January 14, 2026

लद्दाख की आग सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी और एक आंदोलन का सच देशभक्ति या देशद्रोह?

लद्दाख, जिसे अक्सर हिमालय की शांत वादियों, नीले आसमान और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है, आजकल उबाल पर है। इस उबाल का केंद्र हैं सोनम वांगचुक वही व्यक्ति, जिन्होंने शिक्षा में नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी दुनिया में ख्याति पाई। लेकिन अब वही वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ़्तार हैं, और उन पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं। उनका SECMOL नामक संस्थान लद्दाख के युवाओं को व्यावहारिक शिक्षा देने में दशकों से अग्रणी रहा है। बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ का किरदार ‘फुंसुख वांगडू’ उन्हीं से प्रेरित था। वे ग्लेशियर संरचना, सोलर एनर्जी और टिकाऊ विकास पर कई प्रयोग कर चुके हैं, और उन्हें कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

NSA के तहत गिरफ़्तारी – मामला क्या है?

26 सितंबर को वांगचुक को NSA के तहत गिरफ़्तार किया गया। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने लद्दाख में हिंसा को प्रेरित किया और वे एक “साजिशकर्ता” हैं। डीजीपी एस.डी. सिंह जामवाल ने यहां तक कहा कि वांगचुक के पाकिस्तान से संपर्क हैं और वे एक पाकिस्तानी Person of Interest” के साथ संवाद में थे। इस बयान ने पूरे देश में हलचल मचा दी है।

आंदोलन के पीछे की मांगें क्या हैं?

लद्दाख के लोगों की मांगें बहुत स्पष्ट हैं:

  • संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा
  • नौकरियों और संसाधनों में स्थानीयों को आरक्षण
  • पर्यावरणीय संरक्षण और जनजातीय पहचान की रक्षा
  • स्थानीय प्रशासन में भागीदारी और अधिकार

इन मांगों को लेकर वांगचुक ने कई शांतिपूर्ण आंदोलन किए। मार्च में उन्होंने पर्यावरण को लेकर ‘क्लाइमेट फास्ट’ भी किया था, जिसे पूरे देश में सराहा गया।

राजनीतिक साजिश या लोकतांत्रिक अधिकार?

वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि यह गिरफ़्तारी राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। उनका FCRA लाइसेंस रद्द करना, NGO पर दबाव बनाना, और उन्हें देशविरोधी ठहराना – ये सब लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने के प्रयास लगते हैं।सरकार का मानना है कि लद्दाख में चल रही वार्ताओं को अस्थिर करने के लिए ये विरोध प्रदर्शन “बाहरी ताकतों” द्वारा संचालित हैं। लेकिन ज़मीन पर लोग कह रहे हैं कि यह आंदोलन पूरी तरह स्थानीय है – यह उनके अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है।

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