नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र की बहाली की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन भड़क उठा है। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन ने राजधानी काठमांडू में गंभीर रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आगजनी, दुकानों में लूटपाट और सरकारी दफ्तरों पर हमले किए, जिससे शहर में तनाव फैल गया।
क्यों हो रहा है नेपाल में विरोध?
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग नेपाल में राजशाही की वापसी है। 2008 में नेपाल को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद राजशाही खत्म कर दी गई। लेकिन अब, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थक फिर से संवैधानिक राजतंत्र लाने की मांग कर रहे हैं।
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हिंसा में दो लोगों की मौत, कई घायल
शुक्रवार को काठमांडू में जब प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पथराव और झड़पों के दौरान एक टीवी कैमरामैन और एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, जबकि कम से कम 112 लोग घायल हो गए।
हिंसा पर काबू पाने के लिए सेना तैनात
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार ने सेना को तैनात किया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और इलाके में कर्फ्यू जैसी सख्ती बरती जा रही है।
नेपाल की राजनीति में नया मोड़?
नेपाल में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और सरकार की नीतियों से असंतोष के बीच राजशाही समर्थकों का यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
आगे क्या होगा?
नेपाल सरकार इस आंदोलन को कुचलने के लिए कड़े कदम उठा सकती है, लेकिन राजशाही समर्थकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आने वाले दिनों में और बड़े प्रदर्शन होने की संभावना है।
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