। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह बैठक कर्नाटक सरकार की स्थिरता के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकती है।

    भविष्य की रणनीति: क्या होगा अगला कदम?

    यह बैठक कांग्रेस के लिए एक सबक है—आंतरिक एकता ही जीत की कुंजी। यदि रिफॉर्म हुआ, तो कई मंत्रालय बदल सकते हैं, जो 2028 के चुनावों की तैयारी को मजबूत करेगा। सिद्धारमैया सोमवार को पीएम मोदी से मिलने की योजना बना रहे हैं। कर्नाटक की सियासत पर सभी निगाहें टिकी हैं। क्या जल्द ही बड़ा फेरबदल होगा? हम हर अपडेट लाएंगे। यह घटना दिखाती है कि राष्ट्रीय हार राज्य स्तर पर रणनीति बदल सकती है।

  • बिहार चुनाव 2025: NDA की प्रचंड जीत, 202 सीटें हासिल!

    बिहार चुनाव 2025: NDA की प्रचंड जीत, 202 सीटें हासिल!

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA ने 202 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत हासिल कर लिया। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘डबल इंजन सरकार’ की लोकप्रियता का प्रमाण है।

    पार्टियों का प्रदर्शन

    सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा और 89 पर विजय प्राप्त की। जनता दल (यूनाइटेड) – JDU को 85 सीटें मिलीं। विपक्षी दलों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को मात्र 25 सीटें, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को 19, कांग्रेस को 6 और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को 5 सीटें प्राप्त हुईं।

    हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) ने 5, राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने 4, जबकि CPI-ML को 2 सीटें मिलीं। इंडियन इलेक्शन पार्टी (IIP), CPI(M) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को एक-एक सीट पर सफलता मिली। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) अपना खाता भी नहीं खोल सकीं।

    नेताओं की प्रतिक्रियाएं

    जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। चिराग पासवान अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ पहुंचे, जबकि JDU के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी वहां उपस्थित रहे।

    BJP बिहार अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी को अपनी अंतरात्मा में झांकना चाहिए।” उन्होंने हार की वजह विपक्ष की नेतृत्वहीनता बताया। पश्चिम बंगाल BJP नेता दिलीप घोष ने कहा, “बिहार के नतीजों से TMC डरी हुई है, अब बंगाल की बारी है।”

    दिल्ली में BJP मुख्यालय पर जश्न का माहौल रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, “बिहार की जनता ने भारी जीत से गर्दा उड़ा दिया है।” उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे विकास पर विश्वास की जीत बताया।

    यह भी पढ़ें : नई दिल्ली से वृंदावन तक सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में राजा भैया ने लिया भाग

    जीत के प्रमुख कारक

    नीतीश कुमार की लोकप्रियता ने निर्णायक भूमिका निभाई। महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। विशेषकर बुजुर्ग वर्ग, जिनकी पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 रुपये की गई, ने गांव-गांव में NDA का समर्थन किया। यह योजना मतदाताओं में चर्चा का विषय बनी और सीधे वोटों में परिवर्तित हुई।

    कुल मिलाकर, बिहार ने इतिहास रच दिया। NDA ने ‘200 पार’ का लक्ष्य हासिल कर सत्ता में मजबूत वापसी की है। यह जीत विकास, स्थिरता और मोदी-नीतीश की जोड़ी पर जनता के अटूट विश्वास को दर्शाती है।

  • पुणे कोरेगांव भूमि घोटाला: अजीत पवार के बेटे पार्थ पर 1800 करोड़ का सवाल, FIR में नाम क्यों नहीं?

    पुणे कोरेगांव भूमि घोटाला: अजीत पवार के बेटे पार्थ पर 1800 करोड़ का सवाल, FIR में नाम क्यों नहीं?

    घोटाले की जड़: महार वतन भूमि का अवैध सौदा

    महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा भूमि घोटाला सामने आ गया है, जो उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ा हुआ है। पुणे के मुंधवा-कोरेगांव पार्क इलाके में लगभग 40 एकड़ (16.19 हेक्टेयर) कीमती सरकारी जमीन का सौदा विवादों में घिर गया है। यह भूमि मूल रूप से ‘महार वतन भूमि’ है, जो 1958 के बॉम्बे इन्फीरियर विलेज वतन एबोलिशन एक्ट के तहत अनुसूचित जाति (महार समुदाय) के लिए आरक्षित थी। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को बॉटनिकल गार्डन प्रोजेक्ट के लिए आवंटित यह जमीन 2006 में निजी कारोबारी शीतल तिवानी के नाम कैसे दर्ज हुई, यह पहला बड़ा सवाल है। फिर, मई 2025 में यह सौदा पार्थ पवार की कंपनी अमेडिया एंटरप्राइजेज LLP (जिसमें पार्थ की 99% हिस्सेदारी है) को 300 करोड़ रुपये में ट्रांसफर कर दिया गया। बाजार मूल्य 1800 करोड़ रुपये होने के बावजूद स्टांप ड्यूटी मात्र 500 रुपये दिखाई गई, जबकि 5.89 करोड़ रुपये की होनी चाहिए थी। इससे सरकार को सैकड़ों करोड़ का नुकसान हुआ। यह सौदा IT पार्क और डेटा सेंटर के लिए था, लेकिन अब रद्द हो चुका है।

    पार्थ पवार की कंपनी: 1 लाख कैपिटल से 1800 करोड़ की डील?

    पार्थ पवार, जो NCP नेता हैं और अजीत पवार के बेटे, अमेडिया होल्डिंग्स LLP के डायरेक्टर हैं। कंपनी का शेयर कैपिटल मात्र 1 लाख रुपये है, फिर भी यह विशाल सौदा कैसे संभव हुआ? पार्थ के बिजनेस पार्टनर दिग्विजय अमरसिंह पाटिल (1% हिस्सेदारी) के नाम पर दस्तावेज साइन हुए। 12 फरवरी 2024 से 1 जुलाई 2025 के बीच पुणे के तहसीलदार ने अवैध आदेश जारी कर स्वामित्व का दावा करवाया। स्टांप ड्यूटी विभाग ने अमेडिया को 43 करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया है, जिसमें बकाया और जुर्माना शामिल है। पार्थ ने सफाई दी, “मैंने कोई गलत काम नहीं किया।” लेकिन विपक्ष का कहना है कि कंपनी का रजिस्टर्ड एड्रेस पार्थ के पुणे निवास से मेल खाता है, जो संयोग नहीं हो सकता। यह सौदा 27 दिनों में पूरा हुआ, जिसमें उद्योग निदेशालय ने 48 घंटों में स्टांप ड्यूटी माफ की।

    FIR और जांच: तीन नाम, पार्थ का नाम गायब

    पुणे पुलिस ने बावधान थाने में FIR दर्ज की, जिसमें शीतल तिवानी (पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर), दिग्विजय पाटिल और सस्पेंडेड सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू के नाम हैं। आरोप: स्टांप ड्यूटी चोरी, धोखाधड़ी और साजिश। लेकिन पार्थ का नाम क्यों नहीं? अजीत पवार ने कहा, “FIR केवल साइन करने वालों पर होती है। पार्थ ने साइन नहीं किया।” CM देवेंद्र फडणवीस ने EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) को जांच सौंपी और कहा, “कोई बख्शा नहीं जाएगा।” रेवेन्यू विभाग और IGR (इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन) की अंतरिम रिपोर्ट में अनियमितताओं का जिक्र है। उच्चस्तरीय समिति एक महीने में रिपोर्ट देगी। दूसरी FIR बोपोदी की 13 एकड़ कृषि विभाग की जमीन पर भी दिग्विजय के खिलाफ है। विपक्ष ने इसे ‘कवर-अप’ बताया।

    यह भी पढ़ें : बिहार चुनाव 2025: राजनाथ का ‘कट्टा-लालटेन’ पर वार, प्रशांत का मोदी पर तंज; VVPAT विवाद से हंगामा

    अजीत पवार का बचाव: ‘सौदा रद्द, कोई पैसा नहीं बदला’

    उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने दावा किया, “सौदा रद्द हो चुका है, एक पैसा भी नहीं बदला। पार्थ और दिग्विजय को जमीन सरकारी होने की जानकारी नहीं थी।” उन्होंने CM फडणवीस से बात कर निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा, “मैं नियम तोड़ने वालों को बख्शूंगा नहीं, चाहे परिवार ही क्यों न हो।” अजीत ने इसे ‘परिवार का मामला’ बताते हुए खुद को अलग रखा। लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाया, “पिता उपमुख्यमंत्री हैं, बेटा निर्दोष कैसे?” पार्थ के पिछले विवादों का जिक्र भी हो रहा है, जैसे 2020 में पुणे गैंगस्टर गजानन मार्ने से मिलना और सुशांत सिंह राजपूत केस में CBI पूछताछ। अजीत ने तब भी सफाई दी थी।

    विपक्ष का हल्ला: इस्तीफे की मांग, महायुति पर सवाल

    कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अजीत पवार का इस्तीफा मांगा और पार्थ पर क्रिमिनल केस की मांग की। शिवसेना (UBT) के अम्बादास दानवे ने कहा, “1 लाख कैपिटल वाली कंपनी 1800 करोड़ की जमीन कैसे खरीदेगी?” NCP (शरद पवार गुट) ने इसे ‘भूमि चोरी’ बताया और दलित आरक्षण का उल्लंघन कहा। विपक्ष का आरोप: महायुति सरकार (BJP-NCP-शिवसेना) पार्थ को बचा रही है। फडणवीस के बचाव पर सवाल उठे। यह घोटाला पुणे नगर निगम चुनावों से पहले आया, जहां NCP-BJP की प्रतिस्पर्धा तेज है। विपक्ष इसे वोट बैंक के लिए इस्तेमाल कर सकता है।

  • बिहार चुनाव 2025: राजनाथ का ‘कट्टा-लालटेन’ पर वार, प्रशांत का मोदी पर तंज; VVPAT विवाद से हंगामा

    बिहार चुनाव 2025: राजनाथ का ‘कट्टा-लालटेन’ पर वार, प्रशांत का मोदी पर तंज; VVPAT विवाद से हंगामा

    राजनाथ सिंह का जोरदार हमला: ‘कट्टा-लालटेन का दौर खत्म, बिहार बनेगा मिसाइल हब’

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की रैलियों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। गया और औरंगाबाद की रैलियों में उन्होंने कहा, “कट्टा और लालटेन का दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। अब बिहार मिसाइलें और तोपें बनाएगा।” सिंह ने जोर देकर कहा कि एनडीए सरकार बिहार को रक्षा और उद्योग का नया केंद्र बनाएगी। उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस पर जाति-धर्म के नाम पर विभाजन और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। “सार्थक राजनीति सच्चाई बोलकर होती है, झूठ फैलाकर नहीं। राहुल गांधी अगर वोट चोरी का दावा कर रहे हैं, तो चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएं,” सिंह ने चुटकी ली। उन्होंने बिहार को ‘विकसित राज्य’ बनाने का वादा दोहराया, जो एनडीए की प्राथमिकता है। यह बयान विपक्ष के ‘जंगलराज’ आरोपों का जवाब था, जहां सिंह ने कहा कि एनडीए ने बिहार की छवि सुधारी है।

    प्रशांत किशोर का पलटवार: ‘जंगलराज का डर पुराना, जनसुराज नया विकल्प’

    जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। एक रैली में उन्होंने कहा, “बीजेपी और नीतीश कुमार दशकों से जंगलराज का डर दिखाकर वोट लेते आए हैं, लेकिन अब जनता नया विकल्प चाहती है – जनसुराज।” किशोर ने दावा किया कि एनडीए के पास ‘कहने को कुछ नया नहीं बचा’। उन्होंने पहली फेज की 65% वोटिंग को ‘परिवर्तन की लहर’ बताया, जहां प्रवासी मजदूर ‘बदलाव’ के लिए लौटे। “मोदी जी सही कहते थे जब विकल्प नहीं था, लेकिन अब जनसुराज है,” किशोर ने कहा। उन्होंने गुजरात को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए बिहार में फैक्टरियां लाने की मांग की। किशोर ने एनडीए की महिलाओं को 10,000 रुपये की योजना पर तंज कसा, “युवा अपना भविष्य 10,000 के लिए बर्बाद नहीं करेंगे।” जन सुराज ने 200 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जो त्रिकोणीय मुकाबले को तीव्र बना रहा है।

    समस्तीपुर VVPAT विवाद: मॉक पोल की स्लिप्स, अधिकारी निलंबित; विपक्ष सतर्क

    समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से चुनावी हंगामा मच गया। एक कॉलेज के पास सड़क पर VVPAT स्लिप्स बिखरी मिलीं, जिसका वीडियो वायरल होने पर आरजेडी ने ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई की और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर को निलंबित कर दिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया, “ये मॉक पोल की स्लिप्स हैं, जो EVM टेस्टिंग के दौरान बनीं। असली वोटिंग प्रक्रिया सुरक्षित है।” डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि स्लिप्स डिस्पैच सेंटर के पास मिलीं और उम्मीदवारों को सूचित किया गया। एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हो गई। विपक्षी नेता मनोज झा ने स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। यह घटना पहली फेज की 64.66% रिकॉर्ड वोटिंग के बाद आई, जहां आयोग ने पारदर्शिता का दावा किया।

    ओवैसी का विपक्ष पर तंज: ‘हम बीजेपी की बी-टीम नहीं, खुद आईने में देखें’

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्ष के ‘बीजेपी की बी-टीम’ आरोप पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हम बीजेपी की बी-टीम नहीं हैं। विपक्ष को खुद अपने भीतर झांकने की जरूरत है। अगर वे बार-बार हार रहे हैं, तो जिम्मेदारी खुद लें।” ओवैसी ने तेजस्वी यादव के ‘एक्सट्रीमिस्ट’ बयान पर चुटकी ली, “बाबू, एक्सट्रीमिस्ट को अंग्रेजी में लिखकर बताओ।” सीमांचल में रैलियों के दौरान उन्होंने कहा कि AIMIM धर्मनिरपेक्ष वोटों का विभाजन नहीं, बल्कि तीसरा विकल्प है। पार्टी ने 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, खासकर सीमांचल के 24 क्षेत्रों में। ओवैसी ने महागठबंधन को गठबंधन न मानने का आरोप लगाया, “हमने लालू और तेजस्वी को पत्र लिखे, लेकिन जवाब नहीं मिला।” AIMIM ने आजाद समाज पार्टी और अपनी जनता पार्टी से गठबंधन किया है।

    यह भी पढ़ें : केरल CM पिनराई विजयन का साउदर्न रेलवे पर RSS गीत विवाद: वंदे भारत उद्घाटन में सांप्रदायिक रंग?

    अमित शाह का दावा: ‘एनडीए को 160+ सीटें, घुसपैठ मुक्त बिहार बनाएंगे’

    गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्णिया, कटिहार और सुपौल की रैलियों में एनडीए की जीत का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “एनडीए को इस बार 160 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।” शाह ने सीमांचल में अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया, “राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सीमांचल को घुसपैठियों का अड्डा बनाना चाहते हैं। हम हर अवैध प्रवासी को चिह्नित करेंगे, वोटर लिस्ट से नाम हटाएंगे और देश से बाहर करेंगे।” उन्होंने वादा किया कि अगले पांच साल में घुसपैठ, अतिक्रमण और अवैध कारोबार खत्म हो जाएगा। शाह ने विपक्ष को ‘ठगबंधन’ कहा और कहा कि पहली फेज में ही महागठबंधन साफ हो गया। एनडीए की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार ‘विकसित राज्य’ बनेगा। कांग्रेस ने शाह के दावे को ‘फर्जी चाणक्य’ बताकर खारिज किया।

  • केरल CM पिनराई विजयन का साउदर्न रेलवे पर RSS गीत विवाद: वंदे भारत उद्घाटन में सांप्रदायिक रंग?

    केरल CM पिनराई विजयन का साउदर्न रेलवे पर RSS गीत विवाद: वंदे भारत उद्घाटन में सांप्रदायिक रंग?

    विवाद की शुरुआत: वंदे भारत उद्घाटन में RSS गण गीत

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने साउदर्न रेलवे पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा मचा दिया है। मामला बेंगलुरु-एर्नाकुलम वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसे 8 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फ्लैग ऑफ किया। एर्नाकुलम साउथ रेलवे स्टेशन पर आयोजित स्थानीय समारोह के दौरान स्कूली छात्रों से कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गण गीत गवाया गया। एक वायरल वीडियो में सरस्वती विद्याालय के छात्र ट्रेन के अंदर यह गीत गाते नजर आ रहे हैं। साउदर्न रेलवे ने पहले इसे सोशल मीडिया पर “देशभक्ति गीत” बताकर शेयर किया, लेकिन विवाद बढ़ने पर पोस्ट हटा ली। रेलवे ने बाद में स्पष्ट किया कि यह स्कूल का अपना मलयालम गीत था, जो एकता और विविधता का प्रतीक है। फिर भी, विपक्ष ने इसे सांप्रदायिक रंग चढ़ाने का प्रयास बताया।

    CM विजयन का तीखा प्रहार: संविधान का उल्लंघन

    मुख्यमंत्री विजयन ने इसे “संविधान के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन” करार दिया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “साउदर्न रेलवे द्वारा वंदे भारत उद्घाटन के दौरान छात्रों से RSS गण गीत गवाना बेहद निंदनीय है। RSS का गीत, जो अन्य धर्मों के खिलाफ नफरत और सांप्रदायिक विभाजनकारी राजनीति फैलाता है, सरकारी कार्यक्रम में शामिल करना अस्वीकार्य है।” विजयन ने आगे आरोप लगाया कि राष्ट्रीय संस्थान जैसे रेलवे को “संघ परिवार के प्रचार का मंच” बनाया जा रहा है, जो सरकारी आयोजनों की धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल करता है। उन्होंने इसे “स्वतंत्रता आंदोलन का अपमान” बताते हुए कहा कि रेलवे, जो कभी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवाद का प्रतीक था, अब सांप्रदायिक विचारधारा को बढ़ावा दे रहा है। विजयन ने जनता से इसकी निंदा करने और विरोध करने की अपील की। यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने RSS पर निशाना साधा हो। पिछले महीने उन्होंने RSS की तुलना इजरायल के जायनिस्ट समूहों से की थी, कहते हुए कि दोनों की सोच कई मामलों में समान है।

    यह भी पढ़ें : संसद शीतकालीन सत्र: 1-19 दिसंबर, 15 बैठकें; विपक्ष बोला- छोटा सत्र, सरकार भाग रही?

    विपक्ष का साथ: जॉन ब्रिट्टास का वीडियो और कांग्रेस का हमला

    राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्टास ने भी विवाद को हवा दी। उन्होंने एक्स पर वीडियो शेयर कर कहा, “RSS गणगीत को एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत उद्घाटन का अभिन्न हिस्सा बनाना भारतीय रेलवे के लिए नई गहराई है। नई सेवाओं की घोषणा अब राजनीतिक शोशेबाजी से रंगी नजर आ रही है, जबकि जनप्रतिनिधियों को दरकिनार किया जा रहा है।” कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने भी रेलवे की आलोचना की। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशियन ने इसे “अवैध और अलोकतांत्रिक” बताते हुए कहा कि भाजपा केरल में विभाजन की राजनीति थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय आयोजनों को भी “भगवा रंग” में रंगने की साजिश हो रही है। इस विवाद ने केरल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है, जहां धर्मनिरपेक्षता हमेशा संवेदनशील मुद्दा रहा है।

    रेलवे और स्कूल का बचाव: ‘स्कूल गीत, कोई RSS कनेक्शन नहीं’

    विवाद के बाद साउदर्न रेलवे ने सफाई दी। उन्होंने वीडियो को दोबारा पोस्ट कर कैप्शन दिया, “सरस्वती विद्याालय के छात्रों ने एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत के उद्घाटन रन के दौरान अपना स्कूल गीत सुंदरता से प्रस्तुत किया।” स्कूल प्रिंसिपल डिंटो ने कहा कि गीत मलयालम में है और यह “एकता में विविधता” का उत्सव है, न कि RSS से जुड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीवी क्रू के अनुरोध पर छात्रों ने गाया, रेलवे ने ऐसा करने को नहीं कहा। भाजपा ने भी सीएम विजयन पर पलटवार किया। राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा, “आप क्या निंदा कर रहे हैं? बच्चे अपना पसंदीदा गीत गा रहे थे, यह उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।” स्कूल ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि गीत राष्ट्रवाद के खिलाफ नहीं है।

    वंदे भारत का महत्व: केरल-कर्नाटक कनेक्टिविटी में नया अध्याय

    विवाद के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का महत्व कम नहीं। यह केरल का तीसरा वंदे भारत ट्रेन है, जो एर्नाकुलम को बेंगलुरु से जोड़ेगा। 608 किमी की दूरी 9 घंटे में तय करेगा, जिसमें 11 स्टॉप होंगे। सुबह 8:45 बजे एर्नाकुलम से रवाना होकर शाम 5:50 बजे बेंगलुरु पहुंचेगा। यह यात्रियों के लिए तेज और आरामदायक सफर सुनिश्चित करेगा, खासकर व्यावसायिक राजधानी एर्नाकुलम और कॉस्मोपॉलिटन बेंगलुरु के बीच। पीएम मोदी ने इसे “न्यू इंडिया ऑन फास्ट ट्रैक” बताते हुए चार नई वंदे भारत ट्रेनों का उद्घाटन किया। विवाद ने आयोजन की छाया डाल दी, लेकिन ट्रेन की सेवाएं निर्बाध चलेंगी।

  • संसद शीतकालीन सत्र: 1-19 दिसंबर, 15 बैठकें; विपक्ष बोला- छोटा सत्र, सरकार भाग रही?

    संसद शीतकालीन सत्र: 1-19 दिसंबर, 15 बैठकें; विपक्ष बोला- छोटा सत्र, सरकार भाग रही?

    सत्र की तारीखें घोषित: 15 बैठकें निर्धारित

    केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र की तारीखों का ऐलान कर दिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें होंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर सत्र की अवधि बढ़ाई या घटाई जा सकती है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब विपक्ष लगातार सत्र बुलाने की मांग कर रहा था। रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “हम एक रचनात्मक और सार्थक सत्र की उम्मीद करते हैं, जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेगा और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेगा।” यह सत्र दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – में एक साथ चलेगा।

    विपक्ष का हमला: ‘विलंबित और छोटा सत्र’

    विपक्ष ने सत्र की तारीखों पर तीखा प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे “असामान्य रूप से विलंबित और छोटा” बताया। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या सरकार किसी बहस से भाग रही है?” रमेश के अनुसार, परंपरागत रूप से शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है और दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक चलता है। इस बार मात्र 15 बैठकें रखकर सरकार संसदीय चर्चा को सीमित करना चाहती है। कांग्रेस का आरोप है कि महंगाई, बेरोजगारी, विदेश नीति और चुनावी अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर बहस टालने की कोशिश हो रही है। अन्य विपक्षी दलों जैसे TMC, SP और DMK ने भी सत्र की छोटी अवधि पर असंतोष जताया है।

    सरकार का पलटवार: ‘बाधा न डालें, बहस करें’

    किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को संसद की कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए। संसद को चलने दें और बहस में भाग लें।” सरकार का दावा है कि 15 बैठकें पर्याप्त हैं और सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो सकेगी। पिछले सत्रों में विपक्षी हंगामे के कारण कई विधेयक बिना बहस पारित हुए, जिसे सरकार कम समय का कारण बता रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में वित्तीय विधेयक, महिला आरक्षण संशोधन और डिजिटल इंडिया से जुड़े बिल पेश हो सकते हैं।

    Read also: पाकिस्तान में बड़ा सैन्य बदलाव तीनों सेनाओं पर संयुक्त कमांड और आसिम मुनीर की नई भूमिका की चर्चा

    संभावित मुद्दे: महंगाई से मतदाता सूची तक हंगामा

    इस सत्र में विपक्ष सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी में है। महंगाई और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे रहेंगे। विदेश नीति, खासकर चीन सीमा विवाद और मणिपुर हिंसा पर सवाल उठाए जाएंगे। ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर भारी हंगामा है। विपक्ष दावा कर रहा है कि SIR के जरिए मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। Adani मामले और समान नागरिक संहिता पर भी बहस की मांग हो सकती है। यदि विपक्ष एकजुट रहा तो सदन में गतिरोध लंबा खिंच सकता है।

  • बिहार चुनाव 2025: PM मोदी का ‘जंगल राज’ पर जोरदार हमला – RJD पर सीधी चोट!

    बिहार चुनाव 2025: PM मोदी का ‘जंगल राज’ पर जोरदार हमला – RJD पर सीधी चोट!

    मोदी का मंच पर धमाका

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल चरम पर है, और 5 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA के पक्ष में प्रचार रैली को संबोधित किया। फेज 1 (25 अक्टूबर) और फेज 2 (3 नवंबर) की वोटिंग के ठीक बीच में यह रैली एक राजनीतिक भूचाल साबित हुई। मोदी ने मंच से गरजते हुए कहा, “अगर RJD वापस सत्ता में आई, तो बिहार फिर अंधेरे में डूब जाएगा!” उनका निशाना सीधा लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी पर था। भीड़ में ‘मोदी-मोदी’ के नारे गूंजे, जो बिहार की जनता के मूड को दर्शाते हैं। यह रैली NDA के ‘विकास राज’ कैंपेन का हिस्सा थी, जहां PM ने 243 सीटों पर मजबूत पकड़ बनाने का संदेश दिया।

    ‘जंगल राज’ की यादें: अपराध का काला अध्याय

    मोदी ने 1990-2005 के RJD शासन को ‘जंगल राज’ करार देते हुए कहा, “बिहार की जनता ने बहुत झेला है—अपहरण, रंगदारी, हत्या का सिलसिला। वो दौर था जब लोग शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे।” उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे अपराधी सत्ता की छत्रछाया में फलते-फूलते थे। आंकड़ों का हवाला देते हुए PM ने बताया कि NDA सरकार में अपराध दर 70% घटी है, और बिहार अब ‘सुरक्षित राज्य’ बन गया। RJD पर तंज कसते हुए बोले, “पुराने दिन लौटाने की कोशिश मत करो, जनता ने सबक सीख लिया है।” यह हमला महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) के ‘पुनरागमन’ दावे को चुनौती देता है, जहां तेजस्वी यादव युवाओं को लुभा रहे हैं।

    विकास vs डर: चुनाव का असली एजेंडा

    PM मोदी ने स्पष्ट किया, “यह चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि भविष्य और भय के बीच की जंग है। बिहार विकास चाहता है, न कि अपराध की छाया।” उन्होंने NDA के ‘नया बिहार’ विजन को रेखांकित किया—एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, और 10 लाख नौकरियां। युवाओं से अपील की, “नौजवानों, वोट सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान के लिए दो!” रैली में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं ने तालियों और नारों से समर्थन जताया। दूसरी ओर, RJD का ट्रैक रिकॉर्ड—चारा घोटाला से लेकर हाल के अपराध मामलों तक—विपक्ष के लिए कमजोरी है। मोदी का यह संदेश बिहार के 7 करोड़ वोटर्स को ‘डर vs उम्मीद’ के द्वंद्व में झोंक रहा है।

    यह भी पढ़ें : प्रशांत किशोर की 241 करोड़ की कमाई: राजनीतिक सलाहकार का ‘ट्रांसपेरेंट’ बिजनेस या सवालों की बौछार?

    जनता का मूड: ‘मोदी-मोदी’ से वोटिंग मशीन तक?

    रैली की भीड़ से उठी ‘मोदी-मोदी’ की गूंज ने NDA को उत्साहित किया, लेकिन सवाल है—क्या यह उत्साह 16 नवंबर से शुरू फेज 3-7 की वोटिंग में दिखेगा? ओपिनियन पोल्स में NDA को 150+ सीटों का अनुमान है, जबकि महागठबंधन 80-90 पर सिमट सकता है। RJD ने जवाब में कहा, “जंगल राज की बातें पुरानी हैं, अब विकास की बारी है।” लेकिन लालू-तेजस्वी की छवि अभी भी अपराध से जुड़ी है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में विकास की लहर है, जबकि शहरी युवा रोजगार पर फोकस कर रहे हैं। PM का आत्मविश्वास साफ था— “जनता ने काफी झेला है, अब स्थिरता चाहिए।”