इराक से अमेरिकी सेना की वापसी: 2003 से चली आ रही सैन्य मौजूदगी का अध्याय खत्म, ईरान-ISIS को लेकर चिंता
इराक से अमेरिकी सेना की वापसी
इराक से अमेरिकी सेना की वापसी बुधवार, 30 सितंबर 2026 को पूरी हो गई। अमेरिकी सेना ने इराक में अपने बचे हुए सैन्य ठिकानों से भी वापसी पूरी कर ली है। इसके साथ ही 2003 में शुरू हुई अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के इस चरण का अंत हो गया। अमेरिका और इराक ने साल 2024 में इस वापसी की समयसीमा तय की थी, जिसे अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने लागू किया है। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इराक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
इराक में अमेरिकी सेना क्यों पहुंची थी?
इराक से अमेरिकी सेना की वापसी को समझने के लिए इसके पीछे की पूरी कहानी जानना जरूरी है। अमेरिका ने 2003 में इराक पर हमला किया था और इस कार्रवाई के बाद सद्दाम हुसैन की सरकार को हटा दिया गया। अमेरिकी सेना कई वर्षों तक इराक में रही और 2011 के अंत में पूरी तरह वापस चली गई। हालांकि, 2014 में इस्लामिक स्टेट यानी ISIS के तेजी से बढ़ने के बाद अमेरिकी सेना फिर इराक लौटी। अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं ने इराकी सुरक्षा बलों के साथ मिलकर ISIS के खिलाफ अभियान चलाया।
ISIS के खिलाफ अभियान के बाद वापसी का फैसला
इराक में ISIS के कब्जे वाले बड़े इलाकों को 2017 तक वापस ले लिया गया था। इसके बाद अमेरिका और इराक ने अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य मिशन को खत्म करने की योजना बनाई। सितंबर 2024 में दोनों देशों ने इस मिशन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति बनाई थी। इसी योजना के तहत अब इराक से अमेरिकी सेना की वापसी का अंतिम चरण पूरा हुआ है। अमेरिकी सैन्य अभियान के दो दशक से ज्यादा लंबे दौर में करीब 4,500 अमेरिकी सैनिकों की मौत होने की जानकारी दी गई है।
अमेरिकी वापसी के बाद ईरान समर्थित गुटों को लेकर चर्चा
इराक से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद ईरान समर्थित हथियारबंद गुटों के प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इराक में ईरान से जुड़े कई शिया हथियारबंद गुट पहले से राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में प्रभाव रखते हैं। सुरक्षा मामलों के जानकार जासिम अल-बहदली ने रॉयटर्स से कहा कि ईरान समर्थक मिलिशिया अमेरिकी वापसी को अपनी जीत के रूप में पेश कर सकते हैं और इसका इस्तेमाल सुरक्षा तथा राजनीतिक फैसलों पर प्रभाव बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। यह एक विशेषज्ञ की राय है, न कि इस प्रभाव के बढ़ने की पुष्टि।
ISIS को लेकर भी बनी हुई है सुरक्षा की चिंता
इराक से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद ISIS को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इराक में ISIS का क्षेत्रीय कब्जा 2017 तक खत्म हो चुका था, लेकिन संगठन से जुड़े लोग और छोटे समूह अब भी मौजूद बताए गए हैं। अमेरिका ने इराकी सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग, खुफिया जानकारी और हवाई निगरानी जैसी मदद दी है। अब अमेरिकी सैनिकों की सीधी मौजूदगी खत्म होने के बाद इराकी सुरक्षा बलों की अपनी क्षमता महत्वपूर्ण होगी। कुछ अधिकारियों और विशेषज्ञों को आशंका है कि सुरक्षा में कमजोरी का फायदा ISIS से जुड़े बचे हुए नेटवर्क उठा सकते हैं।
