हाल ही में मेरठ के सौरभ हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हर दिन इस मामले से जुड़े नए राज सामने आ रहे हैं, जो बिखरते परिवारों और गिरते सामाजिक मूल्यों की एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं। लेकिन इस घटना के साथ एक और बात उभरकर आई है—ब्लू ड्रम में लाश छिपाने का पैटर्न!
बेंगलुरु, दिल्ली और अब मेरठ में ब्लू ड्रम का इस्तेमाल कर शवों को छिपाने के मामले सामने आ चुके हैं। यह ट्रेंड न सिर्फ खौफनाक है बल्कि समाज की बदलती मानसिकता और रिश्तों के टूटते विश्वास को भी दर्शाता है। अब सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारतीय पुरुषों में ब्लू ड्रम का डर बैठ गया है?
ब्लू ड्रम हत्याकांड: एक खौफनाक ट्रेंड?
हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अपराधियों ने हत्या के बाद शव को ब्लू ड्रम में छिपाने का तरीका अपनाया।
1. मेरठ का सौरभ हत्याकांड
मेरठ में सौरभ नाम के युवक की हत्या कर उसकी लाश को ब्लू ड्रम में छिपाया गया। इस वारदात ने पूरे शहर को दहला दिया। जांच में पता चला कि हत्या के पीछे रिश्तों में अविश्वास और धोखा प्रमुख कारण थे।
2. बेंगलुरु का ब्लू ड्रम मर्डर केस
बेंगलुरु में एक पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर शव को ब्लू ड्रम में छिपा दिया था। बाद में उसने खुद पुलिस को फोन कर सरेंडर कर दिया। यह मामला सामने आने के बाद लोगों में इस नए क्राइम पैटर्न को लेकर डर बैठने लगा।
3. दिल्ली में ब्लू ड्रम से मिला शव
दिल्ली में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां ब्लू ड्रम के अंदर से एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ। जांच में पता चला कि हत्या आपसी रंजिश के कारण की गई थी।
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इन तीनों मामलों को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि ब्लू ड्रम अब केवल पानी या केमिकल स्टोरेज के लिए नहीं बल्कि हत्या छिपाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर “ब्लू ड्रम फोबिया”
इस खौफनाक ट्रेंड के चलते सोशल मीडिया पर #BlueDrumFear ट्रेंड करने लगा। कई लोग इसे नए जमाने का क्राइम पैटर्न बता रहे हैं, तो कुछ इसे मजाकिया अंदाज में लेते हुए मीम्स बना रहे हैं।
- “अब तो घर में ब्लू ड्रम रखना ही बंद कर दूं!”
- “अगर पत्नी ब्लू ड्रम खरीदने की बात करे, तो तुरंत सतर्क हो जाओ!”
- “ब्लू ड्रम का सस्ता मिलना भी अब डरावना लगने लगा है!”
इस तरह के कमेंट्स यह दिखाते हैं कि लोगों में इस ट्रेंड को लेकर हल्का डर जरूर बैठने लगा है।
क्या रिश्तों में अविश्वास बढ़ रहा है?
इन मामलों में एक बात कॉमन है—विश्वासघात और गुस्से की वजह से हत्या। पहले जहां ऐसे मामलों में सीधे हत्या कर शव ठिकाने लगाने के अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे, वहीं अब ब्लू ड्रम को इस्तेमाल करने का एक ट्रेंड बनता जा रहा है।
- रिश्तों में अविश्वास बढ़ रहा है—पार्टनर के धोखे या झगड़े के कारण लोग क्राइम करने की हद तक चले जाते हैं।
- हत्या के तरीके बदल रहे हैं—अब अपराधी सोशल मीडिया और इंटरनेट से प्रेरणा लेकर अलग-अलग तरीकों को अपनाने लगे हैं।
- समाज में नैतिक पतन बढ़ रहा है—संयम और धैर्य की कमी के कारण लोग जल्दबाजी में घातक कदम उठा रहे हैं।
क्या ब्लू ड्रम अब डर का प्रतीक बन चुका है?
पहले ब्लू ड्रम का उपयोग केवल पानी, केमिकल या अन्य तरल पदार्थों को स्टोर करने के लिए किया जाता था। लेकिन अब हत्या के मामलों में इसके इस्तेमाल ने इसे डर और खौफ का प्रतीक बना दिया है।
- कई लोग अब ब्लू ड्रम खरीदने से कतराने लगे हैं।
- दुकानदार भी इसे बेचते समय मजाक में कहते हैं—भाई, सही काम के लिए खरीद रहे हो ना?
- कई जगहों पर लोग अब इसका उपयोग कम करने लगे हैं।
समाज को क्या करना चाहिए?
यह जरूरी है कि हम रिश्तों को मजबूत बनाएं और ऐसी मानसिकता से बचें जो हमें हिंसा की ओर ले जाए।
- संवाद को बढ़ावा दें—रिश्तों में समस्याएं होने पर बात करें, न कि हिंसा का रास्ता चुनें।
- गुस्से पर नियंत्रण रखें—क्रोध के समय लिए गए फैसले हमेशा नुकसानदायक होते हैं।
- कानूनी जागरूकता बढ़ाएं—ऐसे अपराधों की सजा को लेकर लोगों को जागरूक करना जरूरी है।
निष्कर्ष
मेरठ का सौरभ हत्याकांड और ब्लू ड्रम में शव छिपाने की घटनाएं समाज में बढ़ती हिंसा और अविश्वास को दर्शाती हैं। अब यह ब्लू ड्रम फोबिया सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। जरूरी है कि हम अपने रिश्तों को बेहतर बनाने पर ध्यान दें और समाज में अपराध के बढ़ते ट्रेंड को रोकने की दिशा में काम करें।
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