Thakurdwara Assembly Seat पर SIR के बाद बदले मतदाता आंकड़े, सपा-बीजेपी में फिर कड़ी टक्कर?
Thakurdwara Assembly Seat
Thakurdwara Assembly Seat: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है। यह क्षेत्र कोचिंग हब के रूप में भी जाना जाता है, जहां दूर-दराज से छात्र स्टेनोग्राफी सीखने पहुंचते हैं। वहीं, खेती-किसानी यहां के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है। कभी ठाकुरद्वारा सीट को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समाजवादी पार्टी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है। फिलहाल इस सीट से सपा के नवाब जान विधायक हैं और आने वाले चुनावों से पहले यहां का सियासी गणित चर्चा का विषय बना हुआ है।
बीजेपी के गढ़ से सपा के कब्जे तक का सफर
ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर 1991 से 2002 तक लगातार चार बार बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2012 में भी बीजेपी को यहां सफलता मिली। हालांकि, 2014 के विधानसभा उपचुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर बदल गई और समाजवादी पार्टी लगातार मजबूत होती चली गई। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के नवाब जान ने बीजेपी प्रत्याशी अजय प्रताप सिंह को 19,684 वोटों से हराया था। सपा को 1,34,391 वोट मिले, जबकि बीजेपी के खाते में 1,14,707 वोट आए थे।
SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में कमी
2026 में SIR के बाद ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट पर कुल 3,62,413 मतदाता बचे हैं। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव के समय इस सीट पर 3,79,040 मतदाता दर्ज थे। यानी SIR प्रक्रिया के बाद करीब 16,627 मतदाताओं की कमी सामने आई है। मतदाता सूची में हुए इस बदलाव का असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
2024 लोकसभा चुनाव में भी सपा रही आगे
2024 के लोकसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा विधानसभा क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी को बढ़त मिली थी। सपा को 1,24,602 वोट, बीजेपी को 1,11,871 और बसपा को 18,998 वोट मिले थे। सपा करीब 13 हजार वोटों से बीजेपी से आगे रही। हालांकि, 2022 की तुलना में दोनों प्रमुख दलों के वोटों में कमी दर्ज की गई।
जातीय समीकरण तय करेंगे चुनावी दिशा
ठाकुरद्वारा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अनुमानित रूप से करीब 1.5 लाख बताई जाती है। इसके अलावा क्षत्रिय, एससी, सैनी, जाट, कश्यप, यादव और ब्राह्मण मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीजेपी के लिए क्षत्रिय, जाट, सैनी और अन्य ओबीसी वर्गों का समर्थन मजबूत समीकरण बनाता है, जबकि सपा मुस्लिम मतदाताओं के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश करती है। ऐसे में आने वाले चुनाव में ठाकुरद्वारा सीट पर फिर सपा और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
