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  • इंडिया ब्लॉक की एकता: उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले खरगे का रात्रिभोज आयोजन

    इंडिया ब्लॉक की एकता: उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले खरगे का रात्रिभोज आयोजन

    विपक्ष की एकजुटता के लिए रात्रिभोज

    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे 8 सितंबर 2025 को संसद भवन में इंडिया ब्लॉक के सांसदों के लिए एक रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। यह आयोजन उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक एक दिन पहले हो रहा है, जिसका उद्देश्य विपक्षी दलों की एकता को मजबूत करना और उनके साझा उम्मीदवार, जस्टिस (सेवानिवृत्त) बी सुदर्शन रेड्डी के लिए समर्थन जुटाना है। यह रात्रिभोज न केवल रणनीतिक चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करेगा, बल्कि विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को भी प्रदर्शित करेगा।

    बी सुदर्शन रेड्डी को मिला व्यापक समर्थन

    इंडिया ब्लॉक ने उपराष्ट्रपति पद के लिए जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार चुना है। रेड्डी, जो एक सम्मानित न्यायविद और हैदराबाद के निवासी हैं, को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का भी समर्थन प्राप्त है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने मुझसे बात की और अनुरोध किया कि हम जस्टिस सुदर्शन रेड्डी का समर्थन करें। एआईएमआईएम जस्टिस रेड्डी को पूर्ण समर्थन देगी।” यह समर्थन विपक्षी गठबंधन की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

    उपराष्ट्रपति चुनाव: रेड्डी बनाम राधाकृष्णन

    9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के बीच कड़ा मुकाबला होगा। यह पद 21 जुलाई 2025 को पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुआ था। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सांसदों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। यह प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के प्रावधानों के तहत संचालित होती है।

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    चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधान

    उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 66(1) में उल्लेखित है। इस प्रक्रिया में मतदान गुप्त मतपत्र के जरिए किया जाता है, जिसे चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 के तहत अधिसूचित किया जाता है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि चुना गया उम्मीदवार व्यापक समर्थन प्राप्त करे।

    विपक्ष की रणनीति और भविष्य की दिशा

    खरगे का रात्रिभोज आयोजन केवल एक सामाजिक समारोह नहीं है, बल्कि यह विपक्षी दलों के बीच समन्वय और सहयोग को बढ़ाने का एक प्रयास है। इंडिया ब्लॉक इस चुनाव को एक अवसर के रूप में देख रहा है, ताकि वह अपनी एकता और ताकत का प्रदर्शन कर सके। जस्टिस रेड्डी जैसे सम्मानित उम्मीदवार के चयन से विपक्ष ने न केवल अपनी गंभीरता दिखाई है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि वह संवैधानिक मूल्यों और निष्पक्षता के प्रति प्रतिबद्ध है।

  • RSS के शताब्दी समारोह की तैयारियां शुरू, अमित शाह ने स्वयंसेवक के रूप में जताया गर्व

    RSS के शताब्दी समारोह की तैयारियां शुरू, अमित शाह ने स्वयंसेवक के रूप में जताया गर्व

    नागपुर में शताब्दी समारोह की तैयारियां

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन की तैयारियों में जुट गया है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मुख्यालय में विजयादशमी के अवसर पर होने वाले इस विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। दलित समुदाय से आने वाले कोविंद को चीफ गेस्ट बनाकर आरएसएस ने समावेशिता और सामाजिक एकता का एक बड़ा संदेश दिया है। यह आयोजन न केवल आरएसएस के 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को दर्शाएगा, बल्कि संगठन के मूल्यों और भारत के विकास में इसके योगदान को भी रेखांकित करेगा।

    बीजेपी और आरएसएस का मजबूत गठजोड़

    इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उपराष्ट्रपति पद के लिए आरएसएस से जुड़े सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह कदम बीजेपी और आरएसएस के बीच गहरे रिश्ते को और मजबूत करता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में केरल के कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में खुद को आरएसएस का स्वयंसेवक बताते हुए गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं बीजेपी से आता हूं और आरएसएस का स्वयंसेवक हूं। जब तक भारत महान नहीं बन जाता, तब तक हमें आराम करने का अधिकार नहीं है।” शाह ने अपने संबोधन में भारत को विश्व में सम्मानित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का सपना दोहराया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के अनुरूप है।

    केरल की एलडीएफ सरकार पर अमित शाह का निशाना

    मनोरमा न्यूज के कॉन्क्लेव में अमित शाह ने केरल की वामपंथी एलडीएफ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने कैडर के लिए फंड खर्च कर रही है, जबकि केरल की जनता ऐसी सरकार चाहती है जो उनके लिए काम करे। शाह ने कहा कि केरल में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण विकास अवरुद्ध हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी विधानसभा चुनावों में केरल की जनता बदलाव और विकास के लिए मतदान करेगी। गौरतलब है कि केरल में अगले साल चुनाव होने हैं, और बीजेपी ने राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए राजीव चंद्रशेखर को जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बीजेपी के करीब होने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।

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    भारत के विकास में आरएसएस की भूमिका

    अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जब कभी भारत के विकास का इतिहास लिखा जाएगा, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्षों के कार्यकाल का विशेष उल्लेख होगा। उन्होंने आरएसएस के स्वयंसेवकों और देशवासियों से अपील की कि वे भारत को विश्व में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें। आरएसएस का शताब्दी समारोह न केवल संगठन की उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है। इस आयोजन के जरिए आरएसएस समाज के हर वर्ग को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को और सशक्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

    आगे की राह

    केरल के बाद अमित शाह तमिलनाडु का दौरा करने वाले हैं, जहां बीजेपी दक्षिण भारत में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है। आरएसएस के शताब्दी समारोह और बीजेपी की रणनीति से यह स्पष्ट है कि दोनों संगठन मिलकर भारत को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह आयोजन और नेताओं के बयान देश में एक नए उत्साह और एकजुटता का संदेश दे रहे हैं।

  • उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: बीजेपी का दक्षिणी दांव, फडणवीस की रणनीति ने बदली तस्वीर

    उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: बीजेपी का दक्षिणी दांव, फडणवीस की रणनीति ने बदली तस्वीर

    भारत में आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव की तस्वीर अब पूरी तरह से साफ हो चुकी है। एक तरफ एनडीए (NDA) ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) ने बी सुदर्शन रेड्डी पर दांव लगाया है। हालांकि, आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के उम्मीदवार राधाकृष्णन की जीत की संभावना काफी प्रबल मानी जा रही है।

    लेकिन इस चुनावी मुकाबले से भी ज़्यादा चर्चा बीजेपी की रणनीति और उसमें देवेंद्र फडणवीस की भूमिका की हो रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने जिस तरह सीपी राधाकृष्णन के नाम का सुझाव दिया, वह अब भारतीय राजनीति में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    देवेंद्र फडणवीस का सुझाव बना मास्टरस्ट्रोक

    सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की तलाश के दौरान फडणवीस ने ही सबसे पहले सीपी राधाकृष्णन का नाम सुझाया था। यह प्रस्ताव बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह — के सामने रखा गया।

    फडणवीस ने यह दलील दी कि राधाकृष्णन न केवल संघ के पुराने स्वयंसेवक हैं, बल्कि दक्षिण भारत से भी आते हैं। इससे न केवल संघ की सहमति आसानी से मिल जाएगी, बल्कि बीजेपी के मिशन साउथ को भी मज़बूती मिलेगी।

    इसके साथ ही राधाकृष्णन वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भी हैं, इसलिए राज्य की राजनीति में भी विरोध करना कठिन होगा। विपक्षी पार्टियों, विशेषकर महाराष्ट्र और तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टियों के लिए यह एक मुश्किल स्थिति बन गई है।

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    मिशन साउथ और रणनीतिक दबाव

    यदि सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति पद पर चुने जाते हैं, तो वे वेंकैया नायडू के बाद दक्षिण भारत से आने वाले बीजेपी के दूसरे उपराष्ट्रपति होंगे। इससे यह संकेत भी जाएगा कि बीजेपी दक्षिण भारत को अधिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है।

    बीजेपी ने इस कदम के ज़रिए DMK और अन्य दक्षिणी पार्टियों को भी धर्मसंकट में डाल दिया है। अगर वे विरोध करती हैं तो यह दक्षिण के खिलाफ कदम दिख सकता है, और समर्थन देती हैं तो विपक्ष में दरार आ सकती है।

    इसी दबाव को संतुलित करने के लिए इंडिया अलायंस ने बी सुदर्शन रेड्डी, एक गैर-राजनीतिक और दक्षिण भारत से आने वाले व्यक्ति को अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन अब भी रणनीतिक तौर पर एनडीए की बढ़त मानी जा रही है।

    फडणवीस का बढ़ता कद

    लोकसभा चुनाव में हार के बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में फडणवीस की रणनीति ने बीजेपी को बड़ी राहत दी। अब उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चयन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका ने राष्ट्रीय स्तर पर उनका कद बढ़ा दिया है।

    आरएसएस से अच्छे संबंध, मोदी-शाह की निकटता, और राजनीतिक समझदारी ने उन्हें पार्टी के भीतर एक स्ट्रैटजिक मास्टरमाइंड के तौर पर स्थापित कर दिया है।

  • उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

    उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

    देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद यानी उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस की अगुवाई वाले इस गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गी सुदर्शन रेड्डी को अपना साझा उम्मीदवार चुना है। इस फैसले के पीछे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

    एनडीए की ओर से तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन के नाम की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की ओर से तमिल बनाम तमिल मुकाबले से बचने के लिए रणनीतिक फैसला लिया गया है।

    गैर-राजनीतिक चेहरे पर सहमति

    सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की बैठकों में कई नामों पर चर्चा हुई थी।

    • एनसीपी ने महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी का नाम प्रस्तावित किया था।
    • डीएमके ने अपने वरिष्ठ नेता तिरुचि शिवा को मैदान में उतारने की कोशिश की।
    • वहीं एक नाम पूर्व इसरो वैज्ञानिक एम. अन्नादुरई का भी चर्चा में रहा।

    लेकिन आखिरकार ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने जोर दिया कि विपक्ष को एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष छवि वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए। उनका यह भी तर्क था कि यदि विपक्ष तमिलनाडु से ही किसी नेता को मैदान में उतारता है, तो मुकाबला तमिल बनाम तमिल बन जाएगा, जिससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

    ममता बनर्जी की निर्णायक भूमिका

    TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने गठबंधन की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए राजनीति से दूर व्यक्ति को ही चुना जाना चाहिए।
    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को NDA के जाल में नहीं फंसना चाहिए, जिसमें वे क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर सियासी लाभ उठाना चाहते हैं।

    TMC की इस दलील को कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों ने भी अंततः स्वीकार कर लिया और गी सुदर्शन रेड्डी के नाम पर सर्वसम्मति बन गई।

    गी सुदर्शन रेड्डी कौन हैं?

    गी सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और वे न्यायपालिका में अपनी निष्पक्षता, निष्कलंक छवि और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। वे राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिष्ठा बहुत मजबूत रही है। विपक्ष को उम्मीद है कि एक साफ-सुथरी छवि वाला उम्मीदवार NDA के खिलाफ एक मजबूत नैतिक चुनौती पेश करेगा।

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    टीएमसी की बदली भूमिका

    2022 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में TMC ने वोटिंग से दूरी बनाई थी और उस वक्त कांग्रेस उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को बड़ा झटका लगा था। TMC ने तब आरोप लगाया था कि उम्मीदवार तय करते समय उनसे सलाह नहीं ली गई थी।

    लेकिन इस बार TMC पूर्ण सक्रियता के साथ गठबंधन की बैठकों में शामिल रही और न केवल उम्मीदवार के चयन में बल्कि चुनावी रणनीति तय करने में भी मुख्य भूमिका निभाई।