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  • भारत-चीन संबंधों पर चीनी राजदूत का संदेश: अतीत को पीछे छोड़ें, भविष्य पर फोकस करें

    भारत-चीन संबंधों पर चीनी राजदूत का संदेश: अतीत को पीछे छोड़ें, भविष्य पर फोकस करें

    भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया व्यापार नीतियों के बीच आया है, जहां ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। राजदूत ने कहा कि पुराने सीमा विवादों को अतीत में छोड़कर वर्तमान संबंधों को सुधारने और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। यह बयान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के 76वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में दिया गया, जहां उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

    75 वर्षों का सफर: उतार-चढ़ाव के बावजूद दोस्ताना आधार

    इस वर्ष भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि इतने लंबे समय में संबंधों में उतार-चढ़ाव तो आए, लेकिन मुख्य रूप से ये दोस्ताना सहयोग पर आधारित रहे हैं। उन्होंने उच्च स्तरीय संपर्कों में सुधार और लोगों के बीच बढ़ती समझ का जिक्र किया। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन में सफल बैठक ने संबंधों को नई ऊंचाई दी है। इस बैठक में दोनों नेताओं ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध के बाद उड़ानों, वीजा और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों को बहाल करने पर सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के सचिव अरुण कुमार चटर्जी, जो समारोह में मौजूद थे, ने इसकी पुष्टि की।

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    सीमा विवाद को अलग रखें: आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाएं

    शू फेइहोंग ने स्पष्ट कहा कि सीमा विवाद को अलग रखकर भी आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। चीन-भारत आर्थिक संबंधों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें मिलकर मजबूत बनाना दोनों देशों के हित में होगा। 2025 की पहली छमाही में चीन में 30,000 से अधिक विदेशी निवेश वाली कंपनियां स्थापित हुईं, जो 11.7% की वृद्धि दर्शाती है। राजदूत ने गरीबी उन्मूलन में चीन की सफलता का उदाहरण दिया, जहां पिछले दशक में 10 करोड़ ग्रामीण गरीबों को गरीबी से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को आपसी हितों का सम्मान करते हुए संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि छोटे मतभेद सहयोग में बाधा न बनें।

    शांति के सिद्धांत और वैश्विक दक्षिण की एकजुटता

    राजदूत ने शांति के पांच सिद्धांतों (पंचशील) को आगे बढ़ाने पर बल दिया, जिसमें किसी देश का दूसरे पर वर्चस्व या जबरदस्ती अस्वीकार्य है। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा के लिए भारत-चीन को एकजुट होने की वकालत की। विशेष रूप से, ट्रंप प्रशासन की “अनुचित और अविवेकपूर्ण” टैरिफ नीतियों के खिलाफ दोनों देशों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। शू फेइहोंग ने कहा कि टैरिफ और व्यापार युद्धों का कड़ा विरोध करना जरूरी है, क्योंकि ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने मानवता के साझा भविष्य के लिए सहयोग पर जोर दिया, जिसमें व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय मुद्दों पर संयुक्त प्रयास शामिल हैं।

    ट्रंप के लिए संदेश: टैरिफ युद्धों का विरोध

    यह बयान ट्रंप की नीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। चीन ने इसे “व्यापार युद्ध” करार देते हुए विरोध जताया है। राजदूत ने कहा कि शक्ति की राजनीति और टैरिफ का दौर समाप्त होना चाहिए। दोनों देशों को मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करना होगा, जैसे जलवायु परिवर्तन और आर्थिक स्थिरता। हाल ही में चीन ने भारतीय यात्रियों के लिए तिब्बत में कailash mansarovar यात्रा को फिर से शुरू किया, जिसमें 700 आधिकारिक और 20,000 निजी तीर्थयात्री शामिल हुए। चीनी दूतावास ने सितंबर तक 2.65 लाख वीजा जारी किए।

    स्थिरता और विकास की नई दिशा

    संक्षेप में, शू फेइहोंग का संदेश स्पष्ट है – अतीत के विवादों को पीछे छोड़कर भारत-चीन संबंधों को स्थिरता, शांति और विकास की नई दिशा दें। दोनों देशों के बीच सहयोग से न केवल द्विपक्षीय लाभ होगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब LAC पर तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं, और SCO जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ रहा है। भारत और चीन की साझेदारी वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • हिज़्बुल्लाह नेता कासिम ने सऊदी अरब से वार्ता और नया पृष्ठ खोलने का आह्वान किया

    हिज़्बुल्लाह नेता कासिम ने सऊदी अरब से वार्ता और नया पृष्ठ खोलने का आह्वान किया

    हिज़्बुल्लाह के डिप्टी चीफ नईम कासिम ने हाल ही में एक बड़े बयान में सऊदी अरब से वार्ता और नया पृष्ठ खोलने का आग्रह किया। कासिम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सऊदी अरब और अन्य देशों से साझा समझ और सहयोग की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिज़्बुल्लाह का हथियार केवल इस्राइल के खिलाफ है, न कि लेबनान, सऊदी अरब या किसी अन्य देश के खिलाफ।

    एकजुटता का संदेश

    कासिम ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए देश, सरकारें, जनता और रेज़िस्टेंस को एकजुट होना होगा। उनका कहना था कि साझा खतरे केवल तभी प्रभावी रूप से रोके जा सकते हैं जब सभी संबंधित पक्ष संयुक्त रूप से रणनीति बनाएं और सहयोग करें।

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    सऊदी अरब के साथ संबंध सुधार की अपील

    कासिम ने सऊदी अरब से अपील की कि वह हिज़्बुल्लाह और प्रतिरोध आंदोलन के साथ नए संवाद के लिए तैयार हो। उनका यह संकेत स्पष्ट करता है कि क्षेत्र में स्थिरता और तनाव कम करने के लिए राजनयिक और संवादात्मक प्रयासों की जरूरत है।

    हथियारों का उद्देश्य स्पष्ट

    हिज़्बुल्लाह के हथियारों का इस्तेमाल केवल इस्राइल के खिलाफ सुरक्षा के लिए है। कासिम ने यह दोहराया कि उनके पास हथियार होने का उद्देश्य किसी अन्य देश पर हमला करना नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षात्मक रणनीति के लिए है।

    एकता ही समाधान है

    कासिम ने कहा कि एकता ही इस साझा दुश्मन से लड़ने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने सभी क्षेत्रीय देशों और समुदायों को मिलकर साझा रणनीति, समझ और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, केवल एकजुट होकर ही क्षेत्रीय संघर्षों और खतरों से निपटा जा सकता है।

  • पीएम मोदी की विदेश यात्रा: साइप्रस  , कनाडा और क्रोएशिया दौरा

    पीएम मोदी की विदेश यात्रा: साइप्रस , कनाडा और क्रोएशिया दौरा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा शुरू की है। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान वह तीन देशों – साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया – का दौरा करेंगे। यह दौरा न केवल भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए बल्कि वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए भी अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी रविवार सुबह साइप्रस के लिए रवाना हुए, जहां 15-16 जून को वह राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के निमंत्रण पर आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद वह कनाडा में 16-17 जून को G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और अंत में क्रोएशिया का दौरा करेंगे।

    G7 शिखर सम्मेलन और ट्रंप से मुलाकात की संभावना

    कनाडा के कनानास्किस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की मौजूदगी भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है। इस दौरान उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने की प्रबल संभावना है। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने और युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की थी। हालांकि, भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। सूत्रों के अनुसार, यदि यह मुलाकात होती है, तो पीएम मोदी सीमा पार आतंकवाद और आतंकी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई पर जोर देंगे।

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    ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख

    मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर लक्षित कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के कठोर रुख को दुनिया के सामने रखा। पीएम मोदी की इस विदेश यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को और मजबूत करना है। G7 शिखर सम्मेलन में वह कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिसमें आतंकवाद के साथ-साथ व्यापार, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

    साइप्रस और क्रोएशिया दौरा: भारत की कूटनीति

    साइप्रस में पीएम मोदी की यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी। इसके बाद क्रोएशिया का दौरा भारत और यूरोपीय देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेना पीएम मोदी की लगातार छठी भागीदारी होगी, जो भारत की वैश्विक कूटनीति में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

  • चीनी उप विदेश मंत्री की भारत यात्रा: रिश्तों में सुधार की नई उम्मीद

    चीनी उप विदेश मंत्री की भारत यात्रा: रिश्तों में सुधार की नई उम्मीद

    भारत और चीन के बीच हाल के वर्षों में तनाव के बाद अब रिश्तों में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेईडोंग इस सप्ताह दो दिवसीय भारत दौरे पर आ सकते हैं। यह इस साल दोनों देशों के बीच दूसरी उच्च-स्तरीय यात्रा होगी। जनवरी में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बीजिंग का दौरा किया था, जहां दोनों पक्षों ने रिश्तों को सामान्य करने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जताई थी। सुन वेईडोंग का दौरा इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर, पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह यात्रा रिश्तों को और मजबूत करने की उम्मीद जगाती है।


    सुन वेईडोंग की भारत यात्रा का एजेंडा
    रिपोर्ट के अनुसार, सुन वेईडोंग गुरुवार को भारत पहुंच सकते हैं। इस दौरान उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश सचिव स्तर पर वार्ता होने की संभावना है। यह दौरा गलवान घाटी की घटना के बाद बिगड़े रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रूस में मुलाकात के बाद से दोनों देशों के बीच विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता फिर से शुरू हुई है। इस साल के अंत में चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी भारत आ सकते हैं, जो विशेष प्रतिनिधि वार्ता के अगले दौर की मेजबानी करेंगे।

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    ऑपरेशन सिंदूर और चीन का रवैया
    हाल के पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों के इस्तेमाल ने भारत-चीन रिश्तों पर सवाल उठाए हैं। चीन का पाकिस्तान समर्थक रवैया दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है। ऐसे में सुन वेईडोंग की यात्रा इस विश्वास को बहाल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए जनवरी में शुरू किए गए कदमों की समीक्षा भी इस दौरे का हिस्सा होगी।


    द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति
    जनवरी की वार्ता में दोनों देश कैलाश मानसरोवर यात्रा-2025 को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए थे, जो भारत की लंबे समय से मांग थी। इसके अलावा, सीमा पार नदियों पर सहयोग में भी प्रगति हुई है। हालांकि, सीधी हवाई सेवाओं को शुरू करने पर अभी काम चल रहा है, जिसे जल्द लागू करने की कोशिश हो रही है। ये कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के आवागमन को बढ़ावा देंगे, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बल मिलेगा।


    विश्वास बहाली की चुनौती
    भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, लेकिन पाकिस्तान के मुद्दे पर चीन का रवैया एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सुन वेईडोंग की यात्रा से यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश कितनी गंभीरता से विश्वास बहाली और सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हैं। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय रिश्तों, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों को बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने और विकास के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।