14 सितंबर को दुबई में खेले गए एशिया कप के भारत-पाकिस्तान मुकाबले ने क्रिकेट मैदान से बाहर भी विवाद खड़ा कर दिया। टॉस के बाद दोनों टीमों के कप्तानों के बीच हाथ मिलाने की परंपरा निभाई नहीं गई। यही छोटी सी घटना अब बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है।
पीसीबी का आरोप और माफ़ी का दावा
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) का कहना है कि मैच रेफरी एंडी ने जानबूझकर दोनों कप्तानों को हाथ मिलाने से रोका और बाद में पाकिस्तानी टीम से माफी भी मांगी। पीसीबी ने यहां तक मांग कर दी कि एंडी को उनके पद से हटाया जाए और उनकी भूमिका की जांच हो।
ICC का स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के सूत्रों का कहना है कि रेफरी एंडी ने कोई नियम नहीं तोड़ा और उन्होंने किसी को हाथ मिलाने से रोका भी नहीं। उनके अनुसार, यह मामला सिर्फ़ एक ‘गलतफहमी’ था और माफी भी केवल उसी गलतफहमी के लिए मांगी गई थी। इस बयान के बाद यह विवाद और गहरा गया कि आखिर सच्चाई क्या है—क्या पीसीबी ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया या आईसीसी कुछ छुपा रही है।
भारतीय कप्तान का बयान
इस बीच भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान सामने आया, जिसने मामले को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि हाथ न मिलाना दरअसल एक ‘साइलेंट स्टेटमेंट’ था। यह कदम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए 26 लोगों के सम्मान में उठाया गया था। यानी यह कोई अवमानना नहीं बल्कि एक संवेदनशील निर्णय था।
बढ़ती राजनीति और विरोध
विवाद इतना बढ़ा कि पाकिस्तान ने यूएई के खिलाफ अपना अगला मैच एक घंटे की देरी से शुरू किया, इसे उन्होंने विरोध का संकेत बताया। इस घटना ने खेल से ज्यादा राजनीतिक और कूटनीतिक मायनों को जन्म दिया। दोनों देशों की मीडिया और जनता इस घटना को अपने-अपने नजरिए से देख रही है।

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