बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर जारी अटकलों पर विराम लग गया है। कांग्रेस के युवा नेता और राहुल गांधी के करीबी कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार होंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में इस मुद्दे पर कोई विवाद या असमंजस नहीं है।
कन्हैया कुमार का यह बयान खास मायने रखता है, क्योंकि अतीत में तेजस्वी और कन्हैया के संबंधों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाएं रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब कन्हैया ने वाम दल के टिकट पर बेगूसराय से चुनाव लड़ा था, तब तेजस्वी ने उनका खुलकर समर्थन नहीं किया था। अब उसी कन्हैया ने आगे आकर तेजस्वी को समर्थन देकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है।
कन्हैया ने कहा कि महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है, और स्वाभाविक तौर पर उसी का नेता मुख्यमंत्री पद का चेहरा होगा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह जनता और संख्याबल तय करेगा। तेजस्वी यादव के पास सबसे बड़ा समर्थन होगा और वही मुख्यमंत्री बनेंगे।”
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‘चेहरे की नहीं, मुद्दों की राजनीति जरूरी’
कन्हैया ने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए चेहरे को लेकर बहस करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में बेरोजगारी, शिक्षा, पलायन, अपराध, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर महागठबंधन चुनाव लड़ेगा।
कन्हैया ने ‘सीनियर-जूनियर’ जैसे तमगों को खारिज करते हुए कहा कि “महागठबंधन में हर घटक दल महत्वपूर्ण है, जैसे गाड़ी में ब्रेक, क्लच और मिरर सभी जरूरी होते हैं।” कांग्रेस, वाम दल और आरजेडी सभी एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और 243 सीटों पर मिलकर रणनीति बनाएंगे।
बीजेपी पर भी साधा निशाना
कन्हैया ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी नीतीश कुमार को हटाकर अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। उन्होंने यह भी पूछा कि “जब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा था कि नीतीश जी के लिए सभी दरवाजे बंद हैं, तो क्या वे ब्लूटूथ से एनडीए में डाउनलोड हो गए?”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा बिहार में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों को उठाने से बच रही है, क्योंकि जनता सेना या राष्ट्रवाद पर राजनीति पसंद नहीं करती।

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