भारत अक्टूबर 14 से 16 तक नई दिल्ली में United Nations Troop Contributing Countries (TCC) चीफ्स का कॉन्क्लेव आयोजित करेगा। इस साल पाकिस्तान और चीन को शामिल नहीं किया गया है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों को आमंत्रित किया गया है। जानिए इस सम्मेलन का महत्व और भारत की रणनीति।
TCC कॉन्क्लेव का महत्व और उद्देश्य
भारत अक्टूबर 14 से 16 तक नई दिल्ली में United Nations TCC चीफ्स कॉन्क्लेव का आयोजन करेगा। यह सम्मेलन उन सभी देशों के सेना प्रमुखों और प्रतिनिधियों को आमंत्रित करता है, जो संयुक्त राष्ट्र की शांति अभियानों में सेना भेजते हैं।
इस सम्मेलन का उद्देश्य शांति सैनिकों के अनुभव साझा करना, रणनीतियों पर चर्चा करना और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कॉन्क्लेव से देशों के बीच तालमेल और सहयोग बढ़ता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत की रणनीति: पाकिस्तान और चीन को आमंत्रित नहीं
सूत्रों के अनुसार, इस साल भारत ने खास रणनीति अपनाई है। पाकिस्तान और चीन को इस कॉन्क्लेव में आमंत्रित नहीं किया गया है, जबकि अन्य पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका सहित कई देशों को आमंत्रण भेजा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इससे यह संदेश जाता है कि भारत शांति और सहयोग का पक्षधर है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को भी सर्वोपरि रखता है।
सम्मेलन की तैयारी और भारत की वैश्विक भूमिका
नई दिल्ली में इस कॉन्क्लेव की तैयारी पूरी तरह से की जा रही है। सुरक्षा, प्रोटोकॉल और मेहमानों के स्वागत का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह आयोजन न केवल शांति सैनिकों के बीच तालमेल और अनुभव साझा करने का अवसर है, बल्कि भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और शांति के प्रति प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।
यह कॉन्क्लेव वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने का संदेश देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की डिप्लोमेसी और सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शांति, सहयोग और वैश्विक संदेश
दोस्तों, यह कॉन्क्लेव सिर्फ सैन्य और रणनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं है। यह विश्व स्तर पर शांति, सहयोग और सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। भारत इस पहल के जरिए यह संदेश देता है कि वह वैश्विक शांति अभियानों में सक्रिय और जिम्मेदार योगदानकर्ता है।
शांति सैनिकों के अनुभव साझा करने, रणनीतियों का आदान-प्रदान करने और वैश्विक शांति को मजबूत करने की यह पहल, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता को भी मजबूती देती है।

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