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  • मेलोनी का भारत पर बड़ा बयान: वैश्विक संघर्षों में भारत की अहम भूमिका, UNGA में जोर

    मेलोनी का भारत पर बड़ा बयान: वैश्विक संघर्षों में भारत की अहम भूमिका, UNGA में जोर

    इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान भारत की वैश्विक शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनियाभर के चल रहे युद्धों को समाप्त करने में निर्णायक योगदान दे सकता है। यह बयान रूस-यूक्रेन संघर्ष समेत वैश्विक चुनौतियों के बीच आया है, जहां भारत की राजनयिक क्षमता को मेलोनी ने “बहुत महत्वपूर्ण” करार दिया। न्यूयॉर्क में ANI से बातचीत के दौरान मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मुझे लगता है कि भारत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।” यह बयान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हालिया फोन वार्ता के बाद आया है, जिसमें दोनों नेताओं ने यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।

    भारत की शांति भूमिका पर फोकस

    UNGA के 80वें सत्र के साइडलाइंस पर मेलोनी का यह बयान वैश्विक नेताओं के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। उन्होंने भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि नई दिल्ली वैश्विक संघर्षों के समाधान में पुल का काम कर सकता है। विशेष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए मेलोनी ने भारत की तटस्थता और संवाद की नीति की तारीफ की। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ के बीच आया, जिसकी भारत ने कड़ी आलोचना की है। मेलोनी ने कहा कि भारत जैसे उभरते शक्ति केंद्रों की भूमिका से ही वैश्विक स्थिरता संभव है। यह बयान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि G20 और अन्य मंचों पर भारत की नेतृत्व क्षमता को भी प्रमाणित करता है।

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    यूक्रेन शांति और रणनीतिक साझेदारी

    यह बयान सितंबर 2025 की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच फोन कॉल के ठीक बाद आया। दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान प्रमुख था। मोदी ने राजनयिक प्रयासों में भारत के पूर्ण समर्थन की पुष्टि की, जबकि मेलोनी ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया। दोनों ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 के तहत साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई। इसमें निवेश, रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    मोदी ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, “प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उत्कृष्ट बातचीत हुई। हमने भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और यूक्रेन संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के साझा हित पर पुन: प्रतिबद्धता जताई।” मेलोनी ने भारत के 2026 में आयोजित होने वाले AI इम्पैक्ट समिट की सफलता पर विश्वास व्यक्त किया। इसके अलावा, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पहल के तहत कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमति बनी, जो व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगी। यह वार्ता G7 समिट के बाद दोनों नेताओं की मजबूत केमिस्ट्री को दर्शाती है।

    भारत-इटली संबंधों में नई गति

    मेलोनी ने भारत-EU FTA को “परस्पर लाभकारी” बताते हुए इसके शीघ्र निष्कर्ष के लिए इटली का पूर्ण समर्थन दोहराया। यह एग्रीमेंट व्यापार को दोगुना करने और नई निवेश संभावनाओं को खोलेगा। 2026 के AI इम्पैक्ट समिट पर मेलोनी का उत्साह भारत की डिजिटल नेतृत्व क्षमता को मान्यता देता है। दोनों देशों ने IMEC के माध्यम से मध्य पूर्व के साथ आर्थिक एकीकरण पर काम तेज करने का फैसला लिया, जो रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। ये कदम भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत बनाते हैं, खासकर जब अमेरिका के टैरिफ से चुनौतियां बढ़ रही हैं। इटली भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन यूरो को पार कर चुका है।

    तीन साल की भयावहता और हालिया अपडेट

    रूस-यूक्रेन युद्ध को फरवरी 2022 से तीन साल हो चुके हैं, और यह अब तक का सबसे घातक संघर्ष साबित हुआ है। यूक्रेनी शहरों पर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से हजारों नागरिक मारे गए, बिजली आपूर्ति चरमरा गई। यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई में रूस के आंतरिक इलाकों, जैसे तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए। सितंबर 2025 तक, यूक्रेन के कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के अनुसार, रूस को 2025 में ही 2,99,210 सैनिकों का नुकसान हुआ है। रूस ने जापड-2025 अभ्यास में यूक्रेन से सीखे गए ड्रोन युद्ध के सबक बेलारूस के साथ साझा किए।

    हालिया अपडेट्स में रूस ने यूक्रेन के कोजाची लाहेरी में तीन नागरिकों की हत्या की, जो युद्ध अपराधों की कड़ी का हिस्सा है। यूक्रेन की लंबी दूरी की हड़तालों से रूस की तेल उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर दबाव पड़ा। रूस ने यूरोपीय शांति गारंटी को खारिज करते हुए पोलैंड हवाई क्षेत्र उल्लंघन जैसे हाइब्रिड हमले किए। युद्ध से यूक्रेन की थर्मल क्षमता 80% नष्ट हो चुकी है, और रूस ने 73 वर्ग मील क्षेत्र पर कब्जा किया। भारत की तटस्थता ने इसे शांति वार्ता के लिए आदर्श मध्यस्थ बनाया है।

    शांति के लिए भारत की बढ़ती जिम्मेदारी

    मेलोनी का बयान भारत की वैश्विक कूटनीति को नई ऊंचाई देता है। यूक्रेन जैसे संकटों में भारत की भूमिका न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत करती है, बल्कि बहुपक्षीय मंचों पर उसकी साख बढ़ाती है। जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है, भारत-इटली साझेदारी आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता का आधार बनेगी। यह समय है कि वैश्विक नेता भारत जैसे देशों के साथ मिलकर शांति प्रयासों को गति दें।

  • ब्रह्मपुत्र पर चीन का मेगा डैम: भारत की चिंताएं और कूटनीतिक प्रयास

    ब्रह्मपुत्र पर चीन का मेगा डैम: भारत की चिंताएं और कूटनीतिक प्रयास

    चीन का विशाल बांध प्रोजेक्ट और भारत की नजर

    चीन द्वारा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से, जिसे यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है, पर बनाए जा रहे विशाल बांध ने भारत, बांग्लादेश और म्यांमार में चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस मेगा डैम प्रोजेक्ट की शुरुआत 1986 में सार्वजनिक की गई थी, और तब से चीन इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है। भारत सरकार ने इस मुद्दे पर पहली बार संसद में आधिकारिक रूप से संज्ञान लिया है। गुरुवार को राज्यसभा में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित जवाब में कहा कि भारत इस प्रोजेक्ट पर सतर्क नजर रख रहा है और इससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। यह बांध न केवल जल संसाधनों पर प्रभाव डालेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और पर्यावरण पर भी गंभीर असर डाल सकता है।

    भारत की रणनीति और सुरक्षा उपाय

    भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ब्रह्मपुत्र नदी से संबंधित सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही है। विदेश राज्यमंत्री ने बताया कि सरकार भारतीय हितों, खासकर निचले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन और आजीविका की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए रक्षात्मक और सुधारात्मक उपाय किए जा रहे हैं। सरकार का ध्यान न केवल जल संसाधनों की उपलब्धता पर है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चीन की गतिविधियां भारत के हितों को नुकसान न पहुंचाएं, सरकार ने कूटनीतिक और तकनीकी स्तर पर कई कदम उठाए हैं।

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    चीन के साथ कूटनीतिक और तकनीकी चर्चा

    भारत और चीन के बीच सीमा पार नदियों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए 2006 में एक विशेषज्ञ स्तरीय संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया था। इस मंच के माध्यम से दोनों देश जल संसाधनों और बांध निर्माण से जुड़े मसलों पर बातचीत करते हैं। इसके अलावा, राजनयिक स्तर पर भी यह मुद्दा उठाया जाता रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जुलाई 2025 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान चीन में इस मुद्दे को उठाया था। भारत ने बार-बार चीन से नदियों से संबंधित हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने और निचले क्षेत्रों के देशों के हितों को ध्यान में रखने का आग्रह किया है। सरकार का कहना है कि नदियों के पानी पर निचले क्षेत्रों के देशों का भी अधिकार है, और चीन को अपनी गतिविधियों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

    क्षेत्रीय सहयोग और भविष्य की दिशा

    भारत सरकार ने चीन से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि यारलुंग त्सांगपो पर बनने वाले बांध से निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह, पर्यावरण और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके लिए सरकार न केवल चीन के साथ बल्कि अन्य प्रभावित देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रही है। ब्रह्मपुत्र नदी क्षेत्रीय स्थिरता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, और भारत इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वह क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर अपने हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

  • इंडोनेशिया ने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को सराहा, सांस्कृतिक संबंधों को सहयोग का मजबूत आधार बताया

    इंडोनेशिया ने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को सराहा, सांस्कृतिक संबंधों को सहयोग का मजबूत आधार बताया

    दक्षिण एशिया में भारत की आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और दृढ़ नीति को अब वैश्विक स्तर पर समर्थन मिल रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, ने भारत की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।

    इंडोनेशिया के प्रभावशाली इस्लामिक संगठन नहदलातुल उलेमा के कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन केएच उलिल अबशार अब्दाला ने स्पष्ट किया कि इस्लाम शांति का धर्म है और आतंकवाद को इससे जोड़ना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे मुस्लिम समुदाय की छवि को भी नुकसान होता है।

    अबशार अब्दाला ने कहा, “कुछ संगठन इस्लाम के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देते हैं, जबकि वास्तव में आतंकवाद का सबसे बड़ा नुकसान मुस्लिम समुदाय को ही होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम की गलत व्याख्या करके हिंसा को वैध ठहराने की कोशिश पूरी तरह निंदनीय है।

    भारत-इंडोनेशिया सहयोग: सांस्कृतिक संबंधों पर बल

    अब्दाला ने भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा किया है। आज जब दुनिया आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौती से जूझ रही है, ऐसे में भारत और इंडोनेशिया का एकजुट होना बहुत महत्वपूर्ण है।

    इंडोनेशिया की राजनीतिक पार्टी नेशनल मैंडेट पार्टी (PAN) ने भी भारत के रुख का समर्थन किया। 29 मई 2025 को जकार्ता में भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात के दौरान PAN नेताओं ने कहा कि आतंकवाद को धर्म या जाति से जोड़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने भारत के पहलगाम हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भारत के साथ पूर्ण समर्थन की बात दोहराई।

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    भारतीय प्रतिनिधिमंडल की पहल: वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण

    जनता दल (यू) के सांसद संजय कुमार झा के नेतृत्व में भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 20 से अधिक मित्र देशों के राजनयिकों से मुलाकात की। इस दौरान सभी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया और भारत के रुख की सराहना की।

    भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि इस संवाद के दौरान भारत ने अपनी आतंकवाद विरोधी नीति को साझा किया और इंडोनेशियाई नेताओं ने इसे सशक्त व ठोस बताया।