August 27, 2026

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जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की खाली सीटें: द्विवार्षिक चुनाव की व्यवस्था लागू करने में चुनौतियां

जम्मू और कश्मीर में राज्यसभा की चार सीटें 2021 से खाली पड़ी हैं। पिछले साल अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने के बावजूद इन सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव का रास्ता अभी तक साफ नहीं हो सका है। हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से इन सीटों के कार्यकाल को क्रमबद्ध करने के लिए राष्ट्रपति के आदेश की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया। इस लेख में हम इस मुद्दे की पृष्ठभूमि, चुनौतियों और संभावित समाधानों पर चर्चा करेंगे।

खाली सीटों का मुद्दा

जम्मू और कश्मीर की चार राज्यसभा सीटें 2021 से रिक्त हैं। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, इन सभी सीटों के लिए एक साथ चुनाव करवाए जाने हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 22 अगस्त को केंद्रीय कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग को सूचित किया कि इन सीटों के कार्यकाल को अलग-अलग करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा आदेश जारी करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। यह जवाब चुनाव आयोग की उस मांग के जवाब में था, जिसमें उसने जम्मू और कश्मीर में द्विवार्षिक चुनाव व्यवस्था को लागू करने की गुजारिश की थी।

द्विवार्षिक चुनाव व्यवस्था का महत्व

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83 के अनुसार, राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसमें एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल हर दो साल में समाप्त होता है। सामान्यतः राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। यदि बीच में कोई सीट खाली होती है, तो नए चुने गए सदस्य का कार्यकाल शेष बचे समय के लिए होता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि राज्यसभा में निरंतरता बनी रहे। हालांकि, जम्मू और कश्मीर में पिछले 30 वर्षों में राष्ट्रपति शासन और अन्य कारणों से यह व्यवस्था बाधित हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप सभी चार सीटों का कार्यकाल एकसमान हो गया है।

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चुनाव आयोग की पहल

चुनाव आयोग ने इस साल की शुरुआत में कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि जम्मू और कश्मीर में राज्यसभा सीटों के कार्यकाल को इस तरह से निर्धारित किया जाए कि द्विवार्षिक चुनाव की व्यवस्था लागू हो सके। इस तरह की व्यवस्था से हर दो साल में एक-तिहाई सीटों पर चुनाव हो सकेंगे, जो संवैधानिक भावना के अनुरूप है। लेकिन केंद्र ने स्पष्ट किया कि इसके लिए जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 में संशोधन की आवश्यकता होगी।

अन्य राज्यों में भी समान स्थिति

जम्मू और कश्मीर के अलावा, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में भी द्विवार्षिक चुनाव की परंपरा टूट चुकी है। पंजाब की 7 और दिल्ली की 3 राज्यसभा सीटों के लिए भी एक साथ चुनाव होते हैं। यह स्थिति समय के साथ उत्पन्न हुई है और इसे सुधारने के लिए व्यापक कानूनी बदलाव की जरूरत है। चुनाव आयोग ने केवल जम्मू और कश्मीर के लिए कार्यकाल को क्रमबद्ध करने की मांग की थी, लेकिन केंद्र का कहना है कि यह व्यवस्था सभी प्रभावित राज्यों पर लागू होनी चाहिए।

आगे की राह

जम्मू और कश्मीर में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू करने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है। जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन एक समाधान हो सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली हो सकती है। तब तक, इन रिक्त सीटों के लिए जल्द से जल्द चुनाव करवाना जरूरी है ताकि जम्मू और कश्मीर का संसद में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

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