बैठक का महत्व और प्रतीकात्मकता
24 सितंबर 2025 को पटना के सदाकत आश्रम में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जो स्वतंत्रता के बाद बिहार में पहली ऐसी सभा थी। यह 1940 के बाद इस ऐतिहासिक स्थल पर होने वाली पहली बैठक थी, जहां महात्मा गांधी ने 1921 में बिहार विद्यापीठ की नींव रखी थी। बिहार विधानसभा चुनाव (अक्टूबर-नवंबर 2025 में संभावित) से पहले यह बैठक कांग्रेस की रणनीति को मजबूत करने और राज्य में अपनी स्थिति को पुनर्जनन देने का प्रयास है। इसने राजनीतिक हलकों में उत्साह पैदा किया है।
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सचिन पायलट, अशोक गहलोत, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, और अविनाश पांडे जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हुए। लगभग 170 सदस्य, जिसमें स्थायी और विशेष आमंत्रित सदस्य, राज्य प्रभारी, मुख्यमंत्री, और विधायी दल नेता थे, ने हिस्सा लिया। राहुल गांधी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर बैठक की शुरुआत की, और पटना हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत हुआ।

मुख्य एजेंडा और मुद्दे
बैठक का फोकस बिहार चुनाव के लिए रणनीति तैयार करना था, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
- INDIA गठबंधन को मजबूत करना: RJD के साथ सीट बंटवारे और तेजस्वी यादव को CM चेहरा बनाने की चर्चा।
- सामाजिक मुद्दे: बेरोजगारी, युवा पलायन, किसान संकट, बाढ़ राहत में विफलता, और अपराध।
- चुनावी धांधली का आरोप: खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, वोटर वेरिफिकेशन में गड़बड़ियों को “लोकतंत्र पर हमला” बताया।
नेताओं के बयान
- मल्लिकार्जुन खड़गे: “BJP नीतीश कुमार को मानसिक रूप से रिटायर्ड मानती है। सरकार बेरोजगारी, किसानों, और बाढ़ पर नाकाम रही।”
- राहुल गांधी: ‘वोट चोरी’ को प्रमुख मुद्दा बनाया, मुख्य चुनाव आयुक्त पर लोकसभा में सवाल उठाए।
- सचिन पायलट: “बिहार की जनता बदलाव चाहती है, और गठबंधन की जीत निश्चित है।”
- पप्पू यादव (निर्दलीय सांसद, पूर्णिया): “यह बैठक ऐतिहासिक है। यह भारत के पुनर्गठन और नई आजादी की शुरुआत है। बिहार-यूपी में कांग्रेस की खोई पहचान लौटेगी।”
संभावित प्रभाव और चुनौतियां
2023 की तेलंगाना CWC बैठक की तरह, जहां कांग्रेस को सफलता मिली, यह बैठक बिहार में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है। अतिपिछड़ा न्याय जैसे संकल्पों के साथ, पार्टी ग्रामीण और हाशिए के मतदाताओं को लक्षित कर रही है। हालांकि, BJP-NDA की मजबूत पकड़ और नीतीश की रणनीति चुनौतियां हैं। पप्पू यादव जैसे सहयोगियों और भारत जोड़ो न्याय यात्रा की गति से पार्टी को बढ़ावा मिल सकता है। क्या यह बैठक बिहार में कांग्रेस को नई ऊर्जा देगी, यह चुनाव परिणाम बताएंगे।

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