अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना दिया। ट्रंप ने कहा कि अगर उनके पास टैरिफ लगाने की ताकत न होती, तो दुनिया में सात में से चार बड़े युद्ध पहले ही शुरू हो चुके होते। उन्होंने भारत–पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देश युद्ध के लिए तैयार थे, लेकिन उनके टैरिफ नीति ने स्थिति को नियंत्रित किया और उन्हें ‘पीसकीपर’ साबित किया।
टैरिफ और आर्थिक प्रभाव
टैरिफ न केवल उनका आर्थिक हथियार रहा बल्कि इससे अरबों डॉलर की कमाई भी हुई। उनका दावा है कि आर्थिक नीति और टैरिफ की रणनीति ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोका और कई देशों के बीच संतुलन बनाए रखा। यह बयान उनके समर्थकों के बीच जोरदार चर्चा का विषय बन गया है, जबकि आलोचक इसे केवल राजनीतिक नाटक बता रहे हैं।
भारत–पाकिस्तान संबंधों पर असर
ट्रंप ने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि टैरिफ की नीति और कूटनीतिक दबाव ने दोनों देशों के बीच किसी भी बड़े युद्ध को रोकने में मदद की। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आर्थिक उपाय और नीति भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति का महत्वपूर्ण उपकरण बन सकते हैं।
राजनीति और ‘Tariff King’
ट्रंप ने अपने इस दावे से खुद को ‘Tariff King’ के रूप में पेश किया। सवाल यह उठता है कि क्या ट्रंप वास्तव में एक आर्थिक और कूटनीतिक रणनीतिकार हैं, या यह केवल चुनाव और राजनीति में एक नया कार्ड है। उनके समर्थक इसे उनके वैश्विक नेतृत्व का प्रमाण मानते हैं, जबकि आलोचक इसे मीडिया और राजनीतिक प्रचार का हिस्सा मानते हैं।
दुनिया भर में राजनीति, कूटनीति और आर्थिक नीति पर बहस का विषय बन गया है। चाहे यह तथ्यात्मक हो या राजनीतिक रणनीति, यह स्पष्ट है कि उनके शब्दों ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। टैरिफ, आर्थिक दबाव और युद्ध रोकने की रणनीति ने ट्रंप की छवि को एक प्रभावशाली नेता के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसे कई लोग ‘पीसकीपर’ मानते हैं।

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