दिल्ली में अंबेडकर का अपमान: AAP का बीजेपी पर तीखा प्रहार, स्कूल नाम बदलने का विरोध

सौरभ भारद्वाज का धारदार हमला

नई दिल्ली से एक राजनीतिक भूचाल आ गया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम व सम्मान को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि AAP सरकार ने दिल्ली के हर सरकारी दफ्तर में डॉ. अंबेडकर और शहीद भगत सिंह की तस्वीरें लगाने का फैसला लिया है, ताकि उनके आदर्शों को जीवंत रखा जाए। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी नेताओं की तस्वीरों में अब अंबेडकर जी नजर नहीं आते, जो दलित समाज के प्रति उनकी नफरत को उजागर करता है।” यह बयान खिचड़ीपुर के एक स्कूल से जुड़े विवाद के बाद आया, जहां AAP विधायक कुलदीप कुमार ने अंबेडकर के नाम का बोर्ड दोबारा लगवाया। भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अंबेडकर के अपमान पर केंद्र सरकार की चुप्पी का भी जिक्र किया, जो राजनीतिक बहस को और गरमा रहा है।

स्कूल नाम परिवर्तन: शर्मनाक कदम या राजनीतिक साजिश?

विवाद का केंद्र बिंदु दिल्ली का “डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” है, जिसका नाम बीजेपी सरकार ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नाम पर “सीएम श्री स्कूल” कर दिया। सौरभ भारद्वाज ने इसे “अंबेडकर जी के योगदान का अपमान” करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि अंबेडकर एक महान विद्वान थे, जिन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डिग्रियां हासिल कीं तथा दो डॉक्टरेट प्राप्त किए। “अंबेडकर जी के नाम पर बने स्कूल का नाम बदलना अस्वीकार्य है। अगर नाम बदलना है तो सावरकर के नाम पर नए स्कूल बनाएं, लेकिन अंबेडकर की विरासत को न छेड़ें,” भारद्वाज ने कहा। AAP समर्थकों ने खिचड़ीपुर में प्रदर्शन किया, जहां बोर्ड हटाने का विरोध हुआ। यह घटना AAP के 2022 के फैसले को रेखांकित करती है, जब 31 स्कूलों का नाम अंबेडकर के सम्मान में रखा गया था। अब यह विवाद दलित उत्थान की राजनीति को नई ऊंचाई दे रहा है।

बीजेपी का पलटवार: राजनीतिक अस्तित्व का सवाल

बीजेपी ने AAP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश है। दिल्ली बीजेपी प्रमुख वीरेंद्र सच्चदेवा ने प्रेस रिलीज में दावा किया, “AAP ने केवल 31 स्कूलों का नाम अंबेडकर के नाम पर रखा, लेकिन उन्हें दिल्ली बोर्ड से संबद्ध कर बेकार बना दिया।” उन्होंने AAP से पूछा कि दस साल के शासन में दलितों के लिए पांच ठोस कदम बताएं। बीजेपी ने मोदी सरकार के अंबेडकर स्मृति कार्यों का हवाला दिया, जैसे पंचतीर्थ स्थलों का विकास। साथ ही, AAP पर आरोप लगाया कि वे अंबेडकर की तस्वीरें लगाकर वोटबैंक साधते हैं, लेकिन शिक्षा में सुधार नहीं करते। सच्चदेवा ने कहा, “दलित उत्थान तस्वीरों से नहीं, कार्यों से होता है।” यह पलटवार अम्बेडकर जयंती के बाद के विवादों को जोड़ता है, जहां AAP ने बीजेपी पर SC छात्रवृत्ति योजनाओं में विफलता का आरोप लगाया था। राजनीतिक तापमान चढ़ने से दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो गई है।

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अंबेडकर की विरासत: समाज सुधारक से राजनीतिक प्रतीक

डॉ. बी.आर. अंबेडकर न केवल संविधान के शिल्पकार थे, बल्कि दलितों के अधिकारों के योद्धा। उनकी शिक्षा पर जोर ने लाखों को सशक्त बनाया। AAP का फैसला सरकारी दफ्तरों में उनकी तस्वीरें लगाने का अंबेडकर के समावेशी भारत के सपने को साकार करने की दिशा में कदम है। भारद्वाज ने कहा, “यह विरोध केवल दलित समाज का नहीं, पूरे समाज का है। सरकार को गलती सुधारनी चाहिए।” X (पूर्व ट्विटर) पर #BJPHatesAmbedkar ट्रेंड कर रहा है, जहां AAP कार्यकर्ता प्रदर्शन वीडियो शेयर कर रहे हैं। बीजेपी समर्थक इसे AAP की हताशा बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद 2025 चुनावों में दलित वोटों को प्रभावित करेगा। अंबेडकर की विरासत आज भी प्रासंगिक है – समानता, शिक्षा और न्याय की। क्या यह बयानबाजी सुधार लाएगी या सिर्फ शोर?

आगे की राह: संवाद या संघर्ष?

सौरभ भारद्वाज के बयान ने दिल्ली का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। केंद्र सरकार और बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार है, जो शायद और तीखी होगी। AAP ने सड़क प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, जबकि बीजेपी शिक्षा सुधारों पर फोकस करने की बात कर रही है। जरूरत है संवाद की – अंबेडकर के नाम को राजनीति से ऊपर उठाकर। सरकार को स्कूल नाम बहाल करने और दलित योजनाओं पर अमल का वादा निभाना चाहिए। यह विवाद हमें याद दिलाता है कि अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। पूरे देश को सोचना होगा कि क्या हम उनके सपनों को साकार कर पा रहे हैं?

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