जंतर-मंतर प्रदर्शन: महिला पत्रकारों के आरोपों पर बढ़ा विवाद, क्राइम ब्रांच करेगी जांच
जंतर-मंतर प्रदर्शन
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्ग थाने के बाहर डेरा डाल दिया। रविवार रातभर प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही। सोमवार सुबह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाना शुरू किया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में तीन महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। एक महिला पत्रकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि एसीपी विवेक भगत ने उन्हें गलत तरीके से छुआ और पीछे धकेला। पत्रकारों का आरोप है कि वे शिकायत दर्ज कराने के लिए संसद मार्ग थाने पहुंचीं, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। हालांकि, एसीपी विवेक भगत से संपर्क नहीं हो सका।
सीजेपी और आम आदमी पार्टी ने की एफआईआर की मांग
महिला पत्रकारों की शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संस्थापक सौरभ दास और रतना दास संसद मार्ग थाने पहुंचे। सौरभ दास ने पुलिस पर एसीपी विवेक भगत को बचाने और एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया। वहीं, आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी पुलिस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। आप नेताओं ने भी एसीपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंपा
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की प्रवक्ता और डीसीपी नेहा यादव ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान बीएनएसएस की धारा 163 लागू थी और प्रदर्शनकारियों को जगह खाली करने की चेतावनी दी गई थी। आदेश नहीं मानने पर उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस के मुताबिक, शाम करीब 6 बजे तीन महिलाओं ने हिरासत के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर बदसलूकी की शिकायत की। शिकायत दर्ज करने के साथ मेडिकल जांच भी कराई गई और मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। पुलिस ने लोगों से संबंधित फुटेज जांच एजेंसी के साथ साझा करने की अपील की है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा वायरल वीडियो निकला फर्जी
इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली पुलिस के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर भी पुलिस ने सफाई दी है। पुलिस के मुताबिक, वीडियो दिल्ली का नहीं है और उसमें दिल्ली पुलिस के जवान शामिल नहीं हैं। पुलिस ने वीडियो को भ्रामक बताते हुए लोगों से बिना पुष्टि के ऐसे कंटेंट को शेयर नहीं करने की अपील की है। साथ ही पुलिस ने चेतावनी दी कि भ्रामक पोस्ट साझा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अब जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े महिला पत्रकारों के आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।
