उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर: प्रतिमा हटाने में प्रशासन नाकाम, स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद होगा फैसला
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को विस्थापित करने को लेकर साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों का विरोध जारी है। प्रशासन पिछले करीब पांच दिनों से प्रतिमा को हटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु जुट रहे हैं। संतों का कहना है कि प्रतिमा का अपने स्थान से नहीं हटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। वहीं, श्रद्धालु मंदिर से जुड़े अपने अनुभव और आस्था से जुड़े प्रसंग भी साझा कर रहे हैं।
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर: प्राचीन प्रतिमा की खासियत क्या है?
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् के अनुसार, यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से बनी है और परमार काल तथा राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है। उनके मुताबिक, प्रतिमा संभवत: एक विशेष लॉकिंग सिस्टम के अनुसार स्थापित है। प्राचीन समय में आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होने के बावजूद पत्थरों में विशेष तकनीक से छेद कर प्रतिमाओं और मंदिरों का निर्माण किया जाता था।
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर: सड़क चौड़ीकरण की जद में आया मंदिर
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर को कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक जारी सड़क चौड़ीकरण के चलते हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रतिमा को हटाने के लिए बीते दिनों में चार बार प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन वह अपने स्थान से नहीं हिली। मंदिर के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है। फिलहाल प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने पोस्टर लगाकर चेतावनी दी है कि प्रतिमा को हटाने के दौरान किसी भी तरह की क्षति होने पर इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर: विशेषज्ञों की मदद से होगी स्कैनिंग
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने से पहले अब प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए नीचे करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है। नगर निगम और जिला प्रशासन के अनुसार, आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक मशीनों के जरिए प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। स्कैनिंग रिपोर्ट आने के बाद ही प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए अगली तकनीक तय की जाएगी। प्रशासन की योजना प्रतिमा को टंकी चौक पर स्थापित करने की है।
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर: इसी स्थान पर पुनर्निर्माण की मांग
उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर को लेकर मंदिर के सेवादार और पुजारी महेश पंडित (बैरागी) का कहना है कि उन्हें लगातार महसूस हो रहा है कि बाबा संकेत दे रहे हैं कि वे इसी स्थान पर रहना चाहते हैं। स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि मंदिर का जुड़ाव 1857 की क्रांति से भी पहले का है, इसलिए इसे हटाने के बजाय इसी स्थान पर भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए। मंदिर को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण हटाया जा रहा है। अब आस्था, ऐतिहासिक विरासत और तकनीकी जटिलताओं के बीच सभी की नजरें विशेषज्ञों की जांच और स्कैनिंग रिपोर्ट पर टिकी हैं।
