पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा सामने आया। इस विवाद के बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee पार्टी के कई सांसदों के साथ संसद पहुंचे और लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात की। इस बैठक में पार्टी ने साफ किया कि टीएमसी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी कथित टूट को संवैधानिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। बैठक से पहले सांसद Mahua Moitra और Kalyan Banerjee भी अभिषेक बनर्जी के आवास पर मौजूद रहे, जिससे पार्टी की सक्रियता और बढ़ गई।
टीएमसी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश करार देते हुए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सांसद सौगत रॉय ने दावा किया कि विपक्षी दलों के नेताओं को तोड़ने के लिए दबाव और प्रलोभन की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि संविधान और संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी पार्टी के सांसदों के एकतरफा विलय को मान्यता नहीं दी जा सकती। इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब अंतिम निर्णय उन्हीं के स्तर पर होगा कि यह कथित विलय वैध है या नहीं।
इस पूरे विवाद के बीच पार्टी के अंदरूनी मतभेद भी सामने आने लगे हैं। हालांकि महुआ मोइत्रा ने बयान दिया कि पार्टी कठिन दौर से गुजर रही है लेकिन नेतृत्व मजबूत है और आंतरिक विवादों को फिलहाल दरकिनार कर बागी सांसदों के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया गया है। टीएमसी का दावा है कि वह इस चुनौती का राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर मुकाबला करेगी। आने वाले दिनों में यह मामला संसद से लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति तक बड़ा प्रभाव डाल सकता है और राज्य की राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है।