September 3, 2026

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India Automobile Market 2026: क्या खत्म होने वाला है पेट्रोल कारों का दबदबा?

India Automobile Market 2026: भारत का ऑटोमोबाइल बाजार तेजी से बदल रहा है और अब कार-बाइक खरीदने वाले ग्राहक सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं हैं। CNG, Hybrid और Electric Vehicles (EV) की मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी ने ऑटो सेक्टर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच देश में 82,737 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 43,710 था। यानी करीब 89 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान Tata Motors के 32,283, Mahindra के 20,112 और JSW MG के 16,502 इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों का पंजीकरण हुआ। जुलाई में भी EV की रफ्तार जारी रही और FADA के अनुसार देश में 3,27,901 इलेक्ट्रिक वाहन रिटेल हुए। कुल वाहन रिटेल में EV की हिस्सेदारी करीब 12.7 फीसदी रही, जो जुलाई 2025 में 9.6 फीसदी थी।

India Automobile Market 2026: जाने कौन कौन से बदलाव हुए

सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोल और वैकल्पिक ईंधनों के बीच घटते अंतर में दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में कुल वाहन रिटेल के ईंधन मिश्रण में पेट्रोल/एथेनॉल की हिस्सेदारी 41.68 फीसदी रही। वहीं CNG/LPG की हिस्सेदारी 24.67 फीसदी, डीजल 17.73 फीसदी, हाइब्रिड 8.02 फीसदी और EV 7.90 फीसदी रही। यानी CNG/LPG, Hybrid और EV को जोड़ दें तो वैकल्पिक विकल्पों की कुल हिस्सेदारी 40.59 फीसदी हो जाती है और पेट्रोल/एथेनॉल से अंतर सिर्फ 1.09 प्रतिशत अंक रह जाता है। जुलाई 2025 में यही अंतर 13.21 प्रतिशत था। दोपहिया और तिपहिया बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की पकड़ और मजबूत हुई है। जुलाई 2026 में EV दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 11.24 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले यह 7.65 फीसदी थी। वहीं इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 65.08 फीसदी तक पहुंच गई। हाइब्रिड वाहनों की हिस्सेदारी भी 7.89 फीसदी से बढ़कर 8.02 फीसदी हुई है। इससे साफ है कि ग्राहक अब अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से पेट्रोल के साथ कई दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

क्यों हो रहे है ये बदलाव? यहाँ जाने

आखिर यह बदलाव क्यों हो रहा है? इसके पीछे ईंधन की कीमत, माइलेज, रनिंग कॉस्ट, मेंटेनेंस, EV की बढ़ती उपलब्धता, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और E20 को लेकर बनी चिंताएं जैसे कई कारण हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 2026 की शुरुआत में ₹94.77 प्रति लीटर थी, जो मई में बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गई और सितंबर की शुरुआत तक इसी स्तर पर बनी रही। दूसरी ओर, 29 अगस्त के बाद दिल्ली में CNG की कीमत ₹86.98 प्रति किलो हो गई, फिर भी बेहतर माइलेज के कारण प्रति किलोमीटर खर्च पेट्रोल से कम रह सकता है। सरकार की EV नीतियों ने भी इस बदलाव को गति दी है। FAME-II के बाद PM E-DRIVE योजना के तहत करीब 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। 7 अगस्त 2026 तक देश में 67,657 EV चार्जर स्थापित किए जा चुके थे। लंबी अवधि में भी EV की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019-20 के 0.71 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 8.26 फीसदी हो गई। यानी पेट्रोल वाहनों का दबदबा अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन ऑटो बाजार में उनकी एकतरफा बादशाहत जरूर तेजी से चुनौती में आ रही है।

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