कोविड-19: गर्मियों की छुट्टियों में यात्रा की योजनाएं जोरों पर हैं, लेकिन कोविड-19 चुपके से हमें याद दिला रहा है कि यह अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 10 जून 2025 तक भारत में 6,815 सक्रिय कोविड-19 मामले दर्ज किए गए, जिनमें पिछले 24 घंटों में 324 नए मामले सामने आए। हालांकि ये आंकड़े पहले की लहरों की तुलना में कम हैं, फिर भी यह वायरस की मौजूदगी का संकेत है। इस दौरान दिल्ली, केरल और झारखंड में तीन कोविड से संबंधित मौतें भी दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सावधानी बरतना अनिवार्य है।
कोविड-19 की स्थिति और सतर्कता
महामारी विशेषज्ञ डॉ. प्रीति काबरा ने बताया कि भारत में फिलहाल कोई बड़ा उछाल नहीं है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में छिटपुट मामले देखे जा रहे हैं। हल्के लक्षणों वाले कई लोग टेस्ट नहीं करा रहे, जिससे वास्तविक मामले कम दर्ज हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर कम होना टीकाकरण की सफलता दर्शाता है। फिर भी, सतर्कता जरूरी है, क्योंकि वायरस अभी भी सक्रिय है।” डॉ. काबरा ने मास्क पहनने, भीड़भाड़ से बचने और बूस्टर डोज लेने की सलाह दी, खासकर जोखिम वाले समूहों के लिए।
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कौन हैं जोखिम में?
डॉ. काबरा ने उन समूहों को चिह्नित किया, जिन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, अनियंत्रित मधुमेह, हृदय या किडनी रोग वाले लोग, कीमोथेरेपी या अंग प्रत्यारोपण से गुजर रहे मरीज, क्रॉनिक फेफड़े की बीमारी (जैसे COPD या अस्थमा) से पीड़ित लोग, मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति (BMI > 30), और डाउन सिंड्रोम या न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर वाले लोग शामिल हैं। इन समूहों में निमोनिया, रक्त के थक्के या लॉन्ग कोविड जैसी जटिलताओं का खतरा अधिक है।
टीकाकरण का महत्व
डॉ. काबरा ने बताया कि बूस्टर डोज के साथ टीकाकरण गंभीर बीमारी और मृत्यु से मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। टीकाकृत लोगों में ब्रेकथ्रू संक्रमण हो सकते हैं, लेकिन ये मामले आमतौर पर हल्के होते हैं। हालांकि, टीकाकृत लोग भी वायरस फैला सकते हैं। दूसरी ओर, गैर-टीकाकृत लोगों में जटिलताओं और लंबी बीमारी का जोखिम अधिक है, खासकर नए वेरिएंट के प्रति। इसलिए, बूस्टर डोज और सावधानी दोनों जरूरी हैं।

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