October 10, 2026

Abstar News

Latest News, Breaking News & Updates

सऊदी अरब पर हूती हमले: रियाद और आभा एयरपोर्ट निशाने पर, जानें क्यों बढ़ रही है दुश्मनी

सऊदी अरब पर हूती हमले

सऊदी अरब पर हूती हमले

मध्य पूर्व में तनाव के बीच सऊदी अरब पर हूती हमले को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने दो दिनों के भीतर रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। इन हमलों में तीन लोगों की मौत और कई नागरिकों के घायल होने की बात कही गई है। हूतियों ने अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि, इन ताजा हमलों और हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

सऊदी अरब पर हूती हमले की वजह क्या बताई जा रही है?

हूती विद्रोहियों की कार्रवाई के पीछे यमन में हाल की घटनाओं को वजह बताया जा रहा है। खबर के अनुसार, जुलाई 2026 में यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर ईरान से आ रहे एक यात्री विमान को उतरने से रोक दिया गया था। विमान में हूती प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सवार होने का दावा किया गया है। इसके अलावा, यमन में सऊदी समर्थित सुरक्षा बलों के अभियानों ने भी तनाव बढ़ाया। हूतियों ने इन घटनाओं को अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हुए जवाबी कार्रवाई की बात कही है।

2014 से जारी है सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष

सऊदी अरब पर हूती हमले के पीछे वर्षों पुराना संघर्ष भी एक बड़ी वजह है। साल 2014 में हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल करने के लिए 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन बनाया गया। यमन में हुए हवाई हमलों और सैन्य अभियानों ने दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी को और गहरा कर दिया। यही संघर्ष आगे चलकर क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गया।

ईरान से हूतियों के संबंध और धार्मिक मतभेद

सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव में ईरान की भूमिका भी अहम मानी जाती है। सऊदी अरब सुन्नी बहुल देश है, जबकि हूती आंदोलन यमन की जैदी शिया परंपरा से जुड़ा है। दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद भी हैं। हूतियों को ईरान का समर्थन मिलने की बात लंबे समय से चर्चा में रही है। सऊदी अरब के लिए यमन की सीमा के पास ईरान समर्थित सशस्त्र समूह की मौजूदगी सुरक्षा संबंधी चिंता का विषय मानी जाती है।

तेल प्रतिष्ठानों और लाल सागर पर भी संघर्ष का असर

सऊदी अरब पर हूती हमले का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। हूती विद्रोही पहले भी सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की रणनीति अपनाते रहे हैं। तेल उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात प्रभावित होने से आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी इस संघर्ष से जुड़ी है। यहां तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.