August 22, 2026

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UP Politics: सपा में टूट के दावे से गरमाई सियासत, राजभर के बयान पर अखिलेश खेमे का पलटवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तीखे बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गई है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के उस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (SP) में जल्द बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। राजभर ने कहा कि जिस तरह पहले शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसे दलों में राजनीतिक विभाजन देखने को मिला था, उसी तरह सपा भी अंदरूनी संकट से गुजर सकती है। उनके इस बयान ने यूपी की सियासत में नई बहस छेड़ दी है और विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर दी है।

सपा का पलटवार, “पार्टी पूरी तरह एकजुट”

ओम प्रकाश राजभर के दावों पर समाजवादी पार्टी ने तुरंत और कड़ा पलटवार किया है। सपा सांसद राजीव राय ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि पार्टी में किसी भी तरह की टूट की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी सांसद व विधायक अखिलेश यादव के नेतृत्व में मजबूती से खड़े हैं। राजीव राय ने राजभर के बयान को राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया और कहा कि विपक्षी दलों की मजबूती को लेकर गलत धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सपा का कहना है कि पार्टी में आंतरिक स्तर पर कोई असंतोष नहीं है और सभी नेता संगठन के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं।

“बकबकाइटिस” बयान से और बढ़ा विवाद

इस राजनीतिक बहस को और गर्मा दिया सपा सांसद राजीव राय के तीखे बयान ने, जिसमें उन्होंने ओम प्रकाश राजभर पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें “बकबकाइटिस” नाम की बीमारी हो गई है, जिसमें व्यक्ति बिना सोचे-समझे ज्यादा बोलता है। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। राजीव राय ने दोहराया कि सपा में किसी तरह का विभाजन संभव नहीं है और सभी नेता अखिलेश यादव के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान केवल मीडिया का ध्यान भटकाने और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाने के लिए दिए जाते हैं। इस बयानबाज़ी ने यूपी की राजनीति में जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।

गठबंधन और अंदरूनी राजनीति को लेकर बड़ा दावा

इस विवाद के बीच सपा सांसद राजीव राय ने एक बड़ा राजनीतिक दावा भी किया, जिसने नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने कहा कि वास्तव में ओम प्रकाश राजभर खुद एक समय समाजवादी पार्टी के साथ दोबारा गठबंधन करना चाहते थे। उनके अनुसार, राजभर ने अपने कुछ मध्यस्थों के जरिए अखिलेश यादव तक संदेश पहुंचाने की कोशिश भी की थी, लेकिन सपा प्रमुख ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वास्तव में पर्दे के पीछे कोई बातचीत चल रही थी या यह केवल बयानबाज़ी का हिस्सा है। इस मुद्दे ने यूपी की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

2027 चुनाव से पहले यूपी की सियासत में बढ़ा तापमान

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप केवल यहीं तक सीमित नहीं रहे। सपा खेमे से यह भी आरोप लगाया गया कि भाजपा नेतृत्व ने दिल्ली में ओम प्रकाश राजभर को उनकी राजनीतिक हैसियत का अहसास कराया है। साथ ही यह भी कहा गया कि लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन को लेकर भी उन पर सवाल उठे हैं। वहीं दूसरी ओर, राजीव राय ने राम मंदिर चंदा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दों को असली राजनीतिक बहस से ध्यान भटकाने के लिए उठाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल यूपी की राजनीति में बयानबाज़ी का दौर तेज है और हर पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहा है, जिससे राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।

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