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  • बिहार: नीतीश कुमार ने 10वीं बार ली सीएम पद की शपथ, पीएम मोदी ने दी बधाई

    बिहार: नीतीश कुमार ने 10वीं बार ली सीएम पद की शपथ, पीएम मोदी ने दी बधाई

    पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 20 नवंबर 2025 को एक बार फिर इतिहास रचा गया। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ रिकॉर्ड 10वीं बार ली। यह समारोह न केवल राजनीतिक उत्सव था, बल्कि एनडीए की प्रचंड जीत का प्रतीक भी। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि नई सरकार बिहार को विकसित राज्य बनाने के संकल्प को नई गति देगी।

    भव्य समारोह में दिग्गजों की उपस्थिति

    गांधी मैदान में लाखों की भीड़ उमड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (नोट: उपयोगकर्ता ने सी.पी. राधाकृष्णन का उल्लेख किया, लेकिन वर्तमान संदर्भ में धनखड़ सही), गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के नेता मौजूद रहे। राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने शपथ दिलाई। समारोह की भव्यता ऐसी थी कि ‘जीविका दीदियां’ और एनडीए कार्यकर्ताओं ने गमछा लहराकर स्वागत किया। पीएम मोदी ने भीड़ का अभिवादन किया और गमछा लहराकर बिहारी संस्कृति से जुड़ाव दिखाया।

    उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट का विस्तार

    नीतीश कुमार के साथ भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कुल 27 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की, जिनमें भाजपा से विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल; जेडीयू से लेशी सिंह, मदन साहनी, नितिन नवीन, राम कृपाल यादव, संतोष कुमार सुमन, सुनील कुमार शामिल हैं। एलजेपी(आरवी), हम और आरएलएम के प्रतिनिधि भी कैबिनेट में हैं। एक मुस्लिम और तीन महिलाओं को जगह मिली, जो समावेशी प्रतिनिधित्व को दर्शाता है। विभागों का बंटवारा जल्द होगा, जिसमें गृह मंत्रालय पर चर्चा तेज है।

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    नेताओं के संदेश: एकता और विकास पर जोर

    शपथ के बाद देशभर से बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आदरणीय नीतीश कुमार जी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई। नई सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी उतरे और बिहार के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।” विपक्ष के इस सकारात्मक रुख ने राजनीतिक सौहार्द का संदेश दिया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “श्री नीतीश कुमार जी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत-बहुत बधाई। वे एक कुशल और अनुभवी प्रशासक हैं। राज्य में सुशासन का उनका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। नए कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी हार्दिक शुभकामनाएं!” पीएम ने सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को भी बधाई दी, कहा कि इनके जमीनी अनुभव से बिहार मजबूत होगा। उन्होंने नई कैबिनेट को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह टीम बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

    उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि नया नेतृत्व विकास और सुशासन का नया दौर लाएगा। पूर्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि नीतीश सरकार राज्य की प्रगति को तेज करेगी। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट कर पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए के हर वर्ग के उत्थान का जिक्र किया।

    बिहार की राजनीति में नया अध्याय

    नीतीश कुमार का यह 10वां कार्यकाल बिहार के लिए मील का पत्थर है। 2000 से अब तक 19 वर्षों का उनका शासन ‘सुशासन बाबू’ की छवि को मजबूत करता है। चुनौतियां कम नहीं—बेरोजगारी, बाढ़ और प्रवासन। लेकिन एनडीए का वादा है: 1.5 करोड़ लोगों को 2 लाख रुपये की सहायता, शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार। विपक्ष की निगाहें गठबंधन की स्थिरता पर हैं, जबकि जनता विकास की उम्मीदें लेकर इंतजार कर रही है। क्या यह कार्यकाल बिहार को ‘विकसित भारत’ का मजबूत स्तंभ बनाएगा? आने वाले महीने बताएंगे। फिलहाल, पटना से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

  • बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण का प्रचार थमा, 11 नवंबर को मतदान की बारी!

    बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण का प्रचार थमा, 11 नवंबर को मतदान की बारी!

    प्रचार अभियान का जोरदार समापन

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण का प्रचार रविवार शाम 6 बजे थम गया। अब पूरे राज्य की निगाहें 11 नवंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर वोटिंग होगी, जहां 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें पुरुषों के अलावा महिलाएं और एक थर्ड जेंडर उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो चुनावी विविधता को दर्शाता है। पहले चरण के बाद सभी दलों ने आखिरी दौर में पूरी ताकत लगाई, रैलियां, रोड शो और सोशल मीडिया अभियान चलाए। एनडीए और महागठबंधन दोनों ने जनता से विकास, रोजगार और सुरक्षा के वादों पर वोट मांगे।

    एनडीए की आक्रामक रणनीति

    भाजपा, जेडीयू और सहयोगी दलों ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई रैलियां कीं। मोदी ने बिहार को ‘डबल इंजन’ सरकार का लाभ बताते हुए बुनियादी ढांचे, सड़कें और रोजगार योजनाओं पर जोर दिया। शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी घुसपैठियों की चिंता ज्यादा करते हैं, जबकि बिहार के युवाओं की अनदेखी। चिराग पासवान ने प्रचार को शांतिपूर्ण बताते हुए एनडीए की एकजुटता पर भरोसा जताया। जेडीयू ने नीतीश की ‘सुशासन’ छवि को हाइलाइट किया, जबकि भाजपा ने हिंदुत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे उठाए।

    महागठबंधन का जनता से सीधा संवाद

    दूसरी ओर, महागठबंधन ने तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व में जोरदार कैंपेन चलाया। तेजस्वी ने एक्स पर पोस्ट कर एनडीए पर भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के आरोप लगाए, युवाओं से 10 लाख नौकरियों का वादा दोहराया। राहुल गांधी ने पूर्णिया रैली में मोदी, शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त पर ‘वोट चोरी’ की साजिश का गंभीर आरोप लगाया, कहा कि लोकतंत्र खतरे में है। प्रियंका गांधी ने महिलाओं से अपील की, जबकि अन्य नेता गांव-गांव घूमे। गठबंधन ने आरक्षण, किसान कल्याण और महंगाई जैसे मुद्दों पर फोकस किया, एनडीए को ‘झूठी सरकार’ बताया।

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    मुद्दे जो बनाएंगे नई सरकार

    चुनाव में मुख्य मुद्दे विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य रहे। बिहार की जनता बाढ़ नियंत्रण, प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और महिलाओं की सुरक्षा पर फैसला करेगी। एनडीए ‘विकास और स्थिरता’ का दावा कर रही, तो महागठबंधन ‘परिवर्तन और न्याय’ की बात। थर्ड जेंडर उम्मीदवार की मौजूदगी सामाजिक समावेश को रेखांकित करती है। प्रचार शांतिपूर्ण रहा, कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई, जो लोकतंत्र की मजबूती दिखाता है।

    मतदान की तैयारियां और उम्मीदें

    11 नवंबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी। ईवीएम और वीवीपैट का इस्तेमाल होगा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। मतदाता आईडी, आधार या अन्य दस्तावेज लेकर आएं। पहले चरण में अच्छा turnout रहा, उम्मीद है दूसरे में भी। नतीजे 13 नवंबर को आएंगे, जो बिहार की नई दिशा तय करेंगे। जनता किसे चुनेगी—स्थिरता या बदलाव? अब वोटरों की बारी है, जो लोकतंत्र की असली ताकत हैं। बिहार का भविष्य मतपेटी में कैद है!

  • बिहार चुनाव 2025: राजनाथ का ‘कट्टा-लालटेन’ पर वार, प्रशांत का मोदी पर तंज; VVPAT विवाद से हंगामा

    बिहार चुनाव 2025: राजनाथ का ‘कट्टा-लालटेन’ पर वार, प्रशांत का मोदी पर तंज; VVPAT विवाद से हंगामा

    राजनाथ सिंह का जोरदार हमला: ‘कट्टा-लालटेन का दौर खत्म, बिहार बनेगा मिसाइल हब’

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की रैलियों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। गया और औरंगाबाद की रैलियों में उन्होंने कहा, “कट्टा और लालटेन का दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। अब बिहार मिसाइलें और तोपें बनाएगा।” सिंह ने जोर देकर कहा कि एनडीए सरकार बिहार को रक्षा और उद्योग का नया केंद्र बनाएगी। उन्होंने आरजेडी और कांग्रेस पर जाति-धर्म के नाम पर विभाजन और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। “सार्थक राजनीति सच्चाई बोलकर होती है, झूठ फैलाकर नहीं। राहुल गांधी अगर वोट चोरी का दावा कर रहे हैं, तो चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएं,” सिंह ने चुटकी ली। उन्होंने बिहार को ‘विकसित राज्य’ बनाने का वादा दोहराया, जो एनडीए की प्राथमिकता है। यह बयान विपक्ष के ‘जंगलराज’ आरोपों का जवाब था, जहां सिंह ने कहा कि एनडीए ने बिहार की छवि सुधारी है।

    प्रशांत किशोर का पलटवार: ‘जंगलराज का डर पुराना, जनसुराज नया विकल्प’

    जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। एक रैली में उन्होंने कहा, “बीजेपी और नीतीश कुमार दशकों से जंगलराज का डर दिखाकर वोट लेते आए हैं, लेकिन अब जनता नया विकल्प चाहती है – जनसुराज।” किशोर ने दावा किया कि एनडीए के पास ‘कहने को कुछ नया नहीं बचा’। उन्होंने पहली फेज की 65% वोटिंग को ‘परिवर्तन की लहर’ बताया, जहां प्रवासी मजदूर ‘बदलाव’ के लिए लौटे। “मोदी जी सही कहते थे जब विकल्प नहीं था, लेकिन अब जनसुराज है,” किशोर ने कहा। उन्होंने गुजरात को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए बिहार में फैक्टरियां लाने की मांग की। किशोर ने एनडीए की महिलाओं को 10,000 रुपये की योजना पर तंज कसा, “युवा अपना भविष्य 10,000 के लिए बर्बाद नहीं करेंगे।” जन सुराज ने 200 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जो त्रिकोणीय मुकाबले को तीव्र बना रहा है।

    समस्तीपुर VVPAT विवाद: मॉक पोल की स्लिप्स, अधिकारी निलंबित; विपक्ष सतर्क

    समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से चुनावी हंगामा मच गया। एक कॉलेज के पास सड़क पर VVPAT स्लिप्स बिखरी मिलीं, जिसका वीडियो वायरल होने पर आरजेडी ने ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई की और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर को निलंबित कर दिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया, “ये मॉक पोल की स्लिप्स हैं, जो EVM टेस्टिंग के दौरान बनीं। असली वोटिंग प्रक्रिया सुरक्षित है।” डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि स्लिप्स डिस्पैच सेंटर के पास मिलीं और उम्मीदवारों को सूचित किया गया। एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हो गई। विपक्षी नेता मनोज झा ने स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। यह घटना पहली फेज की 64.66% रिकॉर्ड वोटिंग के बाद आई, जहां आयोग ने पारदर्शिता का दावा किया।

    ओवैसी का विपक्ष पर तंज: ‘हम बीजेपी की बी-टीम नहीं, खुद आईने में देखें’

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्ष के ‘बीजेपी की बी-टीम’ आरोप पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, “हम बीजेपी की बी-टीम नहीं हैं। विपक्ष को खुद अपने भीतर झांकने की जरूरत है। अगर वे बार-बार हार रहे हैं, तो जिम्मेदारी खुद लें।” ओवैसी ने तेजस्वी यादव के ‘एक्सट्रीमिस्ट’ बयान पर चुटकी ली, “बाबू, एक्सट्रीमिस्ट को अंग्रेजी में लिखकर बताओ।” सीमांचल में रैलियों के दौरान उन्होंने कहा कि AIMIM धर्मनिरपेक्ष वोटों का विभाजन नहीं, बल्कि तीसरा विकल्प है। पार्टी ने 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, खासकर सीमांचल के 24 क्षेत्रों में। ओवैसी ने महागठबंधन को गठबंधन न मानने का आरोप लगाया, “हमने लालू और तेजस्वी को पत्र लिखे, लेकिन जवाब नहीं मिला।” AIMIM ने आजाद समाज पार्टी और अपनी जनता पार्टी से गठबंधन किया है।

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    अमित शाह का दावा: ‘एनडीए को 160+ सीटें, घुसपैठ मुक्त बिहार बनाएंगे’

    गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्णिया, कटिहार और सुपौल की रैलियों में एनडीए की जीत का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “एनडीए को इस बार 160 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।” शाह ने सीमांचल में अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया, “राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सीमांचल को घुसपैठियों का अड्डा बनाना चाहते हैं। हम हर अवैध प्रवासी को चिह्नित करेंगे, वोटर लिस्ट से नाम हटाएंगे और देश से बाहर करेंगे।” उन्होंने वादा किया कि अगले पांच साल में घुसपैठ, अतिक्रमण और अवैध कारोबार खत्म हो जाएगा। शाह ने विपक्ष को ‘ठगबंधन’ कहा और कहा कि पहली फेज में ही महागठबंधन साफ हो गया। एनडीए की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार ‘विकसित राज्य’ बनेगा। कांग्रेस ने शाह के दावे को ‘फर्जी चाणक्य’ बताकर खारिज किया।

  • बिहार चुनाव 2025: चिराग पासवान की वायरल वोटिंग तस्वीर – नई पीढ़ी की राजनीति में एंट्री!

    बिहार चुनाव 2025: चिराग पासवान की वायरल वोटिंग तस्वीर – नई पीढ़ी की राजनीति में एंट्री!

    चिराग पासवान की वायरल तस्वीर

    6 नवंबर 2025 को बिहार में चुनाव का माहौल चरम पर है, और इसी दिन लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने वोट डालकर एक नई बहस छेड़ दी। अपनी इंक लगी उंगली की तस्वीर शेयर करते हुए चिराग ने कहा, “मैंने वोट दिया है… अब बारी आपकी है!” यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, लाखों लाइक्स और शेयर के साथ। फेज 3 की वोटिंग शुरू होने से ठीक पहले यह संदेश बिहार के युवा वोटर्स को सीधा संबोधित करता है। चिराग की यह मूव न केवल NDA के प्रति वफादारी दिखाती है, बल्कि बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा का प्रतीक भी है।

    चिराग का संदेश: युवा तय करेंगे बिहार का भविष्य

    तस्वीर के साथ चिराग ने लिखा, “बिहार का भविष्य युवा तय करेगा, डर नहीं, विकास की राजनीति होगी!” यह बयान 2020 के बिहार चुनाव की याद दिलाता है, जब चिराग ने ‘बिहारी पहले’ का नारा देकर नीतीश कुमार सरकार को चुनौती दी थी। तब उन्होंने कहा था, “मोदी से वैचारिक मतभेद नहीं, लेकिन राज्य के हित के लिए अलग रास्ता चुनूंगा।” आज LJP (रामविलास) के झंडे तले वे मैदान में हैं, पिता रामविलास पासवान की विरासत को संभाले हुए। चिराग को ‘पोस्टर बॉय’ कहा जाता है—कभी NDA का सहयोगी, कभी अकेले योद्धा। इस बार वे 40 सीटों पर NDA के साथ लड़ रहे हैं, और CM पद का सपना भी छिपा नहीं।

    बिहार राजनीति का नया चेहरा: पोस्टर बॉय से रियल प्लेयर

    चिराग पासवान बिहार की राजनीति के नए दौर के प्रतीक हैं। जन्म 1984 में, वे बॉलीवुड से राजनीति में आए, लेकिन रामविलास की मौत के बाद LJP को संभाला। 2020 में उन्होंने BJP को नीतीश से अलग करने की कोशिश की, जो आंशिक सफल रही। अब जन सुराज और RJD जैसे प्रतिद्वंद्वियों के बीच चिराग NDA का चेहरा बने हैं। उनकी तस्वीर ने युवाओं को मैसेज दिया—वोटिंग सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि बदलाव का हथियार है। X पर #ChiragVotes ट्रेंड कर रहा, जहां यूजर्स उनकी युवा अपील की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन सवाल है: क्या यह वायरलिटी वोट्स में बदल पाएगी?

    ‘बिहारी पहले’ का नारा: कामयाबी या चुनौती?

    चिराग का ‘बिहारी पहले’ नारा पासवान वोट बैंक (5% से ज्यादा) को लुभाने का प्रयास है। LJP (रामविलास) ने हाजीपुर से चिराग को टिकट दिया, जहां रामविलास 8 बार सांसद रहे। NDA में शामिल होने से उन्हें 23 विधानसभा सीटें मिलीं, लेकिन पशुपति कुशवाहा के साथ विवाद ने सवाल खड़े किए। विपक्ष कहता है, “चिराग सिर्फ BJP का मोहरा हैं।” वहीं चिराग का जवाब: “मैं बिहार के हित के लिए लड़ रहा हूं।” ओपिनियन पोल्स में LJP को 10-15 सीटें मिलने का अनुमान है, जो पासवान परिवार को फिर सत्ता के करीब ले जा सकता है।

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    पीढ़ियों की जंग: पुराने vs नए खिलाड़ी

    बिहार चुनाव अब पार्टियों का नहीं, पीढ़ियों का मुकाबला बन गया है। एक तरफ लालू-नीतीश जैसे दिग्गज, दूसरी तरफ चिराग-तेजस्वी जैसे युवा। चिराग की तस्वीर दिखाती है कि राजनीति में नई सोच आ रही है—डिजिटल कैंपेन, युवा मुद्दे और विकास फोकस। लेकिन क्या जनता पुरानी विरासत को भूलकर नए चेहरों को मौका देगी? ग्रामीण बिहार में जातिगत समीकरण अभी हावी हैं, जबकि शहरी युवा चिराग की अपील से प्रभावित हैं।

  • बिहार चुनाव 2025: PM मोदी का ‘जंगल राज’ पर जोरदार हमला – RJD पर सीधी चोट!

    बिहार चुनाव 2025: PM मोदी का ‘जंगल राज’ पर जोरदार हमला – RJD पर सीधी चोट!

    मोदी का मंच पर धमाका

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल चरम पर है, और 5 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA के पक्ष में प्रचार रैली को संबोधित किया। फेज 1 (25 अक्टूबर) और फेज 2 (3 नवंबर) की वोटिंग के ठीक बीच में यह रैली एक राजनीतिक भूचाल साबित हुई। मोदी ने मंच से गरजते हुए कहा, “अगर RJD वापस सत्ता में आई, तो बिहार फिर अंधेरे में डूब जाएगा!” उनका निशाना सीधा लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी पर था। भीड़ में ‘मोदी-मोदी’ के नारे गूंजे, जो बिहार की जनता के मूड को दर्शाते हैं। यह रैली NDA के ‘विकास राज’ कैंपेन का हिस्सा थी, जहां PM ने 243 सीटों पर मजबूत पकड़ बनाने का संदेश दिया।

    ‘जंगल राज’ की यादें: अपराध का काला अध्याय

    मोदी ने 1990-2005 के RJD शासन को ‘जंगल राज’ करार देते हुए कहा, “बिहार की जनता ने बहुत झेला है—अपहरण, रंगदारी, हत्या का सिलसिला। वो दौर था जब लोग शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे।” उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे अपराधी सत्ता की छत्रछाया में फलते-फूलते थे। आंकड़ों का हवाला देते हुए PM ने बताया कि NDA सरकार में अपराध दर 70% घटी है, और बिहार अब ‘सुरक्षित राज्य’ बन गया। RJD पर तंज कसते हुए बोले, “पुराने दिन लौटाने की कोशिश मत करो, जनता ने सबक सीख लिया है।” यह हमला महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) के ‘पुनरागमन’ दावे को चुनौती देता है, जहां तेजस्वी यादव युवाओं को लुभा रहे हैं।

    विकास vs डर: चुनाव का असली एजेंडा

    PM मोदी ने स्पष्ट किया, “यह चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि भविष्य और भय के बीच की जंग है। बिहार विकास चाहता है, न कि अपराध की छाया।” उन्होंने NDA के ‘नया बिहार’ विजन को रेखांकित किया—एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, और 10 लाख नौकरियां। युवाओं से अपील की, “नौजवानों, वोट सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान के लिए दो!” रैली में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं ने तालियों और नारों से समर्थन जताया। दूसरी ओर, RJD का ट्रैक रिकॉर्ड—चारा घोटाला से लेकर हाल के अपराध मामलों तक—विपक्ष के लिए कमजोरी है। मोदी का यह संदेश बिहार के 7 करोड़ वोटर्स को ‘डर vs उम्मीद’ के द्वंद्व में झोंक रहा है।

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    जनता का मूड: ‘मोदी-मोदी’ से वोटिंग मशीन तक?

    रैली की भीड़ से उठी ‘मोदी-मोदी’ की गूंज ने NDA को उत्साहित किया, लेकिन सवाल है—क्या यह उत्साह 16 नवंबर से शुरू फेज 3-7 की वोटिंग में दिखेगा? ओपिनियन पोल्स में NDA को 150+ सीटों का अनुमान है, जबकि महागठबंधन 80-90 पर सिमट सकता है। RJD ने जवाब में कहा, “जंगल राज की बातें पुरानी हैं, अब विकास की बारी है।” लेकिन लालू-तेजस्वी की छवि अभी भी अपराध से जुड़ी है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में विकास की लहर है, जबकि शहरी युवा रोजगार पर फोकस कर रहे हैं। PM का आत्मविश्वास साफ था— “जनता ने काफी झेला है, अब स्थिरता चाहिए।”

  • योगी की केवटी रैली: ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ पर तंज, घुसपैठियों की संपत्ति गरीबों को!

    योगी की केवटी रैली: ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ पर तंज, घुसपैठियों की संपत्ति गरीबों को!

    ‘इंडिया गठबंधन के तीन नए बंदर’: योगी का तीखा कटाक्ष

    बिहार विधानसभा चुनाव के गरमाते माहौल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवटी विधानसभा में जोरदार रैली को संबोधित किया। उन्होंने इंडिया गठबंधन पर व्यंग्यबाण चलाते हुए कहा:

    “गांधी जी के तीन बंदर तो आपने सुने, लेकिन अब इंडिया गठबंधन के तीन और बंदर आ गए — पप्पू, टप्पू और अप्पू। पप्पू सच बोल नहीं सकता, टप्पू सही देख नहीं सकता!”

    योगी ने विपक्ष को परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की जननी बताया।

    ‘जंगलराज’ की वापसी नहीं: दंगे-नरसंहार याद दिलाए

    मुख्यमंत्री ने बिहार के अतीत को याद दिलाते हुए कहा:

    “पहले दंगे, नरसंहार और डर का माहौल था। ऐसी व्यवस्था को कभी वापस न आने दें।”

    उन्होंने एनडीए की नीति को स्पष्ट बताया:

    “देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं। घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे, उनकी संपत्ति जब्त कर गरीबों में बांटेंगे।”

    कश्मीर मॉडल पर सख्ती: आतंकवाद-घुसपैठ दोनों खत्म

    योगी ने धारा 370 हटाने का उदाहरण दिया:

    “जैसे कश्मीर से आतंकवाद खत्म किया, वैसे ही घुसपैठियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।”

    उन्होंने विपक्ष पर राम-विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा:

    “भाजपा-एनडीए रामभक्तों का गठबंधन है, जो विकास, राष्ट्रवाद और संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।”

    बिहार की जनता जागरूक: सुशासन के लिए एनडीए

    योगी ने जनता से अपील की:

    “तुष्टिकरण और निजी स्वार्थ की राजनीति करने वालों को वोट न दें। बिहार के मतदाता जागरूक हैं — वे विकसित, सुरक्षित और संस्कारित बिहार के लिए एनडीए को चुनेंगे।”

    उन्होंने विश्वास जताया कि सुशासन और विकास की राजनीति को बिहार की जनता का अपार समर्थन मिलेगा।

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    आगे का दौरा: सोमवार को 4 जिलों में रैलियां

    योगी ने बताया कि सोमवार को वे दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सारण और पटना में जनसभाएं करेंगे। केवटी की रैली ने एनडीए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी।

    बिहार चुनाव में राष्ट्रवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दे हावी हो रहे हैं। योगी की रैली ने साफ संदेश दिया — ‘जंगलराज’ की वापसी नहीं, एनडीए की विजय निश्चित!

  • बिहार विधानसभा चुनाव 2025: NDA का सीट शेयरिंग फॉर्मूला और राजनीतिक समीकरण

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025: NDA का सीट शेयरिंग फॉर्मूला और राजनीतिक समीकरण

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सियासी जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। रविवार को NDA गठबंधन ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला घोषित किया, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) दोनों ही 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इसका मतलब यह है कि एनडीए के दो सबसे बड़े साझेदार बराबर संख्या में चुनाव मैदान में उतरेंगे।

    इस बार की सीट बंटवारे की घोषणा के साथ ही NDA ने अपने सभी समीकरण तय कर लिए हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (LJP – Ram Vilas) को 29 सीटें दी गई हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को छह-छह सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए का पूरा चुनावी समीकरण तैयार हो चुका है।

    एनडीए का चुनावी एजेंडा: विकास और सुशासन

    धर्मेंद्र प्रधान ने इस मौके पर कहा कि एनडीए में सभी सदस्य पूरी तरह एकजुट हैं। यह गठबंधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास और सुशासन के एजेंडे पर चुनाव लड़ने जा रहा है। भाजपा और जेडीयू के उम्मीदवारों की लिस्ट लगभग फाइनल है और जल्द ही इसका ऐलान किया जाएगा।

    एनडीए का मुख्य फोकस इस बार विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, हेल्थकेयर और रोजगार जैसे मुद्दों पर रहेगा। मोदी और नीतीश की जोड़ी यह साबित करने की कोशिश करेगी कि उनके नेतृत्व में बिहार में सुशासन और विकास की गति बढ़ी है।

    महागठबंधन की चुनौती और रणनीति

    वहीं, विपक्षी महागठबंधन यानी RJD, कांग्रेस और लेफ्ट को भी अब तैयारी तेज करनी होगी। महागठबंधन के लिए यह चुनाव केवल सत्ता का मुकाबला नहीं बल्कि बदलाव और विश्वास का परीक्षण है। लालू परिवार की पार्टी RJD इस बार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां अपने क्षेत्रों में रणनीतिक चुनाव लड़ेंगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महागठबंधन को एनडीए के मुकाबले अपने एजेंडे को स्पष्ट करना होगा। यह चुनाव “विकास बनाम बदलाव” की लड़ाई बन चुका है।

    NDA बनाम महागठबंधन: चुनावी समीकरण

    एनडीए के पास इस बार सीट शेयरिंग के माध्यम से संतुलन है, जबकि महागठबंधन के लिए अब यह चुनौती है कि वे अपने उम्मीदवारों की लिस्ट और गठबंधन की रणनीति समय पर अंतिम रूप दें। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुल 243 सीटें हैं और जीतने के लिए किसी भी गठबंधन को 122 सीटें हासिल करनी होंगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव का परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा। क्या मोदी-नीतीश की जोड़ी सत्ता बरकरार रख पाएगी या लालू परिवार का महागठबंधन सत्ता की कुर्सी पर कब्जा करेगा, यह अब समय ही बताएगा।


    मुख्य मुद्दे और रणनीतिक बिंदु

    इस चुनाव में कुछ प्रमुख मुद्दे हैं जो वोटरों के निर्णय को प्रभावित करेंगे:

    • विकास (Development): सड़क, ब्रिज और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का असर।
    • सुशासन (Good Governance): अपराध और भ्रष्टाचार नियंत्रण।
    • रोजगार (Employment): युवाओं के लिए रोजगार के अवसर।
    • शिक्षा और हेल्थ (Education & Healthcare): सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का प्रभाव।
    • धार्मिक और सामाजिक समीकरण (Social & Religious Factor): जातीय और समुदायिक राजनीति।

    एनडीए और महागठबंधन दोनों ही इन मुद्दों को अपने एजेंडे में प्रमुखता दे रहे हैं।


    निष्कर्ष: बिहार की सियासत का भविष्य

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की लड़ाई केवल सीटों की नहीं बल्कि जनता के विश्वास और बदलाव की भी लड़ाई है। NDA ने अपने सभी समीकरण तय कर लिए हैं, और महागठबंधन को अब रणनीति बदलनी होगी। इस बार की चुनावी लड़ाई ऐतिहासिक और निर्णायक होने वाली है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव बिहार की राजनीति में नए समीकरण और बदलाव ला सकता है। चाहे मोदी-नीतीश की जोड़ी सत्ता बनाए रखे या महागठबंधन का पलड़ा भारी हो, यह चुनाव भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

  • सपा में शामिल हुए चौधरी अमर सिंह और अन्य दिग्गज, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

    सपा में शामिल हुए चौधरी अमर सिंह और अन्य दिग्गज, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने न केवल संगठन को मज़बूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, बल्कि प्रदेश के दिग्गज नेताओं को पार्टी में शामिल कर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता पार्टी में शामिल हुए।

    कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और वरिष्ठ नेता लाल जी वर्मा ने शामिल नेताओं का स्वागत किया और उन्हें पार्टी की विचारधारा से अवगत कराया। इस अवसर पर ‘मेंहदी में तलवार’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

    जनता अब बदलाव चाहती है : सपा मुखिया

    सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा किसानों, मजदूरों, नौजवानों और पिछड़े वर्ग की आवाज़ रही है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले नौ सालों में केवल जनता को धोखा देने का काम किया गया। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने आम लोगों का जीवन कठिन कर दिया है। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि जनता अब बदलाव चाहती है और समाजवादी पार्टी ही इसका असली विकल्प है।

    कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने बताया कि उन्होंने पार्टी की नीतियों और विचारधारा से प्रभावित होकर सपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में प्रदेश का भविष्य सुरक्षित और विकास की नई राह खुलेगी।

    कौन-कौन हुए शामिल:

    पूर्व विधायक चौधरी अमर सिंह और सुधीर चौहान अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए। इसके अलावा 2022 के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने वाले विद्यासागर और बसपा के पूर्व कॉर्डिनेटर लाल जी वर्मा ने भी सपा का दामन थामा। यह कदम साफ संकेत है कि पार्टी हर वर्ग और क्षेत्र के नेताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

    सुधीर चौहान ने कहा कि समाजवादी पार्टी देश की सबसे बड़ी तीसरी पार्टी है और इसमें शामिल होकर उन्हें खुशी है। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहण के नाम पर छीनी जा रही है। युवा वर्ग बेरोजगारी और अंधकारपूर्ण हालात में जी रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लोकल बॉडी के चुनाव में देरी और प्रशासनिक समस्याओं ने जनता को प्रभावित किया है।

    2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेताओं का सपा में शामिल

    सपा का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है। पार्टी प्रदेशभर में जनसभाओं, सम्मेलन और कार्यकर्ता बैठकों के माध्यम से जनता से सीधे संपर्क करेगी। इससे सपा की नीतियों और कार्यक्रमों का संदेश सीधे आम लोगों तक पहुंचेगा और पार्टी का संदेश अधिक प्रभावी होगा।

    विशेष रूप से सपा इस रणनीति पर ध्यान दे रही है कि किसानों, मजदूरों, युवा और पिछड़े वर्ग की समस्याओं को सामने लाया जाए। इसके साथ ही पार्टी जातिगत और धर्म आधारित राजनीति से हटकर विकास और सामाजिक न्याय की ओर केंद्रित रहेगी।

    उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेताओं का सपा में शामिल होना पार्टी के लिए रणनीतिक लाभ साबित हो सकता है। यह न केवल पार्टी संगठन को मजबूत करता है, बल्कि जनता के बीच विश्वास और लोकप्रियता भी बढ़ाता है। अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाजवादी पार्टी ही वह विकल्प है जो हर वर्ग की आवाज़ उठाने में सक्षम है।

  • नक्सल क्षेत्रों में पक्के मकान: छत्तीसगढ़ में विकास की नई रोशनी

    नक्सल क्षेत्रों में पक्के मकान: छत्तीसगढ़ में विकास की नई रोशनी

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की बयार

    छत्तीसगढ़ के उन सुदूर जंगलों में, जहाँ कभी नक्सलियों की गोलियों की गूँज सुनाई देती थी, अब ईंट-सीमेंट से बने पक्के घरों की नींव रखी जा रही है। यह सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, बल्कि विकास, भरोसे और उम्मीद की नई शुरुआत है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए 15,000 पक्के मकानों की मंजूरी हासिल की है। इस पहल ने उन क्षेत्रों में रोशनी फैलाई है, जहाँ पहले अंधेरा और डर का साया था।

    पक्के मकानों का सपना हकीकत में

    अब तक 3,000 से अधिक परिवारों को उनके पक्के घर मिल चुके हैं। खास बात यह है कि कुछ मकान तो जंगलों और पहाड़ियों के बीच महज तीन महीनों में तैयार हो गए। कांकेर की दसरी बाई और सुकमा की सोडी हुंगी जैसे लोग अब इन घरों में नई जिंदगी जी रहे हैं। जहाँ पहले कच्चे मकानों में डर और अनिश्चितता के साथ जीवन बीतता था, अब इन परिवारों को पक्की छत, सुरक्षा और सम्मान मिला है। यह योजना सिर्फ मकान नहीं बना रही, बल्कि लोगों के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास ला रही है।

    भरोसे और स्थिरता की नींव

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को केवल निर्माण कार्य से कहीं अधिक बताया है। उनके शब्दों में, “ये ईंट और सीमेंट का काम नहीं, बल्कि भरोसे और स्थिरता की नींव है।” यह योजना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के मन से डर को निकालकर उनके लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर रही है। इन मकानों के साथ सरकार न केवल आश्रय दे रही है, बल्कि उन लोगों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास भी कर रही है, जो कभी हिंसा और अस्थिरता का शिकार थे।

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    क्या सिर्फ मकान बनाना काफी है?

    हालांकि, यह पहल सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ मकान बनाना ही काफी है? इन घरों के साथ-साथ इन परिवारों को शिक्षा, रोजगार, और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी चाहिए। क्या इन मकानों के साथ इनका भविष्य भी सुरक्षित हो पाएगा? सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बदलाव केवल भौतिक न हो, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी इन परिवारों का उत्थान हो।

    भविष्य की राह और चुनौतियाँ

    छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की मिसाल बन सकती है। बस्तर, बीजापुर, और सुकमा जैसे क्षेत्र, जो कभी हिंसा के लिए जाने जाते थे, अब बदलाव की कहानी लिख रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि यह बदलाव हर पीड़ित परिवार तक कब तक पहुँचेगा? सरकार को अपनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि हर जरूरतमंद तक यह योजना पहुँचे। जब हर घर में पक्की छत और उम्मीद का उजाला होगा, तभी बस्तर और सुकमा जैसे क्षेत्र शांति और समृद्धि के प्रतीक बन सकेंगे।

  • पीएम मोदी का बिहार में आतंकवाद पर कड़ा संदेश

    पीएम मोदी का बिहार में आतंकवाद पर कड़ा संदेश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई को बिहार के काराकाट में जनसभा को संबोधित करते हुए आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ और प्रभावी कार्रवाई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती से उन्होंने पहले भी यह वादा किया था कि जिन्होंने बेटियों का सिंदूर उजाड़ा, उन्हें मिट्टी में मिला दिया जाएगा। इस वचन को पूरा करते हुए वे फिर बिहार आए हैं, जहां उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों और नए भारत के निर्माण की दिशा में उठाए गए कदमों को विस्तार से बताया।

    ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवादियों का खात्मा

    प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने आतंक के गढ़ों को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा, “पहलगाम में निर्दोषों पर हुए जघन्य हमले के बाद मैंने बिहार से वादा किया था कि आतंकियों को जवाब मिलेगा। हमारी सेना ने उनके ठिकानों को खंडहर में बदल दिया है। यह नया भारत है, जो न केवल जवाब देता है बल्कि दुश्मनों को उनकी औकात भी दिखाता है।”

    पीएम ने बीएसएफ के वीर जवानों की बहादुरी की प्रशंसा की जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अभूतपूर्व पराक्रम दिखाया। उन्होंने बिहार के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हमारी सेना सीमा पर अभेद्य चट्टान की तरह खड़ी है और आतंकवादियों को कड़ी चेतावनी दी।

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    नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई

    मोदी ने बिहार के सासाराम, कैमूर और आसपास के इलाकों में नक्सलवाद के विरुद्ध हुई लड़ाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2014 से सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से सुधार किया और माओवादियों को कड़ी सजा देकर वहां शांति और विकास के रास्ते खोले। उन्होंने कहा, “शांति ही विकास की कुंजी है। हमने हिंसा फैलाने वालों का सफाया किया है ताकि बिहार समृद्धि की ओर बढ़ सके।”

    बिहार की वीरता और नया भारत

    पीएम मोदी ने बिहार की धरती को वीर कुंवर सिंह की भूमि बताते हुए कहा कि यहाँ के युवा देश की सुरक्षा और विकास के लिए समर्पित हैं। उन्होंने बिहार की जनता से अपील की कि वे नए भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी बढ़ाएं, जो आतंकवाद के खिलाफ मजबूत है और विकास तथा शांति की ओर बढ़ रहा है।

    समापन

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार की आवाज़ अब पूरे विश्व में गूंज रही है और भारत किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सभी को मिलकर देश की सुरक्षा, शांति और समृद्धि के लिए काम करने का आह्वान किया।