नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार आज लोकसभा में एक बड़ा और अहम विधेयक पेश करने जा रही है। यह बिल सीधे तौर पर देश की ग्रामीण आबादी, मज़दूरों और किसानों से जुड़ा हुआ है। सरकार मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की जगह एक नया कानून लाने जा रही है, जिसका नाम रखा गया है । विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण बिल 2025”, जिसे शॉर्ट फॉर्म में “वीबीजी राम जी बिल” कहा जा रहा है।सरकार का दावा है कि यह नया बिल ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को और मज़बूत करेगा, लेकिन इसके नाम और प्रावधानों को लेकर देश में ज़बरदस्त सियासी घमासान मचा हुआ है।
क्या है वीबीजी राम जी बिल 2025?
सरकार के मुताबिक, यह नया कानून मनरेगा की जगह लेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की गारंटी को और बेहतर बनाएगा। सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों और भुगतान व्यवस्था को लेकर किया गया है।
नए बिल की प्रमुख विशेषताएं:
- 125 दिन रोजगार की गारंटी
- मनरेगा में: 100 दिन
- नए बिल में: 125 दिन
- हर हफ्ते मजदूरी भुगतान
- मनरेगा में: 15 दिनों के भीतर भुगतान
- नए कानून में: साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान
- राज्यों की हिस्सेदारी तय
- पहले: पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी
- अब: 10% से 40% तक खर्च राज्यों को भी वहन करना होगा
- खेती के मौसम में रोजगार पर रोक
- बुवाई और कटाई के समय 60 दिनों तक रोजगार नहीं मिलेगा, ताकि कृषि कार्यों के लिए मज़दूरों की उपलब्धता बनी रहे सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती और रोजगार—तीनों को संतुलन मिलेगा।
क्यों हो रहा है सियासी विरोध?
इस बिल को लेकर सबसे बड़ा विवाद महात्मा गांधी के नाम को हटाने पर खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर गांधी जी के नाम और विरासत को खत्म करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को नाम बदलो, विरासत मिटाओ” की राजनीति बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ी सामाजिक गारंटी थी।कांग्रेस का साफ कहना है यह सिर्फ रोजगार का सवाल नहीं है, यह गांधी जी की पहचान और सोच को मिटाने की कोशिश है।
अखिलेश यादव का हमला नाम बदलने से कुछ नहीं होगा
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ नाम बदलकर दूसरों के काम को अपना बताने की आदत में है। मनरेगा हो या वीबीजी राम जी, असली सवाल ज़मीन पर रोजगार का है। अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि खेती के मौसम में 60 दिनों तक रोजगार न देने से गरीब मज़दूर क्या करेगा?
मनरेगा बनाम वीबीजी राम जी सीधी तुलना
| मुद्दा | मनरेगा | वीबीजी राम जी बिल |
|---|---|---|
| रोजगार गारंटी | 100 दिन | 125 दिन |
| मजदूरी भुगतान | 15 दिन में | हर हफ्ते |
| खर्च की जिम्मेदारी | सिर्फ केंद्र | केंद्र + राज्य |
| खेती के मौसम में रोजगार | उपलब्ध | 60 दिन बंद |
सरकार का पक्ष क्या कहता है?
सरकार का तर्क है कि यह बिल “विकसित भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखकर लाया गया है। केंद्र का कहना है कि:
- रोजगार के दिन बढ़ाए गए हैं
- भुगतान व्यवस्था तेज़ की गई है
- राज्यों की भागीदारी से जवाबदेही बढ़ेगी
- सरकार इसे मनरेगा का उन्नत संस्करण बता रही है।

संबंधित पोस्ट
India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ओवैसी का हमला
India-US Trade Deal पर राहुल गाँधी का मोदी पर पलटवार
‘Board of Peace’: शहबाज शरीफ ने ट्रंप से बढ़ाई नजदीकियां, दुनिया भर में चर्चा का विषय