लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पर हंगामा: अमित शाह और विपक्ष में तीखी नोकझोंक

तीन विधेयकों का प्रस्तुति और विवाद की शुरुआत

20 अगस्त 2025 को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया, जिनमें संविधान संशोधन विधेयक 2025 भी शामिल था। इस विधेयक ने सदन में तीव्र विवाद को जन्म दिया, क्योंकि विपक्षी दलों ने इसका जोरदार विरोध किया। विधेयक के पेश होने के साथ ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और सदन में हंगामा मच गया। इस दौरान केरल के अलप्पुझा से कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने गृह मंत्री पर व्यक्तिगत आरोप लगाए, जिसने इस विवाद को और तीखा कर दिया।

के.सी. वेणुगोपाल का आरोप और अमित शाह का जवाब

वेणुगोपाल ने संविधान संशोधन विधेयक 130 का विरोध करते हुए गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अमित शाह गुजरात के गृह मंत्री थे, तब उन पर लगे आरोपों के बावजूद उन्होंने नैतिकता का पालन नहीं किया। इस टिप्पणी पर अमित शाह तुरंत अपनी जगह से खड़े हो गए और वेणुगोपाल को जवाब देते हुए कहा, “मुझे सुनो जरा, पहले बैठ जाओ।” शाह ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे थे और उन्होंने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह गिरफ्तारी से पहले ही इस्तीफा दे चुके थे और जब तक कोर्ट ने उन्हें निर्दोष साबित नहीं किया, तब तक उन्होंने कोई पद स्वीकार नहीं किया। शाह का यह जवाब न केवल उनके रिकॉर्ड को स्पष्ट करने का प्रयास था, बल्कि विपक्ष के आरोपों को करारा जवाब भी था।

विपक्ष का उग्र विरोध और बिल की प्रतियां फाड़ने की घटना

विवाद यहीं नहीं थमा। विपक्षी सांसदों ने संविधान संशोधन विधेयक की प्रतियां फाड़कर गृह मंत्री अमित शाह की ओर फेंक दीं। यह घटना सदन में अराजकता का प्रतीक बन गई, जिसने विधेयक के प्रति विपक्ष के गहरे असंतोष को दर्शाया। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को संविधान के मूल ढांचे के लिए खतरा बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया। इस हंगामे के बीच, सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न हुआ और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

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अमित शाह का सिलेक्ट कमिटी प्रस्ताव

हंगामे के बावजूद, अमित शाह ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि वह इस विधेयक को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखेंगे। इस कमिटी में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल होंगे, जो विधेयक की बारीकियों की जांच करेंगे। शाह के इस कदम को विपक्ष के विरोध को शांत करने और विधेयक पर व्यापक चर्चा सुनिश्चित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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