Category: स्वास्थ्य

  • Jammu Kashmir में सेना ने लगाया मेडिकल कैंप! मिली ये सेवाएँ

    Jammu Kashmir में सेना ने लगाया मेडिकल कैंप! मिली ये सेवाएँ

    Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर के दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने की दिशा में भारतीय सेना ने एक अहम पहल की है। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले के मलंगाम गांव में सेना द्वारा आयोजित मेडिकल कैंप से सैकड़ों लोगों को सीधा लाभ मिला। बांदीपोरा ज़िले के मलंगाम गांव में शुक्रवार को भारतीय सेना ने एक दिवसीय मेडिकल कैंप का आयोजन किया। यह कैंप सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जिसमें आसपास के इलाकों से आए कुल 703 लोगों ने मुफ्त चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया।

    Jammu Kashmir में लगे इस कैंप में लोगों को मिली ये सुविधाएँ

    इस मेडिकल कैंप का आयोजन भारतीय सेना, एएसजी आई हॉस्पिटल और ज़िला प्रशासन के सहयोग से किया गया। कैंप का मुख्य उद्देश्य था, बीमारियों की समय रहते पहचान, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, और दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले लोगों को आसान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना। कैंप में कई तरह की चिकित्सा सेवाएं दी गईं, जिनमें नेत्र रोग जांच, बच्चों और महिलाओं के लिए बाल रोग और स्त्री रोग परामर्श, सामान्य चिकित्सा जांच, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर टेस्ट, और ईसीजी जांच शामिल रही।

    ये गंभीर मामला आया सामने

    इसी दौरान Jammu Kashmir में एक गंभीर मामला भी सामने आया, जब ईसीजी जांच के दौरान एक व्यक्ति में सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया, यानी दिल की तेज़ धड़कन की समस्या पाई गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत ज़िला अस्पताल बांदीपोरा रेफर किया गया, जिससे उसकी जान सुरक्षित रह सकी। स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कैंप उन इलाकों के लिए बेहद जरूरी हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। वहीं सेना अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मेडिकल कैंप न सिर्फ लोगों की तत्काल ज़रूरतें पूरी करते हैं, बल्कि सेना और आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग को भी मजबूत करते हैं। भारतीय सेना ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में भी ऐसे कल्याणकारी कार्यक्रम दूरदराज़ और जरूरतमंद इलाकों में जारी रहेंगे।

  • Ayushman Card की ये है असली हकीक़त, जाने पूरी खबर

    Ayushman Card की ये है असली हकीक़त, जाने पूरी खबर

    Ayushman Card: देश के स्वास्थ व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। और आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं आयुष्मान भारत की वो कड़वी हकीकत, जो सरकार नहीं दिखाना चाहती। सरकार बार-बार बताती है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मरीजों के सामने अस्पतालों में भर्ती के लिए लंबी कतारें, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और कई बार भुगतान की समस्याएं खड़ी हैं। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। अधिक और पूरी जानकारी के लिए खबरको अंत तक जरूर पढ़े।

    Ayushman Card: जाने क्या है पूरी मामला

    जानकारी के लिए बता दे कि कुछ डॉक्टर खुद मानते हैं, कई बार “Wait time मरीजों के लिए अक्सर बहुत लंबा होता है। कई अस्पताल मरीजों को सिर्फ इसलिए नहीं ले रहे क्योंकि उनके पास पेमेंट नहीं हो रहा।” यानी कि जो कार्ड आपके पास है, वह अक्सर काम नहीं आता। एमरजेंसी में भी, कई बार आपको कैश पेमेंट करना पड़ता है, क्योंकि अस्पताल कार्ड को स्वीकार नहीं कर रहे। और हज़ारो मरीज़ों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    लोगो के ज़हन में उठ रहा ये सवाल

    और सवाल ये उठता है कि आखिर सरकार के ‘लाखों लाभार्थी’ वाले दावे और जमीन पर हकीकत में क्या फर्क है? मरीज परेशान हैं, डॉक्टर थक गए हैं और योजनाएं सिर्फ कागजों पर काम कर रही हैं। तो क्या आयुष्मान भारत सिर्फ एक नाम का कवच बनकर रह गया है, या वास्तव में मरीजों के लिए राहत देने वाला साधन? यह वो सवाल है जो हर मरीज और हर परिवार पूछ रहा है। हमारे साथ बने रहिए, क्योंकि हम इसी कड़वी हकीकत की पूरी पड़ताल करेंगे। आज की रिपोर्ट सिर्फ़ शुरुआत है, और सच अभी बाकी है।

  • Delhi NCR: एक एक सांस हुई जहरीली! शहर में छाया प्रदूषण

    Delhi NCR: एक एक सांस हुई जहरीली! शहर में छाया प्रदूषण

    Delhi NCR: एक एक सांस हुई जहरीली! शहर में छाया प्रदूषण दिल्ली एनसीआर में हर बीतते दिन के साथ स्थिति बदतर ही होती जा रही है। शनिवार को दिल्ली और आस पास के ईलाके में एक्यूआई इंडेक्स 400 के पार चला गया है। जिसके बाद से ही शहर में ग्रैप 3 लागू कर दिया गया है। आपको बता दे कि एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों का फेफड़ा इस कदर खराब हो रहा है जैसे प्रतिदिन 5 सिगरेट पीने वालो का होता है। वहीं इसी सिलसिले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने भी सरकार और विपक्ष को एक साथ मिलकर काम करने की अपील की है। वहीं बात अगर आज की करे तो, एनसीआर में ज़ीरो विजीब्लीटी के चलते लोगो की आवाजाही में भी दिक्कत आ रही है। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। पूरी जानकारी के लिए कबर को अंत तक जरूर पढ़े।

    Delhi NCR: सरकार ने अबतक लिए ये अहम फैसले

    जानकारी के लिए बता दे कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के चलते स्थिती इतनी बदतर हो गई है कि लोगो को सांस लेने की भी दिक्कत आ रही है। वही बत अगर बच्चों की करे तो, बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बच्चों के स्कूल को भी बंद कर दिया गया है। वहीं क्लास 9वीं से 11वीं तक के बच्चो के लिए हाईब्रीड मोड में क्लास चलाई जा रही है। वहीं इसके अलावा दिल्ली एनसीआर के कई ईलाकों में बीएस 3 और बीएस 4 वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा कर्मचारीयों के लिए एक विशेष आदेश जारी किया गया है। बता दे कि दिल्ली एनसीआर में 50% कर्मचारीयों को वर्क फ्रॉम होम के आदेश दिए गए है।

    जाने क्या है प्रदूषण की मुख्य वजह

    आपको बता दे कि Delhi NCR प्रदूषण के कई कारण है। जैसे की बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही, आस पास के राज्यों में बड़ी संख्या में पराली जलना। मगर इन सब के अलावा एक प्रकृतिक कारण भी है जो दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का एक बड़ा और मुख्य कारण है। आपको बता दे कि दिल्ली इंडो गंगेटिक प्लेन्स पर बसा हुआ है। जिसका मतलब होता है एक ऐसी जगह जहाँ की भूमि समतल है। यही कारण है कि ठंड के समय में हवा की स्पीड में स्थिरता आ जाती है और पॉल्यूशन के पार्टिकल एक जगह पर ही अटके रह जाते है. जिसके कारण पॉल्यूशन बढ़ जाता है। इसके अलावा अभी भारत में बीएस 3 और बीएस 4 वाहनों की आवाजाही होती है जो बड़ी संख्या में वायू को प्रदूषित करने वाले धूएं छोड़ते है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या पैसले लेती है।

  • Rahul Gandhi ने बढ़ते प्रदूषण पर किया सरकार का घेराव!

    Rahul Gandhi ने बढ़ते प्रदूषण पर किया सरकार का घेराव!

    Rahul Gandhi: आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने एक गंभीर मुद्दे को उठाया, जो इस वक्स की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। राहुल गाँधी के इस मुद्दे ने संसद के साथ साथ पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा। राहुल गाँधी ने देश में बढ़ते Pollution पर सरकार से विशेष चर्चा की माँग की। साथ ही सरकार और विपक्ष दोनो को एक साथ मिलकर काम करने की गुजारिश भी की। इतना ही नही राहुल गाँधी नेे जन समस्या को प्राथमिकता देने की भी बात कही। आइए जानते है राहुल गाँधी ने क्या कुछ कहा। साथ ही जानेंगे की सरकार ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी। तो खबर को अंत तक पढ़ना न भूले।

    Rahul Gandhi की इस बात ने खींचा सबका ध्यान

    जानकारी के लिए बता दे कि आज राहुल गाँधी ने सदन में बढ़ते वायू प्रदूषण के मुद्दे को उठाया। राहुल गाँधी ने अपने भाषण में कहा कि वायू प्रदूषण से लोग बीमार पड़ रहे है। बुज़ुर्गों का दम घुट रहा है। और बच्चो के फेफड़े भी खराब हो रहे है। सदन में इस जन समस्या को उठाते हुए राहुल गाँधी ने एक बेहद अच्छी बात कही, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होने कहा कि इसे हमे एक मुद्दे की तरह नही देखना चाहिए। हमे इसे एक समस्या की तरह देखना चाहिए। राहुल गाँधी ने आगे कहा कि सरकार और विपक्ष दोनो को मिल कर Pollution की इस समस्या का एक सटीक समाधान निकालना चाहिए। इतना ही नही इसके अलावा राहुल ने कहा कि हमें ये दिखाना चाहिए कि हम सिर्फ लड़ते नही है, बल्कि राष्ट्रहित में साथ मिल कर काम भी कर सकते है।

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    राहुल के सवालों पर सरकार ने दिया ये जवाब

    वही बात अगर सरकार की करे तो, Rahul Gandhi द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर सरकार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। बता दे कि संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने राहुल गाँधी को जवाब देते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार है। किरेण रिजिजू ने राहुल गाँधी के सवालो पर जवाब देते हुए कहा कि इस मुद्दे को पहले ही बिज़नेस एडवाइज्री कमिटी में पेश किया जा चुका है। आपसी सहमति और विपक्ष के सहयोग के साथ जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएँगे। इतना ही नही किरेण रिजिजू ने आगे कहा कि कुछ अगले 5 से 10 साल में ये समस्या खत्म हो या न हो, मगर इस पर काम शुरु हो जाएंगे। अब देखना होगा कि क्या सरकार बढ़ते Pollution पर कोई ठोस कदम उटाती है या नही।

  • किडनी फेल से बच्चों की मौत: खांसी का सिरप बन सकता है जानलेवा, DGHS ने दी चेतावनी

    किडनी फेल से बच्चों की मौत: खांसी का सिरप बन सकता है जानलेवा, DGHS ने दी चेतावनी

    मध्य प्रदेश के Chhindwara जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पिछले दो हफ्तों में 9 मासूम बच्चों की मौत हुई है, जिनका कारण Kidney Failure बताया जा रहा है। मौतों के पीछे संदेह की सुई जा रही है Cough Syrups की तरफ। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि कुछ खांसी की दवाओं में मौजूद toxic elements बच्चों की किडनी और अन्य अंगों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

    देशभर में फैल रहा डर

    मध्य प्रदेश के अलावा, महाराष्ट्र में दो बच्चों की मौत और राजस्थान के Sikar जिले में एक मौत की पुष्टि हुई है। इन घटनाओं ने पूरे देश में fear and panic फैला दिया है। माता-पिता अपने बच्चों को खांसी की दवा देने में सतर्क हो गए हैं। इस खतरनाक घटनाक्रम ने साबित कर दिया कि over-the-counter medicines भी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।

    DGHS ने जारी की अहम एडवाइजरी

    Directorate General of Health Services (DGHS) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि छह साल से कम उम्र के बच्चों को बिना doctor prescription के कोई भी खांसी की दवा नहीं दी जानी चाहिए। DGHS ने यह भी सुझाव दिया कि किसी भी दवा के सेवन से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। यह कदम बच्चों की health safety सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    खांसी की दवाओं में संभावित खतरा

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कुछ कफ सिरप में toxic ingredients हो सकते हैं जो बच्चों की kidney function और liver function को प्रभावित कर सकते हैं। इस वजह से बच्चों में organ failure और मौत का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सुरक्षित और प्रमाणित दवाओं का ही उपयोग करना चाहिए।

    माता-पिता के लिए सावधानी के उपाय

    1. 6 साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह खांसी की दवा न दें।
    2. किसी भी खांसी या सर्दी की दवा देने से पहले pediatrician consultation लें।
    3. बच्चों की सेहत पर नजर रखें और किसी भी adverse effect की स्थिति में तुरंत डॉक्टर को सूचित करें।
    4. ऑनलाइन खरीदी जाने वाली cough syrups की authenticity जरूर जांचें।

    इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि बच्चों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। माता-पिता और अभिभावक vigilant and cautious रहें और केवल सुरक्षित और प्रमाणित दवाओं का उपयोग करें। DGHS की एडवाइजरी को गंभीरता से लें और बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

  • मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा में बच्चों की खांसी दवा की जांच शुरू, NCDC टीम ने लिए सैंपल

    मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा में बच्चों की खांसी दवा की जांच शुरू, NCDC टीम ने लिए सैंपल

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत और बीमारियों से जुड़ी खांसी की दवा की जांच के लिए NCDC की केंद्रीय टीम ने सैंपल एकत्रित किए। राजस्थान में भी ऐसे मामले सामने आने के बाद दवा पर रोक लगाई गई थी। जानिए पूरी खबर और सुरक्षा उपाय।

    NCDC ने की बच्चों की खांसी दवा की जांच शुरू

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) की केंद्रीय टीम ने बच्चों में खांसी की दवा से जुड़े संदिग्ध मामलों की जांच के लिए सैंपल एकत्रित करना शुरू कर दिया है।

    जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इस दवा के सेवन से बच्चों में गंभीर बीमारियाँ या मृत्यु के मामले सामने आए हैं। NCDC की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।

    राजस्थान में सामने आए इसी तरह के मामले

    राजस्थान में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे, जिसके कारण खांसी की दवा के कुछ बैच की जांच की गई थी। राजस्थान सरकार ने इस दवा के वितरण पर फिलहाल रोक लगा दी है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों ने चेताया है कि बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रमाणित दवाओं का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। किसी भी संदिग्ध दवा का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    मध्य प्रदेश में सैंपल जांच के लिए भेजे गए

    मध्य प्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा में संदिग्ध खांसी दवा के सैंपल को जांच के लिए भेजा है। यह कदम बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने और किसी भी संभावित जोखिम से निपटने के लिए उठाया गया है।

    सरकार ने माता-पिता से अपील की है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें और संदिग्ध दवाओं से बचें। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर बच्चों में खांसी या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।

    बच्चों की सुरक्षा और सतर्कता का संदेश

    इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना और प्रमाणित दवाओं का ही प्रयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता और अभिभावकों को चाहिए कि वे केवल सरकारी स्वास्थ्य निर्देशों और प्रमाणित दवा कंपनियों की सलाह का पालन करें।

    साथ ही सोशल मीडिया या अफवाहों पर विश्वास न करें। सिर्फ़ भरोसेमंद और आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें। बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखना हर परिवार की जिम्मेदारी है।

    छिंदवाड़ा में NCDC द्वारा खांसी की दवा की जांच यह संदेश देती है कि सरकार बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के मामले यह दिखाते हैं कि संदिग्ध दवाओं पर समय रहते निगरानी और जांच जरूरी है। माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए और केवल डॉक्टर की सलाह से ही दवा का सेवन करना चाहिए। इस कदम से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और किसी भी संभावित खतरे से बचाव होगा।

  • World Heart Day 2025: दिल की सेहत के लिए जागरूकता का दिन…

    World Heart Day 2025: दिल की सेहत के लिए जागरूकता का दिन…

    हर साल 29 सितंबर को World Heart Day यानी विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को हृदय रोगों और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए समर्पित है। हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान देना केवल लंबी उम्र के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी जरूरी है।

    वर्ल्ड हार्ट डे का इतिहास

    विश्व हृदय दिवस की शुरुआत 1999 में वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य हृदय रोगों और स्ट्रोक के खतरे को कम करना और लोगों में जीवनशैली संबंधी जागरूकता फैलाना है। इस दिन दुनियाभर में विभिन्न कार्यक्रमों और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है।

    दिल की बीमारियों के कारण

    आज की तेज़-तर्रार जीवनशैली, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण हृदय रोग आम होते जा रहे हैं। हृदय रोगों के मुख्य कारणों में शामिल हैं:

    • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)
    • कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना (High Cholesterol)
    • धूम्रपान और शराब का सेवन
    • अत्यधिक तनाव (Stress)
    • शारीरिक गतिविधियों की कमी (Lack of Exercise)
    • मोटापा (Obesity)

    हृदय स्वास्थ्य के लिए जरूरी उपाय

    World Heart Day 2025 का संदेश है कि हर व्यक्ति को अपने हृदय की देखभाल करनी चाहिए। इसके लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं:

    1. संतुलित आहार: ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले उत्पादों का सेवन करें।
    2. नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30 मिनट तक चलना, दौड़ना या योग करना हृदय के लिए फायदेमंद है।
    3. धूम्रपान और शराब से परहेज: यह हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।
    4. तनाव कम करें: ध्यान, योग और शांति के अभ्यास से तनाव नियंत्रित किया जा सकता है।
    5. नियमित जांच: रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल की नियमित जांच दिल की बीमारियों से बचाव में मदद करती है।

    World Heart Day 2025 का महत्व

    वर्तमान समय में हृदय रोग हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। विश्व हृदय दिवस हमें याद दिलाता है कि हृदय स्वास्थ्य की अनदेखी करने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह दिन लोगों को प्रेरित करता है कि वे अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं और अपने हृदय को स्वस्थ रखें।

    जागरूकता फैलाने के लिए गतिविधियां

    • हृदय स्वास्थ्य शिविर (Heart Health Camps)
    • वॉकाथॉन और रनिंग इवेंट्स
    • शिक्षा और सेमिनार
    • सोशल मीडिया कैम्पेन
    • स्कूल और कॉलेज प्रोग्राम्स

    इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य लोगों को दिल की बीमारियों के लक्षण, रोकथाम और उपचार के बारे में जानकारी देना है।

    World Heart Day केवल एक प्रतीकात्मक दिन नहीं है, बल्कि यह हमें यह सिखाता है कि हमें अपने जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाना चाहिए। दिल की देखभाल करना अब केवल बुजुर्गों के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए भी अहम है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव-मुक्त जीवन शैली अपनाकर हम अपने दिल को स्वस्थ रख सकते हैं।

    इस विश्व हृदय दिवस, अपने दिल को दें प्राथमिकता और दूसरों को भी प्रेरित करें कि वे हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।

  • WHO ने कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति पर जांच जारी रखने की आवश्यकता जताई

    WHO ने कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति पर जांच जारी रखने की आवश्यकता जताई

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरुवार, 26 जून, 2025 को एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत और उसकी उत्पत्ति को लेकर सभी संभावित अनुमानों पर चर्चा और जांच अभी भी जारी है। हालांकि महामारी शुरू हुए कई साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक महामारी की उत्पत्ति पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि वैश्विक समुदाय को इस घातक वायरस की उत्पत्ति को समझने के लिए और भी गहराई से अध्ययन करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।

    कोविड-19 महामारी का वैश्विक प्रभाव

    कोविड-19 महामारी ने न केवल लाखों लोगों की जान ली, बल्कि इसके प्रभाव ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया। WHO के अनुसार, इस महामारी ने लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) लोगों की जान ले ली है, जो इसे इतिहास की सबसे घातक महामारियों में से एक बनाता है। इसके साथ ही, इस वैश्विक संकट ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं (economic impact) को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ मंदी का शिकार हुईं, व्यापार ठप हो गया, और लाखों लोगों की नौकरी चली गई।

    स्वास्थ्य प्रणाली पर महामारी का प्रभाव

    महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं और अस्पताल भी अत्यधिक दबाव में आ गए। कई जगहों पर स्वास्थ्य प्रणाली (health systems) पूरी तरह से चरमरा गईं। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि कई देशों में स्वास्थ्य ढांचे में कितनी कमजोरियाँ मौजूद हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी, संसाधनों का अभाव, और अस्पतालों की अपर्याप्त तैयारी ने महामारी से निपटने की प्रक्रिया को और कठिन बना दिया।

    सतर्क रहने की जरूरत

    WHO ने जोर देकर कहा है कि जब तक महामारी से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक पूरी दुनिया को सतर्क रहना होगा। वायरस के नए स्वरूप (variants) सामने आने की संभावना बनी हुई है, और इसके चलते संक्रमण के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है। इसलिए, WHO की सलाह है कि सभी देशों को महामारी की संभावित दूसरी लहरों या नए वायरस खतरों से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करना चाहिए।

    वैश्विक सहयोग और जागरूकता

    महामारी के समय दिखा कि बिना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के इस संकट से लड़ना संभव नहीं है। वायरस की उत्पत्ति और इसके फैलाव को समझने के लिए वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक, स्वास्थ्यकर्मी, और सरकारें एकजुट होकर काम कर रही हैं। इसी प्रकार की सहयोगी भावना और भविष्य में बेहतर तैयारी ही हमें अगली बार महामारी से बचा सकती है। कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को एक बड़ा सबक सिखाया है। इसके कारण मानव जीवन, स्वास्थ्य प्रणालियों, और अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा है। WHO की ongoing जांच यह दर्शाती है कि हमें इस महामारी की उत्पत्ति को समझने के लिए और अधिक शोध की जरूरत है। तब तक हमें सतर्क रहना होगा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का निर्माण करना होगा और वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाना होगा।

  • दुनिया भर में कीमोथेरेपी दवाओं की गुणवत्ता जांच में चौंकाने वाले परिणाम

    दुनिया भर में कीमोथेरेपी दवाओं की गुणवत्ता जांच में चौंकाने वाले परिणाम

    द ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म (TBIJ, www.tbij.com) की हालिया रिपोर्ट ने एक साबित कर दिया है कि दुनियाभर में इस्तेमाल की जाने वाली महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गई हैं। इन दवाओं का उपयोग 100 से अधिक देशों में कैंसर के इलाज के लिए किया जा रहा है, लेकिन अब यह खुलासा हुआ कि कई मामलों में ये उपचार अप्रभावी हो सकते हैं या जानलेवा दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं thebureauinvestigates.com+5thebureauinvestigates.com+5thebureauinvestigates.com+5


    1. समस्या की गंभीरता: प्रभावहीनता या घातकता

    TBIJ की रिपोर्ट अनुसार, जो कीमोथेरेपी दवाएं – विशेषकर ल्यूकेमिया जैसे आम कैंसर उपचारों की रीढ़ – उन्हें लेकर यह आशंका जताई गई है कि:

    • कुछ दवाओं में सक्रिय तत्व की मात्रा इतनी कम मिली कि फार्मासिस्ट्स के अनुसार, इन्हें देना मरीज़ को कुछ न देने के बराबर था ।
    • दूसरी ओर, कुछ दवाओं में बहुत अधिक सक्रिय तत्व पाया गया, जिससे अंगों को गंभीर नुकसान या मृत्यु का जोखिम हो सकता है ।

    ब्रिटिश ऑन्कोलॉजी फार्मासिस्ट एसोसिएशन की उपाध्यक्ष शरीन नाभानी-गेबारा ने कहा:

    “दोनों ही स्थितियां भयावह हैं। यह दिल तोड़ने वाला है।”


    2. सबस्टैंडर्ड दवाओं का वैश्विक फैलाव

    • अध्ययन में 189 सैंपलों का विश्लेषण किया गया और लगभग 20% (एक‑पाँचवाँ हिस्से) ने गुणवत्ता परीक्षण फेल किया ewn.co.za
    • ये समस्याग्रस्त दवाएं समृद्ध और निम्न-आय वाले दोनों तरह के देशों में भेजी गईं – नेपाल, इथियोपिया, उत्तर कोरिया, अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब सहित ।
    • सबसे खराब परिणाम “क्रायटा” नामक कंपनी — वीनस रेमेडीज़ के साइक्लोफॉस्फेमाइड ब्रांड के साथ आए जहाँ आठ नमूनों में से छह में आधे से भी कम सक्रिय तत्व पाया गया thebureauinvestigates.com+3ewn.co.za+3dawn.com+3

    3. मुख्य कारण: निर्माण प्रक्रिया और लागत में कटौती

    • बड़ी संख्या में फेल दवाएं भारत में बनी बताई गईं — कुल 17 में से 16 कंपनियां भारत की हैं thebureauinvestigates.com+1ewn.co.za+1
    • पोर्टेबल दवा निर्माण में कीमत कम करने का दबाव था, जिससे कुछ निर्माता सक्रिय सामग्री घटा/बढ़ा रहे थे या पुराने उपकरणों का उपयोग कर रहे थे thebureauinvestigates.com
    • उदाहरण के लिए, Intas/Accord Healthcare के cisplatin और मेथोट्रेक्सेट के शेयर बढ़ने के दौरान कीमतें गिर गईं — बाद में उनके एक भारत स्थित संयंत्र में दस्तावेज़ फाड़ने तथा “गुणवत्ता नियंत्रण में विफलता” की रिपोर्ट आई thebureauinvestigates.com
    • भारत के साथ-साथ वैश्विक नियामक ढांचे (WHO, राष्ट्रीय नियामक) की निगरानी कमजोर है ।

    4. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं नियामक Agencies की चूक

    • WHO को पहले भी asparaginase जैसी महत्वपूर्ण दवाओं में गुणवत्ता की कमी के बारे सूचित किया जा चुका था thebureauinvestigates.com+4thebureauinvestigates.com+4statnews.com+4
    • लेकिन, सालों तक कोई मेडिकल अलर्ट जारी नहीं किया गया और कई देशों ने कार्रवाई नहीं की statnews.com+1ewn.co.za+1
    • WHO की यह प्रतिक्रिया भी रही कि “पूरी जांच में समय लग सकता है” एवं कुछ देशों ने “कोई समस्या पाई नहीं” जैसी रिपोर्ट दी ।

    5. रोगियों पर प्रभाव और स्वास्थ्य परिणाम

    • फार्मासिस्टों और चिकित्सकों ने बताया कि कुछ मरीजों का इलाज रोकना पड़ा क्योंकि दवा काम नहीं कर रही, जबकि कुछ में बनावट / असामान्य दुष्प्रभाव जैसे अत्यधिक विषाक्तता देखी गई ।
    • अफ्रीका के एक फार्मासिस्ट ने कहा कि अगर दवा असर ही न करे, तो उपचार का विश्वास टूट जाता है ।
    • निम्न-आय वाले देशों में, जहाँ कैंसर उपचार की लागत पहले से ही अत्यधिक होती है, अगर गलत दवा से प्रभाव नहीं होता, तो मरीज़ के पास पुनः खरीदने के संसाधन नहीं होते — जहां एक गलत दवा एक दु:खद त्रासदी बन जाती है ।

    6. समाधान की राह: त्वरित परीक्षण उपकरण और सख्त निगरानी

    • यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉट्रे डेम के प्रोफेसर मैर्या लिएकरमैन की टीम ने “chemoPAD” नामक त्वरित किट विकसित की है जो 2 डॉलर प्रति उपकरण से कम में परीक्षण कर सकती है ।
    • यह उपकरण africa सहित कई देशों में फील्ड‑टेस्ट किए गए हैं और cisplatin जैसे कीमो दवाओं में कमी पाए जाने में सक्षम रहे ।
    • इस श्रेणी के त्वरित परीक्षण को लागू करने से दवा बाजार में फेल दवाओं को जल्दी पहचानकर निकाला जा सकता है और गुणवत्ता नियंत्रण बढ़ाया जा सकता है।

    7. आगे की रणनीतियाँ और सिफारिशें

    1. राष्ट्रीय और वैश्विक अलर्ट सिस्टम को सुदृढ़ करना—WHO, यूएन एवं मानवाधिकार निकायों की भागीदारी आवश्यक।
    2. रिफीलिब्रेशन और कार्यवाही दोषपूर्ण बैच की त्वरित रिकॉल और निर्माता पर कठोर जुर्माना/अनुशासन।
    3. निर्माता कार्मिकों को जवाबदेह बनाना कंपनियों या क़ानूनी संस्थाओं से जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
    4. गुणवत्ता नियोजन और परीक्षण सुविधा LMIC देशों में विश्वसनीय लैब्स और निगरानी उपकरण स्थापित करें।
    5. महाविद्यालय, नागरिक समाज और मरीज़ संगठनों को सशक्त बनाना—इन्हें मामलों की सतर्कता और सूचना देने में सक्षम बनाएं।
    6. TBIJ की यह रिपोर्ट एक स्पष्ट चेतावनी है कि महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं की गुणवत्ता एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। अगर सक्रिय नियामक कार्रवाई, त्वरित परीक्षण, वैश्विक सहयोग, और जिम्मेदार निर्माण प्रणाली लागू न की गई, तो लगातार बढ़ती संख्या में कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावहीन या घातक हो सकता है।इसलिए, सरकारें, चिकित्सा संस्थान, निर्माता और अंतरराष्ट्रीय निकाय, सभी को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, ताकि कैंसर उपचार सुरक्षित, प्रभावशाली और भरोसेमंद बने रहें।

    कीवर्ड्स शामिल

    • कीमोथेरेपी दवाएं
    • गुणवत्ता परीक्षण में फेल
    • सक्रिय तत्व की मात्रा
    • ल्यूकेमिया उपचार
    • जानलेवा दुष्प्रभाव
    • TBIJ रिपोर्ट
    • वैश्विक स्वास्थ्य संकट
    • समीकरण रिसर्च
    • ChemoPAD त्वरित परीक्षण
  • सिकल सेल रोग की समय पर पहचान से बच्चों की जान बचाना संभव, ICMR अध्ययन का खुलासा

    सिकल सेल रोग की समय पर पहचान से बच्चों की जान बचाना संभव, ICMR अध्ययन का खुलासा

    भारत में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के एक ताज़ा अध्ययन में पाया गया है कि सिकल सेल रोग की समय पर पहचान और इलाज से बच्चों की मृत्यु दर को 20-30% से घटाकर 5% से कम किया जा सकता है। यह जानकारी भारत में बाल स्वास्थ्य और अनुवांशिक रोगों के इलाज में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है।

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    सिकल सेल रोग क्या है?

    सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease) एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोलाकार के बजाय हंसिए (sickle) के आकार की हो जाती हैं। इससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे तेज दर्द, संक्रमण, और अंग क्षति जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। यह रोग खासकर आदिवासी समुदायों और कुछ विशेष जातीय समूहों में अधिक पाया जाता है।

    ICMR की नवजात स्क्रीनिंग रिपोर्ट

    ICMR द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच 63,053 नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग की गई। यह जांच मुंबई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोहेमेटोलॉजी द्वारा ICMR के सहयोग से देश के सात उच्च प्रभावित क्षेत्रों में की गई थी। इन क्षेत्रों का चयन उन जिलों से किया गया था, जहां सिकल सेल रोग की व्यापकता सबसे अधिक है।

    समय पर पहचान और उपचार का महत्व

    विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के तुरंत बाद सिकल सेल रोग की पहचान हो जाने पर बच्चे को समय पर सुलभ उपचार और सावधानी दी जा सकती है। इसमें शामिल हैं

    • संक्रमण से बचाने के लिए नियमित दवाइयाँ और वैक्सीनेशन
    • फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स
    • आवश्यकतानुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन
    • निरंतर चिकित्सा निगरानी और परामर्श

    इन उपायों से बच्चों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है और उनकी सामान्य वृद्धि और विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

    क्यों है यह अध्ययन महत्वपूर्ण?

    भारत सरकार द्वारा सिकल सेल उन्मूलन मिशन 2047 की घोषणा के बाद यह अध्ययन बेहद प्रासंगिक हो गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यदि नवजात स्तर पर सिकल सेल रोग की पहचान की जाए, तो न केवल मृत्यु दर को कम किया जा सकता है, बल्कि आजीवन इलाज की लागत भी घटाई जा सकती है।

    यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां:

    • स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है,
    • गरीबी और अशिक्षा के कारण समय पर इलाज नहीं हो पाता,
    • और जहां आदिवासी समुदायों में सिकल सेल बीमारी का प्रसार अधिक है।

    नीति निर्माताओं के लिए संदेश

    यह अध्ययन नीति निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर करता है कि अब समय आ गया है कि नवजात स्क्रीनिंग को अनिवार्य किया जाए, खासकर उन राज्यों और जिलों में जहां इस रोग का प्रभाव अधिक है जैसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, गुजरात और तेलंगाना।सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिकल सेल जांच की सुविधा सुनिश्चित कर, जन्म के बाद तुरंत जांच कराई जानी चाहिए। ICMR का यह अध्ययन भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक उम्मीद की किरण है। अगर नवजातों में सिकल सेल रोग की समय पर जांच और उपचार किया जाए, तो हजारों बच्चों की जान बचाई जा सकती है। साथ ही, इससे स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम होगा और समाज की उत्पादकता में वृद्धि होगी।