Election Commission
Election Commission: कोलकाता में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए पहुंचे चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी 8 मार्च को तीन दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंचे थे। उनका उद्देश्य 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना था, लेकिन उनके पहुंचते ही स्थानीय लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हाल ही में की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
Election Commission: जाने क्या कहते है रिपोर्ट्स
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संशोधन प्रक्रिया के दौरान करीब 64 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कोलकाता में धरना देकर आरोप लगाया कि यह कार्रवाई गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाकर की गई है ताकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को नुकसान पहुंचे और बीजेपी को फायदा मिल सके। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से इस मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार सबसे बड़ा अधिकार है और इसे किसी भी तरह से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर कही ये बड़ी बात
वहीं बात अगर Election Commission की करे तो, आपको बता दे चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह रूटीन क्लीनअप का हिस्सा है, जिसका मकसद फर्जी या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना है। आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम चुनावी सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। इस दौरान चुनाव आयोग की टीम राज्य के अधिकारियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात भी करेगी। हालांकि, वोटर लिस्ट विवाद के चलते पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है और आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
