सपा के खिलाफ पोस्टर: अखिलेश यादव पर माफिया के नामों के जरिए निशाना, यूपी में तेज हुआ पोस्टर वार
सपा के खिलाफ पोस्टर
सपा के खिलाफ पोस्टर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा के खिलाफ पोस्टर के जरिए सियासी हमला तेज हो गया है। लखनऊ समेत उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर जैसे कई जिलों में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इन पोस्टरों पर ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे नारे लिखे गए हैं।
सपा के खिलाफ पोस्टर में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का जिक्र
सपा के खिलाफ पोस्टर में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के नाम और चर्चित चेहरों की सूची दिखाई गई है। पोस्टरों में अवध, रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कई नामों का जिक्र किया गया है। इस अभियान के जरिए पोस्टर लगाने वालों ने समाजवादी पार्टी के पिछले शासनकाल से जुड़े कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाने की कोशिश की है।
सपा के खिलाफ पोस्टर में अतीक, मुख्तार और आजम के नाम
पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान समेत कई नामों और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। अवध क्षेत्र के पोस्टर में अतीक, आजम, मुख्तार, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर के नाम बताए गए हैं। वहीं पूर्वांचल के पोस्टर में अतीक, मुख्तार, उमाकांत यादव, रमाकांत यादव और मुन्ना बजरंगी का जिक्र है। इन पोस्टरों में संबंधित लोगों के खिलाफ अपराध या मामलों से जुड़े अलग-अलग दावे भी लिखे गए हैं।
सपा के खिलाफ पोस्टर में पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्र भी शामिल
सपा के खिलाफ पोस्टर का दायरा पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड तक भी बताया गया है। पश्चिमी यूपी के पोस्टरों में आजम खान, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, डीपी यादव, संजीव जीवा और मुकीम काला के नाम शामिल किए गए हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र के पोस्टर में इरफान सोलंकी, दीप नारायण सिंह यादव, आजम, मुख्तार और चंद्रपाल सिंह यादव का जिक्र है। पोस्टरों में कुछ नामों के साथ अलग-अलग आपराधिक मामलों से जुड़े आरोप या संदर्भ भी दिए गए हैं।
सपा के खिलाफ पोस्टर से चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी
सपा के खिलाफ पोस्टर सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक टकराव का एक और मुद्दा सामने आया है। पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के शासनकाल और उससे जुड़े माफिया के कथित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, पोस्टर में लिखे आरोप और दावे उन्हें लगाने वालों की राजनीतिक प्रस्तुति हैं, जिन्हें संबंधित व्यक्तियों या पार्टी के खिलाफ स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के पोस्टर अभियान से यूपी की सियासत में बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
