August 28, 2026

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महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर किया हमला, कश्मीर में राष्ट्रगान के लिए हो रही है जबरदस्ती

जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर में लोग ‘बंदूक के बल’ पर राष्ट्रगान के लिए खड़े होने को मजबूर किए जा रहे हैं। उनका यह बयान तब आया जब मंगलवार (30 सितंबर) को TRC फुटबॉल मैदान में राष्ट्रगान के दौरान बैठे कुछ युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। महबूबा मुफ्ती का कहना है कि यह सरकार की विफलता है, जो लोगों को इस तरह की स्थिति में खड़ा कर रही है।

छात्र जीवन और राष्ट्रगान की यादें

महबूबा मुफ्ती ने अपने छात्र जीवन की याद दिलाते हुए कहा, “हमारे समय में राष्ट्रगान बजते ही लोग सम्मान में बिना किसी दबाव के खड़े हो जाते थे। कभी किसी को मजबूर नहीं किया जाता था।” उन्होंने बताया कि आज यही परंपरा टूट रही है और लोगों को जबरदस्ती राष्ट्रगान के लिए खड़ा किया जा रहा है।

फुटबॉल टूर्नामेंट में हिरासत की घटना

जानकारी के अनुसार, श्रीनगर के TRC फुटबॉल ग्राउंड में पुलिस शहीद फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल के दौरान कम से कम 15 दर्शकों को हिरासत में लिया गया। उनका आरोप था कि उन्होंने राष्ट्रगान के समय खड़ा नहीं हुआ। बंदियों के परिवारों ने बताया कि बैंड की धीमी आवाज और अस्पष्ट संकेतों की वजह से लोग राष्ट्रगान शुरू होने का पता नहीं कर पाए। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी उपस्थित थे।

कानून और सुरक्षा प्रोटोकॉल

राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का जानबूझकर अनादर करना अपराध है। हालांकि, अभी तक जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा जारी है।

सियासी हलचल और प्रतिक्रियाएं

महबूबा मुफ्ती के इस बयान से भाजपा और PDP के बीच सियासी तकरार बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि कश्मीर की वर्तमान सुरक्षा और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाता है। कई नागरिक इसे सरकार की असफलता और अत्यधिक कठोर प्रोटोकॉल का परिणाम मान रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती का बयान दर्शाता है कि राष्ट्रगान के प्रति जबरदस्ती और जनता पर दबाव डालना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकारी बयान इस मामले में दिशा तय करेंगे।

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