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  • ढाका में ग्रामीण बैंक मुख्यालय पर बम विस्फोट, कई जगह धमाके: कोई हताहत नहीं

    ढाका में ग्रामीण बैंक मुख्यालय पर बम विस्फोट, कई जगह धमाके: कोई हताहत नहीं

    बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सोमवार (10 नवंबर 2025) को तड़के एक के बाद एक कई धमाके होने से पूरे शहर में सनसनी फैल गई। सबसे पहले मीरपुर इलाके में ग्रामीण बैंक (ग्रामीण बैंक) के मुख्यालय के बाहर सुबह करीब 3 बजकर 45 मिनट पर एक देसी बम फेंका गया। पुलिस के अनुसार, दो अज्ञात बदमाश मोटरसाइकिल पर सवार होकर बैंक के सामने पहुंचे, बम फेंका और मौके से फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज में इनकी तस्वीरें कैद हो गई हैं, और पुलिस ने उनकी पहचान के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। ग्रामीण बैंक के संस्थापक नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस वर्तमान में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार हैं, इसलिए इस हमले को राजनीतिक साजिश से जोड़ा जा रहा है।

    धमाके की आवाज आसपास के इलाकों में गूंजी, लेकिन सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ। बैंक के बाहर कांच के टुकड़े बिखर गए, लेकिन इमारत को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। मीरपुर मॉडल थाने के प्रभारी सज्जाद रोमान ने बताया कि यह ‘कॉकटेल’ बम था, जो स्थानीय स्तर पर आसानी से बनाया जा सकता है। इसी के साथ, मोहम्मदपुर इलाके में यूनुस के सलाहकार फरीदा अख्तर के व्यवसायिक प्रतिष्ठान ‘प्रबर्तन’ (शस्य प्रबर्तन) के सामने भी दो देसी बम फेंके गए। ये विस्फोट सुबह करीब 7 बजकर 10 मिनट पर हुए, जिसमें एक बम दुकान के अंदर फटा। फरीदा अख्तर मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालय की सलाहकार हैं। यहां भी कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन दुकान का सामान बिखर गया।

    अन्य धमाके और आगजनी की घटनाएं

    ढाका में सुबह के इन हमलों के अलावा दिन भर अन्य जगहों पर भी हिंसा की घटनाएं हुईं। धानमंडी इलाके में इब्न सिना अस्पताल के पास दो बम फेंके गए, जो जमात-ए-इस्लामी से जुड़े होने के कारण संवेदनशील माना जाता है। इसी इलाके के एक प्रमुख चौराहे पर भी दो और बम विस्फोट हुए। इसके अलावा, अज्ञात बदमाशों ने दो सार्वजनिक बसों में आग लगा दी, जिससे यातायात बाधित हो गया। शाम को स्थिति और बिगड़ गई, जब मौचक चौराहे पर करीब 6 बजे, आगरगांव में बांग्लादेश बेतार के सामने 6 बजकर 20 मिनट पर, खिलगांव फ्लाईओवर पर 6 बजकर 30 मिनट पर और मीरपुर के शाह अली बाजार के पास 6 बजकर 40 मिनट पर धमाके हुए। ये हमले सार्वजनिक परिवहन, धार्मिक स्थलों, राष्ट्रीय नागरिक पार्टी से जुड़े संस्थानों और यूनुस से संबंधित जगहों को निशाना बना रहे थे।

    पुलिस ने इन सभी घटनाओं को ‘उपद्रवी गतिविधियों’ का हिस्सा बताया है। एक 28 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जो प्रतिबंधित संगठन बांग्लादेश छात्र लीग (BCL) का सदस्य है। मुख्य सलाहकार कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि ढाका पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने शहरव्यापी सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। पुराने ढाका के एक अस्पताल के सामने एक 50 वर्षीय ‘सूचीबद्ध गैंगस्टर’ की गोली मारकर हत्या भी कर दी गई, जो इन घटनाओं से जुड़ी हो सकती है।

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    राजनीतिक पृष्ठभूमि और शेख हसीना का मुकदमा

    ये सभी घटनाएं उस संवेदनशील समय में हो रही हैं जब 13 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ मुकदमे पर फैसला सुनाने की तारीख तय करेगा। हसीना पर 2024 के जुलाई विद्रोह को दबाने के दौरान हत्याओं, लापता करने और यातनाओं का आरोप है, जिसमें सैकड़ों छात्रों की मौत हुई थी। अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की है, जबकि हसीना ने इसे ‘न्यायिक मजाक’ करार दिया है। वे भारत में निर्वासित हैं और कोर्ट के समन का पालन नहीं कर रही हैं।

    हसीना की अवामी लीग ने 13 नवंबर को ‘लॉकडाउन’ का आह्वान किया है, जिससे तनाव बढ़ गया है। पिछले कई महीनों से ढाका में फ्लैश मार्च और हिंसा जारी है। अंतरिम सरकार ने राजनीतिक दलों को सुधार प्रस्तावों पर सहमति बनाने के लिए सात दिवसीय समयसीमा दी थी, जो आज समाप्त हो रही है। अभियोजक ताजुल इस्लाम ने हसीना को ‘अपराधों का केंद्र’ बताया है, जबकि उनके सहयोगी इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ मानते हैं।

    सुरक्षा उपाय और आगे की स्थिति

    इन घटनाओं के बाद ढाका में हाई अलर्ट जारी है। पुलिस ने धार्मिक स्थलों जैसे चर्च, मंदिर और मस्जिदों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। शहर भर में गश्त और निगरानी तेज कर दी गई है। सेना के 60,000 जवान सहायता के लिए तैनात हैं, लेकिन आधे को आराम के लिए वापस बुला लिया गया है। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने शांति की अपील की है। फिलहाल, इन धमाकों में कोई मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है, लेकिन राजधानी में भय का माहौल है।

    हम लगातार अपडेट पर नजर रखे हुए हैं। 13 नवंबर का फैसला तय करने वाली सुनवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। नागरिकों से अपील है कि अफवाहों से बचें और संदिग्ध गतिविधि पर पुलिस को सूचित करें। बांग्लादेश की यह अस्थिरता क्षेत्रीय शांति के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

  • मुरादनगर में नीलगाय का अनोखा कारनामा: छत पर चढ़ी, गौ रक्षा दल ने सुरक्षित उतारा!

    मुरादनगर में नीलगाय का अनोखा कारनामा: छत पर चढ़ी, गौ रक्षा दल ने सुरक्षित उतारा!

    मंदिर के पास छत पर चढ़ी नीलगाय

    उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में शुक्रवार को एक दिलचस्प और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। मोहल्ला महाजनान के राधाकृष्ण बड़ा मंदिर के पास स्थित पंडित रामनिवास शर्मा के घर की छत पर एक नीलगाय किसी तरह चढ़ गई। दोपहर के समय लोगों ने ऊपर खड़ी इस विशाल नीलगाय को देखा तो आश्चर्यचकित रह गए। तुरंत वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया गया, जो कुछ ही देर में वायरल हो गया। नीलगाय नीचे उतरने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण और स्थानीय लोग जमा हो गए। यह घटना न केवल जानवरों की अप्रत्याशित हरकतों को दर्शाती है, बल्कि समुदाय की एकजुटता का भी उदाहरण बनी। मुरादनगर जैसे छोटे शहरों में ऐसी घटनाएं आम हैं, लेकिन इस बार सबकी नजरें नीलगाय पर टिक गईं।

    चार घंटे की मशक्कत: रस्सी-जाल से सुरक्षित बचाव

    जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, गौ रक्षा दल के जिला अध्यक्ष गुलशन राजपूत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत वन विभाग और पुलिस प्रशासन को सूचना दी। संयुक्त अभियान शुरू हुआ, जिसमें रस्सियां, जाल और सावधानीपूर्वक योजना शामिल थी। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद नीलगाय को बिना किसी नुकसान के छत से नीचे उतार लिया गया। इस दौरान यश शर्मा, राहुल कर्ण, राजकुमार शर्मा सहित कई गौ रक्षक और वनकर्मी मौजूद रहे। गुलशन राजपूत ने बताया, “नीलगाय जंगली जानवर होते हुए भी शांत रही। हमारी प्राथमिकता था कि उसे चोट न पहुंचे।” वन विभाग ने बाद में नीलगाय की जांच की और उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ा। यह ऑपरेशन समुदाय की सतर्कता और संगठित प्रयासों का प्रतीक बना, जो जानवरों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है।

    शांत नीलगाय: मोहल्ले की ‘परिवार’ सदस्य

    सबसे रोचक बात यह रही कि नीलगाय ने पूरे ड्रामे के दौरान कोई उत्पात नहीं मचाया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह नीलगाय पास में रहने वाले अर्जुन त्यागी की पालतू थी। अर्जुन के निधन के बाद यह मोहल्ले में ही घूमती रहती है। आस-पास के लोग इसे खाना-पानी देते हैं, इसलिए यह सबको पहचानती है। इसी वजह से यह शांत रही और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। मोहल्ले वाले इसे ‘परिवार का सदस्य’ मानते हैं। एक निवासी ने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि इसे देखभाल दें।” नीलगायें अक्सर फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं, लेकिन यहां की यह कहानी सकारात्मक है। गौ रक्षा दल ने भी सराहना की कि जानवर की शांति ने बचाव को आसान बनाया। यह घटना पशु-मानव सह-अस्तित्व की मिसाल है।

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    गौ रक्षा दल की सराहना: समुदाय की एकजुटता

    पूरी घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने गौ रक्षा दल, वन विभाग और पुलिस की जमकर तारीफ की। गुलशन राजपूत ने कहा, “हम गौवंश की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, चाहे वह गाय हो या नीलगाय।” टीम के सदस्यों ने जोखिम भरे अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह प्रयास उत्तर प्रदेश में बढ़ते वन्यजीव मानव संघर्ष को संभालने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। सोशल मीडिया पर वीडियो को हजारों व्यूज मिले, जहां लोग बचाव टीम की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में जागरूकता और त्वरित कार्रवाई जरूरी है। मुरादनगर प्रशासन ने भी भविष्य में ऐसी स्थितियों के लिए दिशानिर्देश जारी करने का वादा किया। यह घटना न केवल मनोरंजक है, बल्कि पशु संरक्षण की प्रेरणा भी देती है।

    सबक और आगे की राह: पशु संरक्षण में जागरूकता

    मुरादनगर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जंगली जानवर कभी भी अप्रत्याशित हरकत कर सकते हैं। नीलगायें भारत में संरक्षित हैं, लेकिन शहरीकरण से उनका मानव संपर्क बढ़ रहा है। गौ रक्षा दल जैसे संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जरूरत है स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान, शेल्टर होम और वन्यजीव हेल्पलाइन की। समुदाय ने दिखाया कि एकजुट होकर कोई भी चुनौती हल की जा सकती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए फेंसिंग और ट्रेनिंग जरूरी। यह अनोखा नजारा न केवल हंसी का विषय बना, बल्कि संवेदनशीलता का संदेश भी। क्या आपने कभी ऐसी मजेदार जानवरों की कहानी सुनी? साझा करें कमेंट्स में!

  • महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर किया हमला, कश्मीर में राष्ट्रगान के लिए हो रही है जबरदस्ती

    महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर किया हमला, कश्मीर में राष्ट्रगान के लिए हो रही है जबरदस्ती

    जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर में लोग ‘बंदूक के बल’ पर राष्ट्रगान के लिए खड़े होने को मजबूर किए जा रहे हैं। उनका यह बयान तब आया जब मंगलवार (30 सितंबर) को TRC फुटबॉल मैदान में राष्ट्रगान के दौरान बैठे कुछ युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। महबूबा मुफ्ती का कहना है कि यह सरकार की विफलता है, जो लोगों को इस तरह की स्थिति में खड़ा कर रही है।

    छात्र जीवन और राष्ट्रगान की यादें

    महबूबा मुफ्ती ने अपने छात्र जीवन की याद दिलाते हुए कहा, “हमारे समय में राष्ट्रगान बजते ही लोग सम्मान में बिना किसी दबाव के खड़े हो जाते थे। कभी किसी को मजबूर नहीं किया जाता था।” उन्होंने बताया कि आज यही परंपरा टूट रही है और लोगों को जबरदस्ती राष्ट्रगान के लिए खड़ा किया जा रहा है।

    फुटबॉल टूर्नामेंट में हिरासत की घटना

    जानकारी के अनुसार, श्रीनगर के TRC फुटबॉल ग्राउंड में पुलिस शहीद फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल के दौरान कम से कम 15 दर्शकों को हिरासत में लिया गया। उनका आरोप था कि उन्होंने राष्ट्रगान के समय खड़ा नहीं हुआ। बंदियों के परिवारों ने बताया कि बैंड की धीमी आवाज और अस्पष्ट संकेतों की वजह से लोग राष्ट्रगान शुरू होने का पता नहीं कर पाए। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी उपस्थित थे।

    कानून और सुरक्षा प्रोटोकॉल

    राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का जानबूझकर अनादर करना अपराध है। हालांकि, अभी तक जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा जारी है।

    सियासी हलचल और प्रतिक्रियाएं

    महबूबा मुफ्ती के इस बयान से भाजपा और PDP के बीच सियासी तकरार बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि कश्मीर की वर्तमान सुरक्षा और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाता है। कई नागरिक इसे सरकार की असफलता और अत्यधिक कठोर प्रोटोकॉल का परिणाम मान रहे हैं।

    महबूबा मुफ्ती का बयान दर्शाता है कि राष्ट्रगान के प्रति जबरदस्ती और जनता पर दबाव डालना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकारी बयान इस मामले में दिशा तय करेंगे।