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  • बिहार चुनाव 2025: पप्पू यादव ने दिए संन्यास के संकेत, रोहिणी आचार्य को सलाह!

    बिहार चुनाव 2025: पप्पू यादव ने दिए संन्यास के संकेत, रोहिणी आचार्य को सलाह!

    रोहिणी आचार्य के बयान पर पप्पू यादव की प्रतिक्रिया

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है, जहां NDA ने 202 सीटें जीतकर नीतीश कुमार को फिर सीएम बनाने की राह प्रशस्त की। RJD को महज 25 सीटें मिलीं, जिसके एक दिन बाद लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति से संन्यास और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान किया। इसी बीच, पूर्णिया लोकसभा से कांग्रेस सांसद पप्पू यादव ने 15 नवंबर 2025 को मीडिया से बातचीत में रोहिणी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए खुद राजनीति से दूरी बनाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा, “अपनों से रिश्ता कभी टूटता नहीं है। राजनीति में जरूरत उन लोगों की है जो सही मायने में काम कर सकें।” पप्पू ने स्पष्ट किया कि वे अगले चार साल (अपनी सांसदीय जिम्मेदारी) तक दायित्व निभाएंगे, उसके बाद फैसला लेंगे। जहां पप्पू को रोहिणी को सलाह देते हुए संन्यास की ओर इशारा करते दिखाया गया।

    59 साल की सेवा का आकलन: पप्पू की भावुक अपील

    पप्पू यादव, जो जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के संस्थापक रह चुके हैं और अब कांग्रेस में हैं, ने अपनी राजनीतिक यात्रा पर गहरा चिंतन किया। उन्होंने कहा, “मैंने अब तक 59 अनसुलझे साल बिहार की सेवा में बिताए, अब समय है अपने कदमों का आंकलन करने का।” यह बयान चुनावी हार के बाद आया, जहां सीमांचल क्षेत्र में उनकी पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा। पप्पू ने रोहिणी को “अच्छी बेटी, मां और देश की महिला” बताते हुए उनका फैसला वापस लेने की सलाह दी। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं हमेशा उनके साथ खड़ा रहूंगा।”रिपोर्ट में पप्पू ने महागठबंधन की हार पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली, AIMIM के असर और युवाओं की विकास की आकांक्षा का जिक्र किया। यह पल बिहार की सियासत में परिवारिक और व्यक्तिगत संकट को उजागर करता है।

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    NDA की जीत पर बधाई: BJP की रणनीति की तारीफ

    पप्पू यादव ने उदारता दिखाते हुए नीतीश कुमार को NDA की जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा, “BJP ने चुनाव में रणनीति अच्छी तरह अपनाई और छोटी-छोटी सीटों पर जीत हासिल की।” हालांकि, उन्होंने BJP पर पैसे की ताकत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। अपनी पार्टी की कमियों को स्वीकार करते हुए पप्पू ने कहा, “हमने एयरपोर्ट, कनेक्टिविटी जैसे काम किए, लेकिन बेहतर परिणाम नहीं आए।” उनकी राजनीति जाति-धर्म से ऊपर है, यह दोहराते हुए उन्होंने कांग्रेस की बिहार में संगठन की कमी मानी। पप्पू को हार के बाद आत्मचिंतन करते दिखाया गया, जहां उन्होंने ‘जंगल राज’ के आरोपों का खंडन किया। BJP नेता दिलीप जायसवाल ने RJD की आंतरिक कलह पर तंज कसा, लेकिन पप्पू का बयान विपक्ष की एकजुटता का संकेत देता है।

    बिहार सियासत पर असर: क्या बदलाव की घंटी?

    पप्पू यादव का यह बयान बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। रोहिणी का संन्यास RJD में उत्तराधिकार संकट पैदा कर चुका है, जहां तेजस्वी यादव पर दबाव बढ़ गया। पप्पू का संकेत कांग्रेस को बिहार में मजबूत करने का प्रयास लगता है, लेकिन उनकी दूरी से सीमांचल में विपक्ष कमजोर पड़ सकता है। विश्लेषक कहते हैं कि यह हार से सबक लेने का समय है—रणनीति सुधार, गठबंधन मजबूत और जनमुखी मुद्दों पर फोकस। BJP ने इसे ‘अपनीमैन’ राजनीति का सबूत बताया। क्या पप्पू वाकई संन्यास लेंगे या यह रणनीतिक बयान है?

  • भोपाल में कांग्रेस का हल्लाबोल: नेशनल हेराल्ड केस में चार्जशीट पर ईडी के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन

    भोपाल में कांग्रेस का हल्लाबोल: नेशनल हेराल्ड केस में चार्जशीट पर ईडी के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन

    भोपाल, 16 अप्रैल – मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इस दिन राजनीतिक तूफान का गवाह बना, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ दायर चार्जशीट के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किया। नेशनल हेराल्ड और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़े इस मनी लॉन्ड्रिंग केस को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” की कार्रवाई बताया।

    जीतू पटवारी का प्रतीकात्मक विरोध: “पिंजरे में बंद तोता”

    इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने की। उन्होंने एक पिंजरे में बंद तोता लेकर ED कार्यालय तक मार्च किया, जिसे उन्होंने “ईडी की राजनीतिक गुलामी” का प्रतीक बताया। पटवारी ने कहा,
    “यह तोता उस ईडी का प्रतीक है जो केंद्र सरकार के इशारे पर विपक्ष को डराने के लिए काम कर रही है। यह लोकतंत्र की हत्या है।”

    उनका यह विरोध प्रदर्शन न केवल प्रतीकात्मक था, बल्कि कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी, जिसमें जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर जनता के बीच संदेश देना था।

    प्रदर्शन में सैकड़ों कार्यकर्ताओं की भागीदारी

    प्रदर्शन सुबह से ही तेज़ हो गया था। सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता भोपाल स्थित ED कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए। “ED की गुंडागर्दी बंद करो”, “मोदी सरकार हाय-हाय” जैसे नारे लगाए गए। विरोध इतना प्रभावशाली था कि पुलिस को कार्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर बैरिकेडिंग करनी पड़ी।

    जब कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की तो हल्की झड़प और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए हालात को नियंत्रण में रखा।

    तपती धूप में सड़क पर लेटे कार्यकर्ता

    गर्मी और धूप की परवाह किए बिना, कई कार्यकर्ता सड़क पर लेटकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताते नजर आए। यह प्रदर्शन न केवल राजनीतिक विरोध था, बल्कि यह संदेश भी था कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपने नेताओं के साथ खड़े हैं और लोकतंत्र के नाम पर किसी भी “राजनीतिक बदले” को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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    ईडी की चार्जशीट: क्या है मामला?

    इस पूरे विरोध प्रदर्शन की जड़ है ED द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट, जो दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में 9 अप्रैल को दाखिल की गई थी। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे समेत कई नेताओं को आरोपी बनाया गया है।

    चार्जशीट PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत दाखिल की गई, जिसमें दावा किया गया कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL), जिसमें सोनिया और राहुल दोनों के पास 38% शेयर हैं, ने AJL की करोड़ों की संपत्ति को मात्र 50 लाख रुपये में अधिग्रहित किया।

    ED का आरोप है कि इस सौदे के जरिए 661 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अवैध रूप से अपने कब्जे में लिया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश बताते हुए एजेंसी ने इन संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    कांग्रेस का जवाब: “न लाभ हुआ, न लॉन्ड्रिंग”

    कांग्रेस पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य केवल नेशनल हेराल्ड अखबार को फिर से जीवित करना था, न कि कोई व्यक्तिगत संपत्ति बनाना।

    कांग्रेस का दावा है कि न तो इसमें किसी तरह का निजी लाभ हुआ, और न ही कोई मनी लॉन्ड्रिंग। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है, और इसका इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है।

    केंद्र पर सीधा आरोप: “जांच एजेंसियों का दुरुपयोग”

    प्रदर्शन के दौरान PCC अध्यक्ष जीतू पटवारी और अन्य नेताओं ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनका कहना था कि बीजेपी सरकार ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि विपक्षी नेताओं को झूठे मामलों में फंसा कर बदनाम किया जा सके।

    पटवारी ने कहा,
    “यह कार्रवाई लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश है। जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, ईडी सक्रिय हो जाती है और विपक्ष को निशाना बनाती है।”

    भोपाल में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नेशनल हेराल्ड केस अब केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बता रही है, तो बीजेपी इसे गांधी परिवार की भ्रष्टाचार गाथा कह रही है।

    फिलहाल, देश की जनता इस लड़ाई को देख रही है और फैसला अब कोर्ट में नहीं, बल्कि जनता की अदालत में भी होगा।