भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया में करीब 58.20 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की पहचान की गई है, जिससे राज्य की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव आया है। यह कदम 2026 विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हटाए गए नामों का ब्रेकअप
ECI के डेटा के अनुसार, कुल 58,20,898 नाम हटाने के लिए चिह्नित किए गए हैं:
- मृत मतदाता: लगभग 24,16,852
- स्थायी रूप से स्थानांतरित या माइग्रेट: 19,88,076
- लापता या अनुपस्थित: 12,20,038
- डुप्लीकेट, फर्जी या गलत एंट्री: 1,38,328
- अन्य कारण: 57,604
ये नाम मुख्य रूप से उन फॉर्म्स से जुड़े हैं जो ‘अनकलेक्टेड’ पाए गए, क्योंकि मतदाता पते पर मौजूद नहीं थे या अन्य कारणों से सत्यापन नहीं हो सका।
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अगला चरण: दावे और आपत्तियां
ड्राफ्ट सूची जारी होने के साथ गणना चरण पूरा हो गया है। अब दावे, आपत्तियां और सुनवाई का महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा, जो फरवरी 2026 तक चलेगा। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे फॉर्म 6 में सहायक दस्तावेजों के साथ दावा जमा कर सकते हैं। दावे जमा करने की अवधि 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक है। नाम जांचने के लिए ceowestbengal.gov.in या voters.eci.gov.in पर जाएं।
विवाद और अन्य राज्य
SIR प्रक्रिया विवादास्पद रही, जिसमें BLOs के विरोध और राजनीतिक आरोप शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इसे चुनावी साजिश बताया, जबकि ECI ने इसे पारदर्शी प्रक्रिया करार दिया। यह अभ्यास पश्चिम बंगाल के अलावा राजस्थान, गोवा, गुजरात, केरल आदि राज्यों में भी चल रहा है।

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