Chamoli Tunnel Landslide: उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल (TRT) में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया। करीब शाम 6:10 बजे टनल के अंदर अचानक भारी भूस्खलन हुआ और मलबे के साथ पानी व बड़े पत्थर तेज रफ्तार से सुरंग में घुस गए। जिस जगह मजदूर काम कर रहे थे, उससे करीब 150 मीटर दूर हुए इस भूस्खलन ने देखते ही देखते टनल के अंदर हालात बेहद भयावह कर दिए। हादसे के वक्त कई मजदूर सरिया वेल्डिंग और अन्य निर्माण कार्यों में जुटे थे। पानी और मलबे के अचानक आने से मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई लोग अंदर फंस गए। घायलों के मुताबिक, हादसे के बाद टनल में ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो गया था और कई मजदूरों को सांस लेने में परेशानी हुई।
Chamoli Tunnel Landslide: इस तरह चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस, प्रशासन और अन्य राहत-बचाव एजेंसियों ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। प्रशासन के मुताबिक, अब तक 19 मजदूरों को बाहर निकाला गया, जिनमें 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायलों का इलाज गोपेश्वर और श्रीनगर के अस्पतालों में चल रहा है। तीन मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए छह SDRF टीमें लगातार अभियान में जुटी हैं। रेस्क्यू के दौरान टनल में पानी का स्तर काफी बढ़ गया था और जवानों को विशेष उपकरणों के साथ अंदर भेजा गया। नीले ड्रमों की मदद से भी जवान पानी और मलबे के बीच आगे बढ़कर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास करते रहे। घायलों ने बताया कि अचानक आई तेज आवाज के बाद मलबा, पानी और पत्थर सुरंग में घुस आए, जिससे कई मजदूर दूर जा गिरे और कुछ मलबे में दब गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धटनास्थल का किया निरीक्षण
जानकारी के लिए बता दे कि Chamoli Tunnel Landslide के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंहमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली और अधिकारियों को फंसे तीनों श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए। इसके बाद सीएम धामी घायल श्रमिकों से मिलने अस्पताल पहुंचे और उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं THDC प्रबंधन ने भी घटना पर दुख जताते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने और हादसे की विस्तृत जांच कराने की बात कही है। इस हादसे ने परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि स्थानीय स्तर पर दावा किया गया है कि हादसे से पहले दो दिनों से ऊपर की ओर से मलबा गिर रहा था। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता टनल में फंसे तीनों श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना और हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाना है।