लोकसभा में वक़्फ़ (संशोधन) बिल को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने इस बिल पर सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने बीजेपी सरकार पर अल्पसंख्यकों को बदनाम करने, उनके अधिकार छीनने और संविधान पर हमला करने का आरोप लगाया। गोगोई ने इसे सरकार की ‘4D रणनीति’ यानी डाइल्यूट (कमज़ोर करना), डिफेम (बदनाम करना), डिवाइड (बाँटना) और डिसेन्फ्रेंचाइज़ (अधिकार छीनना) करार दिया।
विपक्ष ने वक़्फ़ बिल को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह एक संविधान विरोधी कदम है, जो भारत की धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना पर प्रहार करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस कानून के जरिए मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक अधिकारों को कमज़ोर करना चाहती है।
उन्होंने लोकसभा में कहा:
“बीजेपी सरकार का एजेंडा स्पष्ट है – पहले वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर भ्रम फैलाओ, फिर अल्पसंख्यकों को बदनाम करो, समाज को बांटो और आखिर में उनके अधिकार ही छीन लो। यह वही ‘4D’ रणनीति है, जिससे सरकार लगातार देश की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल कर रही है।”
विवादित प्रावधान: पाँच साल तक धर्म का पालन करने की शर्त?
गौरव गोगोई ने बिल में एक विशेष विवादास्पद प्रावधान पर भी कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति वक़्फ़ संपत्ति को दान तभी कर सकता है, जब वह कम से कम पाँच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो।
उन्होंने सवाल उठाया:
“अब सरकार यह तय करेगी कि कौन सच्चा मुसलमान है और कौन नहीं? क्या सरकार अब धार्मिक प्रमाणपत्र जारी करेगी? यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है, जो संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है।”
गोगोई ने यह भी कहा कि सरकार धर्म के नाम पर समाज में विभाजन पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बिल मुस्लिम समुदाय को संदेह के घेरे में डालने और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को नियंत्रित करने का प्रयास है।
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सरकार की सफाई: पारदर्शिता और सुधार का दावा
सरकार का कहना है कि यह बिल वक़्फ़ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में कहा कि देशभर में 8 लाख से अधिक वक़्फ़ संपत्तियाँ हैं, लेकिन उनका सही उपयोग नहीं हो रहा है। सरकार चाहती है कि इन संपत्तियों का सही प्रबंधन हो और इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाए।
बीजेपी का तर्क है कि:
- यह बिल किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है।
- वक़्फ़ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है।
- यह सिर्फ प्रशासनिक सुधार के लिए लाया गया कानून है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करना है।
विपक्ष के तर्क: क्या यह असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है?
गौरव गोगोई और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बिल देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक राजनीतिक चाल है। उन्होंने कहा कि सरकार बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक संकट और सीमा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है और धर्म आधारित कानूनों को आगे बढ़ाकर समाज को बांटने का काम कर रही है।
गौरव गोगोई ने संसद में सवाल उठाया:
“जब चीन हमारी सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा है, जब अर्थव्यवस्था संकट में है, तब सरकार वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर इतनी चिंतित क्यों है? क्या यह असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास नहीं है?”
क्या यह बिल संघीय ढांचे के खिलाफ है?
गौरव गोगोई ने यह भी तर्क दिया कि वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े कानून राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, और केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे का उल्लंघन करता है और राज्यों के अधिकारों का हनन करता है।
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