नवादा, बिहार: बिहार की सियासत में इन दिनों एक आवाज़ तेजी से गूंज रही है प्रशांत किशोर कीजन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से जननेता बने प्रशांत किशोर ने नवादा की जनसभा में सत्ताधारी दलों पर सीधा हमला बोला।
बस्ता छीना, बोरा थमा दिया
प्रशांत किशोर ने कहा पिछले 35 सालों में लालू, नीतीश और बीजेपी ने मिलकर बच्चों की पीठ से स्कूल का बस्ता छीन लिया… और उसकी जगह मजदूरी का बोरा पकड़ा दिया।ये एक बयान नहीं, बिहार की हकीकत की तस्वीर है — जहां आज भी लाखों बच्चे या तो स्कूल छोड़ चुके हैं, या पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी करने को मजबूर हैं।
क्या आपने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए वोट दिया?
उन्होंने जनता से सीधा सवाल पूछा आपने जाति, धर्म, मंदिर, सिलेंडर, मुफ्त अनाज के नाम पर वोट तो दिए…
लेकिन क्या कभी बच्चों की पढ़ाई और नौकरी के नाम पर वोट दिया?प्रशांत किशोर का मानना है कि अगर बिहार को वाकई बदलना है, तो अब वोटिंग की सोच भी बदलनी होगी।
शिक्षा, खेती और पूंजी तीन बंद रास्ते
उन्होंने गरीबी से बाहर निकलने के तीन रास्तों की बात की:
- शिक्षा
- खेती
- पूंजी (रोज़गार, उद्यमिता)
लेकिन कहा कि इन तीनों को बिहार की राजनीति ने जानबूझकर बंद कर दिया है, ताकि जनता मुद्दों पर नहीं, भावनाओं पर वोट करती रहे।
अब वक्त है बस्ते पर वोट देने का
प्रशांत किशोर ने जनसभा में कहा अगर बिहार को बदलना है, तो वोट दीजिए स्कूल के बस्ते के नाम पर। यही जन सुराज का चुनाव चिन्ह है और यही विकास का रास्ता
- जाति नहीं, योग्यता की राजनीति हो
- धर्म नहीं, रोज़गार की मांग हो
- मुफ्त अनाज नहीं, सम्मानजनक जीवन की लड़ाई हो
बिहार को अब चाहिए एक नई सोच, एक नया सुराज
शायद यही समय है जब बिहार को जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति से बाहर निकलकर जनता की असली ज़रूरतों शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार की ओर मुड़ना होगा।क्योंकि अगर आज भी आपने बच्चों के भविष्य के लिए वोट नहीं दिया तो आने वाला कल भी अंधेरे में होगा।

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