Dimaagi Naxal
Dimaagi Naxal को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों का प्रभाव लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन वैचारिक स्तर पर नक्सली सोच को बढ़ावा देने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। पीएम मोदी के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें Dimaagi Naxal होने पर गर्व है। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से मांगा जवाब
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पी चिदंबरम की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस से कई सवाल किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस मुद्दे को उठाया था, उस पर महज 24 घंटे के भीतर ही राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ गई। त्रिवेदी ने कहा कि अगर पी चिदंबरम खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व महसूस करते हैं, तो कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नक्सलवाद को लेकर पार्टी की आधिकारिक सोच क्या है। उन्होंने कांग्रेस से इस मुद्दे पर अपना रुख देश के सामने रखने की मांग की।
मनमोहन सिंह के बयान का हवाला देकर साधा निशाना
सुधांशु त्रिवेदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने गंभीर खतरों में से एक बताया था। बीजेपी नेता ने कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी मनमोहन सिंह के पुराने रुख को सही मानती है या पी चिदंबरम की मौजूदा टिप्पणी को। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है और इस पर कांग्रेस को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव का बीजेपी ने किया दावा
बीजेपी नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्व सरकारों के दौरान नक्सलवाद के प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय देश के कई हिस्सों में नक्सली हिंसा का प्रभाव व्यापक था और बड़ी संख्या में जिले प्रभावित थे। त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद नक्सलवाद का असर काफी कम हुआ है। उन्होंने 31 मई 2026 को सरकार की ओर से हासिल उपलब्धियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि अब नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या शून्य हो गई है। उन्होंने बस्तर ओलंपिक को भी बदलाव का उदाहरण बताया।
पी चिदंबरम की टिप्पणी के बाद जारी है वार-पलटवार
पी चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण से शुरू हुई यह बहस अब नक्सलवाद और वैचारिक सोच के मुद्दे पर केंद्रित हो गई है। बीजेपी लगातार कांग्रेस से सवाल पूछ रही है, जबकि पी चिदंबरम की टिप्पणी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। ऐसे में ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर आने वाले दिनों में भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।