Uttarakhand Flash Flood: नीती घाटी में बादल फटने से टूटा पुल, 15 से ज्यादा गांवों का संपर्क कटा
Uttarakhand Flash Flood
Uttarakhand Flash Flood: उत्तराखंड के चमोली जिले में बादल फटने के बाद आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। 10 अगस्त को तमक इलाके में अचानक आई बाढ़ के तेज बहाव ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा बनाया गया वैली ब्रिज क्षतिग्रस्त कर दिया और पुल का एक हिस्सा बह गया। तेज बहाव अपने साथ वाहन और मलबा भी बहा ले गया। इस प्राकृतिक आपदा के बाद नीती घाटी और सीमावर्ती क्षेत्र का मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया है। स्थानीय स्तर पर हालात को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
15 से ज्यादा गांवों का संपर्क प्रभावित, तलाश अभियान जारी
फ्लैश फ्लड के कारण नीती घाटी के 15 से अधिक गांवों और सीमा क्षेत्र का मुख्यालय से संपर्क कट गया है। हादसे के बाद एक BRO चालक और वाहन के लापता होने की सूचना सामने आई है। उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है। SDRF और NDRF की टीमें घटनास्थल के आसपास खोज एवं राहत अभियान में जुटी हैं। लगातार बारिश और पहाड़ी इलाकों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्य में भी चुनौती बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से नदियों और संवेदनशील रास्तों से दूर रहने की अपील की है।
नदी-नालों के पास जाने से बचने की अपील
उत्तराखंड में मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। चमोली की नीती घाटी में पुल टूटने के बाद प्रशासन ने लोगों को नदी और नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। तेज बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करना भी जोखिम भरा हो सकता है। फ्लैश फ्लड के दौरान पानी का बहाव बेहद तेजी से बढ़ सकता है, जिससे कुछ ही समय में सड़क, पुल और अन्य संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।
रवीश कुमार ने उठाए पहाड़ी विकास मॉडल पर सवाल
इस घटना के बीच पत्रकार रवीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो शेयर करते हुए पहाड़ी इलाकों में विकास और बसावट को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “आप लोग कब पहाड़ों की हालत पर लिख बोल रहे हैं, हर साल बारिश के समय ऐसी घटना हो जाती है। हिमाचल और उत्तराखंड में। फिर भी इन जगहों में विकास और बसावट को लेकर कोई बदलाव नहीं है।” रवीश कुमार की यह टिप्पणी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान होने वाली आपदाओं के संदर्भ में सामने आई है। उन्होंने बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में विकास के तौर-तरीकों पर चर्चा की जरूरत बताई।
मानसून में पहाड़ों पर बढ़ता खतरा
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है। नीती घाटी में पुल टूटने की घटना ने एक बार फिर दुर्गम इलाकों की कनेक्टिविटी और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को सामने ला दिया है। फिलहाल SDRF और NDRF की टीमें लापता BRO चालक की तलाश में जुटी हैं और प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। वहीं, इस घटना के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित विकास और बसावट की रणनीति को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
