बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा धमाका हुआ है।राजद से निष्कासित और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।तेज प्रताप ने कहा—मैं मौत को चुनूंगा, लेकिन RJD में वापस नहीं जाऊंगा।”यह बयान न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह उनके और उनके परिवार के बीच चल रही मौजूदा राजनीतिक दूरी को भी उजागर करता है।
नई पार्टी के साथ तेज प्रताप की नई चुनौती
RJD से बाहर होने के बाद तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के जरिए राजनीति में नई पारी शुरू कर दी है।
उनका कहना है कि बिहार की लड़ाई अब “जनता बनाम व्यवस्था” की है, न कि परिवार या दलों की वे दावा करते हैं कि वे अपनी नई पार्टी के साथ—बेरोजगारी, पलायन, किसानों की समस्याएं, युवा मुद्दे पर सीधी बात करेंगे और सड़क से विधानसभा तक आवाज़ उठाएंगे।
पुराने रिश्तों से ऊपर जनता तेज प्रताप का संदेश
तेज प्रताप यादव ने साफ कहा कि उनके लिए “जनता की आवाज़ ही सच” है।उन्होंने यह भी कहा कि वे पुराने रिश्तों, पार्टी के दबाव या पारिवारिक राजनीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं।उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर की गई रणनीति है, जिससे वे अपनी नई पार्टी को मजबूत आधार देना चाहते हैं।
बिहार की जनता की नजर अब तेज प्रताप पर
तेज प्रताप यादव का यह बयान सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक “नई चुनौती” के संकेत हैं।अब जनता और विपक्ष दोनों यह जानने के इंतज़ार में हैं कि उनकी अगली रणनीति क्या होगी और उनकी नई पार्टी कितना जमीन पर प्रभाव दिखा पाएगी।सियासी अखाड़े में यह नया मोड़ आने वाले चुनावों को और दिलचस्प बनाता है।
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