August 22, 2026

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AI Voice Fraud: सिर्फ एक फोन कॉल से कंपनी के खाते से उड़े 10 करोड़ रुपये, दिल्ली पुलिस ने किया हाई-टेक गैंग का पर्दाफाश

नई दिल्ली/मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक जहां लोगों की जिंदगी को आसान बना रही है। वहीं साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल बड़े-बड़े फ्रॉड को अंजाम देने में भी कर रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है । जिसमें अपराधियों ने AI की मदद से एक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) की आवाज़ की हूबहू नकल तैयार कर करोड़ों रुपये की ठगी कर ली। दिल्ली पुलिस ने इस हाई-टेक साइबर गैंग का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला भारत में बढ़ते AI आधारित साइबर अपराधों का एक बड़ा उदाहरण है । जिसने कॉर्पोरेट सेक्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

MD की आवाज़ बनकर DGM को दिया गया आदेश

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने सबसे पहले मुंबई स्थित एक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की आवाज़ के सैंपल जुटाए। इसके बाद AI आधारित वॉइस क्लोनिंग तकनीक का उपयोग कर उनकी आवाज़ जैसी नकली आवाज़ तैयार की गई। फिर कंपनी के डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) को फोन किया गया। फोन पर सुनाई दे रही आवाज़ बिल्कुल MD जैसी थी, जिससे DGM को जरा भी शक नहीं हुआ। कॉल करने वाले ने तत्काल फंड ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। वरिष्ठ अधिकारी की आवाज़ और अधिकारपूर्ण अंदाज को देखते हुए DGM ने निर्देशों का पालन किया और कई चरणों में रकम ट्रांसफर कर दी। कुछ ही समय में कंपनी के खातों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकल गई।

63 बैंक खातों में बांटी गई रकम, जांच हुई मुश्किल

साइबर अपराधियों ने रकम को सीधे किसी एक खाते में जमा कराने के बजाय बेहद सुनियोजित तरीके से 63 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि धन के प्रवाह को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए और पुलिस जांच लंबी खिंच सके। इस तरह की “लेयरिंग” तकनीक का इस्तेमाल अक्सर बड़े वित्तीय साइबर अपराधों में किया जाता है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने विभिन्न खातों के जरिए पैसे को अलग-अलग स्थानों पर भेजने की कोशिश की, जिससे शुरुआती स्तर पर जांचकर्ताओं को भी धन के अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में चुनौती का सामना करना पड़ा।

एक छोटी गलती ने खोल दी पूरे रैकेट की पोल

हालांकि, इतनी बड़ी योजना बनाने वाले आरोपी एक छोटी सी चूक कर बैठे। पुलिस के अनुसार, विकास नाम का एक आरोपी बैंक में चेक के जरिए रकम निकालने पहुंचा था। बैंक अधिकारियों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विकास को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान कई अहम सुराग मिले और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया। इसके बाद पुलिस ने विकास के चार अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि सभी आरोपी साइबर फ्रॉड के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। उधर, कंपनी की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस पहले ही मामला दर्ज कर चुकी थी। अब दिल्ली और मुंबई पुलिस संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क और इसके संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन की जांच कर रही हैं।

AI युग में सिर्फ आवाज़ पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि AI तकनीक जितनी उपयोगी है, उसका दुरुपयोग उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है। पहले जहां फर्जी ईमेल और नकली दस्तावेज साइबर अपराध का प्रमुख माध्यम थे, वहीं अब वॉइस क्लोनिंग जैसी तकनीकें लोगों और संस्थानों के लिए नई चुनौती बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन या संवेदनशील निर्णय से पहले केवल फोन कॉल के आधार पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। ऐसे मामलों में वीडियो कॉल, आधिकारिक ईमेल या अन्य स्वतंत्र माध्यमों से दोबारा सत्यापन करना बेहद जरूरी हो गया है। AI आधारित साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए कंपनियों और आम लोगों दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि अब सिर्फ चेहरा ही नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ भी नकली बनाई जा सकती है।

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