August 28, 2026

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लखीमपुर खीरी में दर्दनाक घटना नवजात शिशु की मौत और सरकारी अस्पताल की लापरवाही

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने हर दिल को झकझोर कर रख दिया है। एक पिता, विपिन गुप्ता, जो अपने नवजात बच्चे की लाश को बैग में लेकर डीएम ऑफिस पहुँचा, इंसाफ की गुहार लगाने के लिए। यह घटना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है, जहां पैसों की माँग के कारण एक मासूम की जान चली गई।

अस्पताल में बढ़ती जा रही थी पैसों की मांग

विपिन गुप्ता ने बताया कि उनकी पत्नी के प्रसव के दौरान सरकारी अस्पताल ने शुरुआत में 10 हज़ार रुपये माँगे, जो बाद में बढ़कर 12 हज़ार हो गए। जैसे-जैसे प्रसव पीड़ा बढ़ी, पैसे की मांग भी लगातार बढ़ती गई। विपिन ने रात 2:30 बजे तक पैसे जुटा लिए, और अस्पताल से कहा कि अगर वे सक्षम नहीं हैं तो वे पत्नी को कहीं और ले जाएंगे। लेकिन अस्पताल ने ऑपरेशन के लिए पहले पैसे देने की शर्त रख दी।

जान बचाने की जद्दोजहद और मासूम की मौत

मदद की गुहार के बीच अस्पताल का रवैया निराशाजनक था। ऑपरेशन के लिए पैसे न मिलने की वजह से देर हो गई और नवजात शिशु की मौत हो गई। इससे भी दर्दनाक यह था कि महिला को अस्पताल ने सड़क पर छोड़ दिया। यह कहानी न केवल एक परिवार का दर्द है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का प्रतीक भी है।

एक पिता की न्याय की मांग

विपिन गुप्ता ने मृत बच्चे को बैग में रखकर डीएम ऑफिस जाकर न्याय की मांग की। उनका दर्द सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों का है जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। यह घटना सवाल उठाती है कि क्या सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर पैसों की कीमत पर इंसानियत की हत्या हो रही है?

स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत

यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था में कितनी कमी है। गरीब और जरूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती और प्रभावी होनी चाहिए, न कि उनके लिए खतरा। सरकार को इस घटना से सीख लेकर ऐसे कदम उठाने होंगे जो मानव जीवन की कीमत समझें और चिकित्सा सेवा को किफायती बनाएं।

इंसानियत के नाम पर हो न्याय

लखीमपुर खीरी की यह घटना एक चेतावनी है कि हमे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच पर विशेष ध्यान देना होगा। हर नागरिक को समान और उचित चिकित्सा सेवा मिलनी चाहिए, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। आज की कहानी सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे देश की शर्मिंदगी है।

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