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  • उत्तर भारत में मॉनसून का कहर: 50 सालों में दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला सीजन

    उत्तर भारत में मॉनसून का कहर: 50 सालों में दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला सीजन

    उत्तर भारत में इस साल मॉनसून ने भारी तबाही मचाई है। 22 अगस्त से 4 सितंबर 2025 तक हुई भीषण बारिश ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस दौरान उत्तर भारत में 205.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 73.1 मिमी से तीन गुना अधिक है। यह पिछले 14 वर्षों में सबसे अधिक बारिश है और 1988 के बाद सबसे ज्यादा बरसात वाला मॉनसून साबित हो रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी नुकसान पहुंचाया है।

    पंजाब में दशक की सबसे भीषण बाढ़

    पंजाब में इस दशक की सबसे भयावह बाढ़ ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है। भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, जिससे लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। गांवों और शहरों में जलभराव की स्थिति ने जनजीवन को ठप कर दिया है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा।

    जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से तबाही

    जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मार्ग पर बादल फटने की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कों और रास्तों के क्षतिग्रस्त होने से तीर्थयात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूस्खलन और बाढ़ ने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को चरमरा दिया है, जिससे प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं।

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    दिल्ली में यमुना का प्रकोप

    दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। भारी बारिश के कारण नदी उफान पर है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सड़कों पर जलभराव और यातायात जाम ने राजधानी की रफ्तार को रोक दिया है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

    हिमाचल और उत्तराखंड में भूस्खलन की मार

    हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। सड़कें बंद होने और गांवों के अलग-थलग होने से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राहत कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है, और कई क्षेत्रों में बिजली व संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

    मॉनसून 2025: 37% अधिक बारिश

    आईएमडी के अनुसार, इस मॉनसून सीजन में अब तक उत्तर भारत में 691.7 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 37% अधिक है। अगर बाकी सीजन में सामान्य बारिश भी होती है, तो कुल बारिश 750 मिमी से अधिक हो सकती है। यह 1988 के रिकॉर्ड (813.5 मिमी) के बाद पिछले 50 वर्षों में दूसरा सबसे अधिक बारिश वाला सीजन होगा।

    क्यों हो रही इतनी बारिश?

    आईएमडी के चीफ मृत्युंजय मोहपात्रा के अनुसार, इस बारिश का कारण दो मौसमी सिस्टमों का एक साथ मिलना है। पश्चिमी विक्षोभ ने भूमध्य सागर से नमी युक्त हवाएं लाईं, जो मॉनसून की हवाओं के साथ मिल गईं। यह स्थिति 23 से 27 अगस्त और फिर 29 अगस्त से सितंबर तक देखी गई। इस असामान्य मौसमी गतिविधि ने भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं को बढ़ावा दिया, जैसा कि 2013 में केदारनाथ त्रासदी के दौरान हुआ था।

    क्षेत्रवार बारिश का प्रभाव

    पंजाब में पहले सप्ताह में 388% और दूसरे सप्ताह में 454% अधिक बारिश दर्ज की गई। हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ में 325%, हिमाचल प्रदेश में 314%, पश्चिम राजस्थान में 285%, जम्मू-कश्मीर में 240%, और उत्तराखंड में 190% अधिक बारिश हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश को छोड़कर, उत्तर-पश्चिम भारत के सभी हिस्सों में बारिश ने कहर बरपाया है।

  • हिंजेवाड़ी आईटी पार्क बना जलसमूह, बारिश ने बिगाड़ा हाल, वाहनों की लंबी कतार

    हिंजेवाड़ी आईटी पार्क बना जलसमूह, बारिश ने बिगाड़ा हाल, वाहनों की लंबी कतार

    शनिवार को पुणे के हिंजेवाड़ी आईटी पार्क में हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र की तस्वीर ही बदल दी। जो इलाका आमतौर पर ट्रैफिक और तकनीकी गतिविधियों से गुलजार रहता है, वह जलजमाव के कारण किसी वेव पूल जैसा नजर आने लगा। पानी से लबालब भरी सड़कों ने न केवल यातायात को बाधित किया, बल्कि कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी में डाल दिया।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए दृश्य

    हिंजेवाड़ी की भयावह स्थिति के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। एक वीडियो में देखा गया कि पुणे नगर निगम (PMC) की एसी बस आधे से ज्यादा पानी में डूबी हुई थी और धीमे-धीमे लहरों को चीरते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थी। वहीं दूसरे वीडियो में यात्री वाहनों और कारों को सड़क पर फंसा हुआ देखा गया, जिससे लंबा जाम लग गया।

    जल निकासी की समस्या और निर्माण कार्य जिम्मेदार

    राजीव गांधी इन्फोटेक पार्क, जो करीब 400 आईटी और आईटी-सक्षम कंपनियों का केंद्र है, पहले से ही जल निकासी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। इलाके में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट और अन्य निर्माण कार्यों ने मारुंजी और मांची पहाड़ियों से बहने वाले प्राकृतिक वर्षा जल के प्रवाह को बाधित कर दिया है। नालियों की समय पर सफाई न होना और जल निकासी की व्यवस्था का अभाव इस संकट को और गंभीर बना देता है।

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    सुप्रिया सुले का कड़ा बयान, एमआईडीसी से की कार्रवाई की मांग

    एनसीपी (सपा) की सांसद सुप्रिया सुले ने हिंजेवाड़ी की स्थिति पर नाराजगी जताई और एमआईडीसी (Maharashtra Industrial Development Corporation) से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने जलमग्न सड़कों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा:

    “हिंजवडी फेज 2 में रयान इंटरनेशनल स्कूल के पास भारी जलजमाव है। यह स्पष्ट नहीं है कि यहां जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था है या नहीं। समय पर नालियों की सफाई और दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं। एमआईडीसी को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।”

    क्या है आगे की राह?

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तत्काल समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले मानसून सीजन में स्थिति और बिगड़ सकती है। हिंजेवाड़ी जैसे संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में सस्टेनेबल ड्रेनेज सिस्टम, जल संचयन और समय पर नालियों की सफाई जैसे कदम उठाना जरूरी है।

  • मुंबई में बारिश का अलर्ट: मौसम शांत, लेकिन सतर्कता जरूरी

    मुंबई में बारिश का अलर्ट: मौसम शांत, लेकिन सतर्कता जरूरी

    मुंबई में बीती रात 26 मई को हुई तेज बारिश के बाद अब मौसम में कुछ राहत देखने को मिल रही है। अंधेरी, गोरेगांव, विले पार्ले, और सांताक्रूज़ जैसे इलाकों में रातभर मूसलाधार बारिश हुई थी, लेकिन अब इन क्षेत्रों में बारिश थम चुकी है। अंधेरी से बांद्रा के बीच फिलहाल बारिश की कोई खबर नहीं है, और अंधेरी तथा मिलन सबवे जैसे क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या भी नहीं देखी गई है। दक्षिण मुंबई के निचले इलाकों जैसे सायन, हिंदमाता, और किंग सर्कल में भी जमा हुआ पानी निकल चुका है, जिससे जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

    मौसम विभाग का येलो अलर्ट

    हालांकि, मौसम विभाग ने मुंबई के लिए आज येलो अलर्ट जारी किया है, जो यह संकेत देता है कि अभी पूरी तरह से खतरा टला नहीं है। अगले 3-4 घंटों में मुंबई, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी, और सिंधुदुर्ग जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को चेतावनी दी है कि वे 27 मई तक पूर्व-मध्य और दक्षिण अरब सागर, लक्षद्वीप, कोमोरिन क्षेत्र, और केरल-कर्नाटक-कोंकण-गोवा के तटीय इलाकों में समुद्र में न जाएं।

    महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में मौसम की स्थिति

    महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मौसम के बिगड़ने की आशंका जताई गई है। रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, सांगली, और सतारा जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जो भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को दर्शाता है। रायगढ़, पुणे, बीड, हिंगोली, नांदेड़, और परभणी में ऑरेंज अलर्ट है, जबकि पालघर और नासिक को छोड़कर बाकी महाराष्ट्र में येलो अलर्ट लागू है। कोंकण, मराठवाड़ा, और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

    परिवहन और जनजीवन पर प्रभाव

    मुंबई और इसके उपनगरीय इलाकों में सुबह से बारिश रुकी हुई है, जिसके चलते जलजमाव की स्थिति नहीं बनी है। हालांकि, ठाणे में सुबह हुई बारिश के कारण मध्य रेलवे की फास्ट लोकल ट्रेनें 20-25 मिनट की देरी से चल रही हैं। फिर भी, शहर में स्थिति नियंत्रण में है, और बारिश के कारण हुई असुविधाएं धीरे-धीरे कम हो रही हैं। सड़कों पर यातायात सामान्य रूप से चल रहा है, और निचले इलाकों में पानी निकासी के बाद कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।

    सतर्कता और सुझाव

    मौसम के अचानक बदलाव की संभावना को देखते हुए मुंबईवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखें और अनावश्यक यात्रा से बचें। घर से बाहर निकलने से पहले छाता या रेनकोट साथ रखें। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि बारिश दोबारा शुरू होने पर जलजमाव की स्थिति बन सकती है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    मुंबई में मौसम फिलहाल शांत है, लेकिन अगले कुछ घंटों में तेज बारिश की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!