आजाद भारत के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का पता बदलने जा रहा है। दशकों से देश का प्रधानमंत्री कार्यालय रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा है, लेकिन अब यह ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बने नए प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, जहां से जल्द ही देश की सर्वोच्च कार्यकारी व्यवस्था संचालित होगी।
‘सेवा तीर्थ’ नाम के पीछे क्या है गहरी सोच?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद खुद को प्रधानमंत्री नहीं बल्कि ‘प्रधान सेवक’ के रूप में प्रस्तुत किया। उनके भाषणों, नीतियों और फैसलों में बार-बार यह विचार सामने आता रहा है कि सत्ता सेवा का माध्यम है, अधिकार का नहीं।नए प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ रखना इसी दर्शन का विस्तार है। ‘तीर्थ’ भारतीय संस्कृति में वह स्थान होता है जहां कर्तव्य, साधना और समर्पण भाव से कार्य किया जाता है। ऐसे में ‘सेवा तीर्थ’ का अर्थ है—वह स्थान जहां से 145 करोड़ देशवासियों की सेवा के लिए दिन-रात, 365 दिन कार्य किया जाए।
मोदी दशक में बदले कई अहम पते
प्रधानमंत्री मोदी की यह सोच केवल PMO तक सीमित नहीं रही। पिछले एक दशक में कई महत्वपूर्ण सरकारी पतों और नामों में बदलाव देखने को मिला है।
रेसकोर्स रोड से लोक कल्याण मार्ग
दशकों तक प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास 7 रेसकोर्स रोड के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2016 में मोदी सरकार ने इसका नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया।इस बदलाव के पीछे संदेश स्पष्ट था यह वह स्थान है जहां से देश के लोगों के कल्याण के लिए फैसले लिए जाते हैं।
राजपथ से कर्तव्य पथ
इसी तरह राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया। यह बदलाव भी सत्ता की बजाय कर्तव्य और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने का प्रतीक था।
PMO का नया पता: एक संदेश, एक दिशा
‘सेवा तीर्थ’ नाम यह संकेत देता है कि मोदी सरकार खुद को शासन करने वाली सत्ता नहीं बल्कि सेवा करने वाली व्यवस्था के रूप में देखती है। यह बदलाव आने वाले वर्षों में भारतीय प्रशासन की कार्यसंस्कृति को परिभाषित करने वाला साबित हो सकता है।आजाद भारत में पहली बार PMO का पता बदलना सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन की सोच का पुनर्परिभाषण है।

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