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  • बिहार में सीट बंटवारे पर मांझी का बयान, जुलाई-अगस्त में होगा फैसला

    बिहार में सीट बंटवारे पर मांझी का बयान, जुलाई-अगस्त में होगा फैसला

    बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में सीट शेयरिंग को लेकर अब तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। लेकिन केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जुलाई में चर्चा और अगस्त तक सीटों पर फैसला ले लिया जाएगा।पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए मांझी ने कहा एनडीए के सभी घटक दलों को लड़ने और जीतने लायक सीटें दी जाएंगी। हमारी पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है। हमें लड़ना भी है और लड़ाना भी है।यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा जोरों पर है। एनडीए पूरी तरह से चुनावी मोड में आता दिख रहा है।

    भाजपा का संगठनात्मक अभियान

    इसी कड़ी में भाजपा ने जहानाबाद के सिकरिया में एक कार्यशाला का आयोजन किया जिसका विषय था विकसित भारत का अमृत वर्ष  सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण

    कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थितियाँ

    • ब्रजेश रमन (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा)
    • आशुतोष कुमार (सह क्षेत्रीय प्रभारी, मगध)
    • सीताराम पांडे (जिला प्रभारी)

    सांस्कृतिक शुरुआत

    कार्यक्रम की शुरुआत पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, और अहिल्याबाई होलकर के तैलचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। जिला अध्यक्ष धीरज कुमार ने कहाइस अभियान का उद्देश्य है केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को गांव-गांव तक पहुंचाना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना।

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     कार्यकर्ताओं के लिए अपील

    कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वे हर पंचायत में चौपाल लगाएं 70 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना से जोड़ें और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करें बिहार में जहां एक ओर एनडीए अपने रणनीतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटा है, वहीं मांझी का यह बयान इस ओर इशारा कर रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन के अंदर भी व्यापक मंथन चल रहा है।

  • बिहार की सियासत में गरमाई बहस: तेजस्वी यादव का बीजेपी और एनडीए पर तीखा हमला

    बिहार की सियासत में गरमाई बहस: तेजस्वी यादव का बीजेपी और एनडीए पर तीखा हमला

    बिहार की राजनीति एक बार फिर से गर्म हो गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बयान ऐसा था, जिसे लेकर विपक्ष ने एनडीए पर सीधा हमला बोल दिया। खासतौर पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को आड़े हाथों लिया।

    हरियाणा के CM के बयान से मचा बवाल

    दरअसल, रविवार को गुरुग्राम में एक कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा था कि “हरियाणा के बाद अब बिहार की बारी है। बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विजय का झंडा फहराया जाएगा।” इस कार्यक्रम में बिहार बीजेपी के नेता सम्राट चौधरी भी मौजूद थे।

    सैनी के इस बयान को बिहार में मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में सम्राट चौधरी की पेशगी के तौर पर देखा जा रहा है। यही बात विपक्ष को अखर गई और तेजस्वी यादव ने इसे लेकर तीखा वार किया।

    तेजस्वी यादव का जवाब – “सीएम कौन नहीं बनेगा, यह तो बता दो”

    आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा –

    “बीजेपी में कौन नहीं सीएम बनेगा, यह तो बता दो। क्यों आप लोग झगड़ा लगवा रहे हैं? दो दिन बाद दूसरा नाम आ जाएगा। ये लोग आपस में नूरा-कुश्ती करते रहेंगे। इस एनडीए की खटारा गाड़ी पर बिहार की जनता सवार नहीं होने जा रही है।”

    तेजस्वी ने यह भी कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने जा रही है और बीजेपी जिसे चाहे उसे मुख्यमंत्री बना दे, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

    अंबेडकर जयंती पर दिया बड़ा बयान

    बिहार में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने बीजेपी और आरएसएस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि:

    “जिन लोगों ने अंबेडकर का विरोध किया, वो लोग आज अंबेडकर जयंती मना रहे हैं। ये लोग गोलवलकर और गोडसे की विचारधारा पर चलते हैं और संविधान को नहीं मानते।”

    तेजस्वी का यह बयान बीजेपी के उन नेताओं पर सीधा वार है जो आज अंबेडकर को सम्मान देने की बात करते हैं, लेकिन आरएसएस की विचारधारा का समर्थन करते हैं।

    अमित शाह के बयान का किया ज़िक्र

    तेजस्वी यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में दिए गए बयान की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि:

    “अमित शाह का बाबासाहेब को लेकर संसद में जो बयान आया, वो उनके दिल की बात थी। आज जो भी जेडीयू, बीजेपी या एनडीए के अन्य पार्टनर हैं, वे सभी अंबेडकर की विचारधारा के खिलाफ काम कर रहे हैं।”

    आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी पर सीधा हमला

    तेजस्वी यादव ने महागठबंधन सरकार के समय लिए गए 65 फीसदी आरक्षण के फैसले का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि:

    “हमने उस आरक्षण को संविधान के शेड्यूल 9 में डालने की मांग की थी, लेकिन बीजेपी सरकार कोर्ट में जाकर उस फैसले को अटकाने का काम कर रही है।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नहीं चाहती कि गरीबों, पिछड़ों और दलितों को उनका हक मिले।

    नीतीश कुमार पर भी तीखा कटाक्ष

    तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि:

    “नीतीश कुमार को बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। वे अचेत अवस्था में हैं और निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं।”

    इस बयान से साफ है कि आरजेडी और महागठबंधन की रणनीति आने वाले चुनावों में नीतीश कुमार को भी कमजोर नेतृत्व के तौर पर दिखाने की है।

    बिहार की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। बीजेपी की ओर से सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने की कोशिश, और तेजस्वी यादव का आक्रामक तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीने बिहार की राजनीति में कई बड़े मोड़ लाने वाले हैं।

    तेजस्वी यादव का फोकस सामाजिक न्याय, आरक्षण, संविधान और बीजेपी के अंदरुनी विरोधाभासों को उजागर करने पर है। वहीं, बीजेपी और एनडीए नेतृत्व एकजुटता दिखाने की कोशिश में है। 

  • पप्पू यादव का केंद्र पर हमला: ‘टैक्स से जनता की कमर टूटी’

    पप्पू यादव का केंद्र पर हमला: ‘टैक्स से जनता की कमर टूटी’

    संसद के बजट सत्र के दौरान जन अधिकार पार्टी के नेता और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार की टैक्स नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि देश की जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है और अब सरकार हर चीज़ पर टैक्स लगाकर आम लोगों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है। उनका कहना था कि पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीज़ों तक, हर चीज़ महंगी होती जा रही है, और अब तो ऐसा लग रहा है कि सरकार आसमान से लेकर ज़मीन तक हर जगह टैक्स वसूलने में लगी हुई है।

    महंगाई और टैक्स: आम जनता की बढ़ती मुश्किलें

    आज देश में जीएसटी (GST) लागू होने के बावजूद कई अन्य तरह के टैक्स वसूले जा रहे हैं। सरकार लगातार यह कहती रही है कि जीएसटी से टैक्स प्रणाली सरल हुई है, लेकिन आम जनता को इसका असर महंगाई के रूप में झेलना पड़ रहा है।

    यह भी पढ़ें: Parliament Budget Session: वन नेशन वन टैक्स पर पप्पू यादव का बड़ा बयान

    1. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें

    • पेट्रोल और डीजल पर लगातार अतिरिक्त टैक्स लगाया जा रहा है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ जाता है और इसका सीधा असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
    • पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे राज्यों द्वारा लगाए गए अतिरिक्त कर से जनता की जेब पर और भार पड़ रहा है।

    2. रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी

    • खाने-पीने की वस्तुएं जैसे आटा, दाल, चावल, दूध, तेल, नमक आदि पर अप्रत्यक्ष कर लगाने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
    • कई ज़रूरी वस्तुओं पर 5% से 18% तक जीएसटी लगाया गया है, जिससे लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।

    3. बिजली-पानी पर बढ़ते शुल्क

    • घरेलू बिजली और पानी की दरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
    • टोल टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, रोड टैक्स जैसे कई अन्य शुल्कों के कारण आम नागरिक की आय का एक बड़ा हिस्सा सरकारी करों में चला जाता है।

    पप्पू यादव का बयान: जनता को कितनी बार हलाल करिएगा?

    संसद में बहस के दौरान पप्पू यादव ने सरकार की वन नेशन, वन टैक्स नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह केवल एक प्रचारात्मक नारा बनकर रह गया है। उन्होंने कहा: “सरकार ज़मीन पर भी टैक्स, आसमान पर भी टैक्स…आख़िर जनता को कितनी बार हलाल करिएगा?”
    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमीरों और कॉर्पोरेट कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है जबकि गरीब और मध्यम वर्ग को अधिक करों का बोझ उठाना पड़ रहा है।

    विपक्ष ने किया समर्थन, भाजपा का जवाब

    • कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पप्पू यादव के बयान को सही ठहराते हुए कहा कि सरकार जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है।
    • वामपंथी दलों ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अप्रत्यक्ष करों के जरिए गरीबों और मध्यम वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है।
    • भाजपा नेताओं ने इस बयान को मात्र एक राजनीतिक स्टंट बताया और कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियां देश के विकास के लिए बनाई गई हैं।

    वन नेशन, वन टैक्स: कितना सफल?

    सरकार ने 2017 में वन नेशन, वन टैक्स यानी जीएसटी लागू किया था, ताकि देशभर में एक समान कर प्रणाली बनाई जा सके। लेकिन इसके बावजूद कई जगह अलग-अलग टैक्स वसूले जा रहे हैं।

    • कई आवश्यक वस्तुओं पर 5% से 28% तक जीएसटी लगाया गया है।
    • छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग के लोग अभी भी अतिरिक्त करों के कारण परेशान हैं।
    • पेट्रोल-डीजल और शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे इनकी कीमतों में बढ़ोतरी जारी है।

    जनता की क्या मांग है?

    • जीएसटी स्लैब को पुनः संशोधित किया जाए, ताकि रोजमर्रा की ज़रूरी वस्तुओं पर कर की दरें कम की जा सकें।
    • पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाए, जिससे राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त करों से राहत मिले।
    • छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लिए टैक्स छूट की व्यवस्था की जाए।

    सरकारी सेवाओं और बिजली-पानी पर करों को कम किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिले।